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474 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम ठप

Sun, 17 Nov 2019 10:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2019 10:21 PM IST
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MGNREGA work halted in 474 gram panchayats
गोंडा। बजट की कोई कमी नहीं है, साल भर के लिए स्वीकृत मनरेगा के 556 करोड़ के बजट को खर्च करने के लिए गांवों के पास अपार संभावनाएं हैं। बजट होने के बाद भी 474 पंचायतें हाथ बांधे बैठी हैं। इस स्थिति से हर दिन पांच हजार मजूदरों के सामने रोजी रोटी का संकट हैं। बजट होने के बाद भी पंचायतों में काम न होने के पीछे कड़ी निगरानी और कार्य में पारदर्शिता के लिए चलाए जा रहे मुहिम को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पंचायतों में काम न होने से मनरेगा के मजदूरों के सामने रोजगार की कमी है ही कर्मचारियों को वेतन देने में भी दिक्कत आ रही है। प्रशासन ने हर पंचायत को कार्य शुरू कराने और साल भर में कम से कम 3000 मानव दिवस का लक्ष्य पूरा करने की हिदायत दी है।
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मनरेगा से गांवों की सूरत बदलने के साथ ही श्रमिकों को रोजगार देने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 556 करोड़ की योजना स्वीकृति है। इसके बाद भी पंचायतें काम करने में रुचि नहीं ले रही हैं। 1054 पंचायतों में से 474 में काम ठप है। इससे करीब 5 हजार मजदूरों को हर दिन काम नहीं मिल रहा है। मनरेगा से अधिक से अधिक कार्य हो सकें, इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ने कई मुहिम भी शुरू की। पंचायतों को परंपरागत सड़क आदि के कार्यों से ऊपर उठकर गांवों के विकास को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।
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हर गांव में युवाओं के लिए खेल मैदान विकसित करने के साथ ही किसानों के लिए चकरोड़ सुधार, खेतों का समतलीकरण, खाली तालाबों के विकास आदि कार्य कराने के निर्देश भी दिए। यही नहीं टेढ़ी मनवर, सरयू, बिसुही नदियों के तटवर्ती गांवों के एक किमी दायरे में आने वाले तालाबों का जीर्णोद्धार कराने पर जोर दिया। इन सबके बावजूद पंचायतों में काम ठप होना चौंकाने वाला है। ऑनलाइन मॉनीटरिंग से की गई जांच में 474 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कार्य शुरू न होने का खुलासा हुआ है। काम शुरू न होने से पंचायतों में मानव दिवस का सृजन नहीं हो पा रहा है, इससे मनरेगा के संविदा कर्मियों को मानदेय देने में दिक्कत आ रही है। अब नए सिरे से वित्तीय वर्ष में अवशेष माह में सभी पंचायतों को 3000 मानव दिवस का सृजन करना है। इस तरह पूरे जिले में श्रमिकों को काम मिलने के साथ ही कर्मियों को मानदेय मिलने में भी आसानी होगी।
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इन पंचायतों में ठप है काम
मनरेगा के कार्यों में लापरवाही बहुत बढ़ गई है। सबसे अधिक लापरवाही तो शहर से सटे ब्लॉकों में ही हो रही है। अकेले कटरा के ही 67 पंचायतों में काम ठप है। कटरा में 67 पंचायतें ही हैं और एक में भी कार्य नही हो रहा है। इसी तरह बभनजोत के 66 पंचायतों में 35 में, बेलसर के 51 पंचायतों के 17 में, छपिया के 81 पंचायतों में 30, करनैलगंज के 65 में 17, हलधरमऊ के 61 में 21, इंटियाथोक के 71 में 51, झंझरी के 75 में 33, मनकापुर के 77 में 39, मुजेहना के 57 में 10, नवाबगंज के 61 में 16, पंडरी कृपाल के 49 में 17, परसपुर के 68 में 40, रुपईडीह के 89 में 39, तरबगंज के 54 में 21 व वजीरगंज के 62 में 21 पंचायतों में मनरेगा से काम नहीं हो रहे हैं। 1054 पंचायतों में 474 पंचायतों में का ठप है।
474 पंचायतों के मनरेगा कर्मियों एवं प्रधानों की रिपोर्ट तलब
मनरेगा से कार्य न कराने वाली पंचायतों का ब्योरा विकास विभाग जुटा रहा है। जिन गावों में कार्य नही हो रहा है, वहां के ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों, रोजगार सेवकों, तकनीकी सहायकों और ग्राम प्रधानों के बारे में खंड विकास अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के साथ ही उन ग्राम पंचायतों के अधिकारियों, कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिए जाने और कार्रवाई किए जाने की तैयारी हो रही है। काम न होने से विकास की प्रगति में जिले की स्थिति में गिरावट आ रही है।

कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मनरेगा से हर दिन हर गांव में कार्य जारी रखने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी लापरवाही कर रहे हैं, ऐसी पंचायतों के कर्मियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है। हर गांव में कार्य शुरू कराने को कहा गया है। मनरेगा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -आशीष कुमार, सीडीओ
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