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Gonda News: चौथी बार मिली तारीख, भटक रही विवाहिता

Sun, 05 Jan 2025 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 05 Jan 2025 11:28 PM IST
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Met for the fourth time, married woman wandering
गोंडा। रिजर्व पुलिस ने लाइन में आयोजित परिवार परामर्श केंद्र पर अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। भीषण ठंड के बावजूद केंद्र पर बचाव के लिए कोई इंतजाम तक नहीं किए गए हैं। इतना ही नहीं, लापरवाही का आलम यह है कि नोटिस जारी होने के बावजूद विभागीय मिलीभगत से दूसरे पक्ष मनमानी बरत रहे हैं।
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नगर कोतवाली के सेमरादम्मन निवासी विवाहिता ने बताया कि उनकी छह साल पहले देवरिया निवासी स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी से शादी हुई थी। चार साल का एक बेटा है। करीब पांच महीने पहले पति व सास ने मासूम बेटे को लेकर उसे निकाल दिया। देवरिया पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत की। मगर उसकी सुनवाई नहीं हुई। गोंडा मायके में आने के बाद पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया गया। करीब चार महीने में चार बार आ चुकी हूं। महिला थाना पुलिस ने नोटिस भी जारी किया। मगर देवरिया पुलिस नोटिस तामील नहीं करा पाई है। रविवार को एक बार फिर बुजुर्ग पिता व भाई के साथ पहुंची तो परामर्शदाताओं ने नौ फरवरी को अगली तारीख दे दी। पिता हाथ जोड़कर परामर्शदाताओं के सामने गिड़गिड़ाता रहा। मगर दूसरे पक्ष विवाहिता के पति के न आने से बेबस नजर आए। परामर्शदाताओं ने कहा कि पति को सुनने के बाद कार्रवाई की सलाह दी जाएगी।
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कहां आ रही समस्या...?

परामर्शदाताओं ने बताया कि थानों में मुकदमों का भार कम करने और परिवार को आपस में बैठाकर सुलह-समझौता कर परिवार को बचाने की कवायद है। महानिदेशक के आदेश पर एसपी कार्यालय के अधीन परिवार परामर्श केंद्र संचालित हो रहा है। इसके लिए पुलिस संबंधी समस्या हल करने के लिए बाकायदा अधिकारी नामित हैं। मगर अधिकारी नदारद रह रहे हैं। परिवार को टूटने से बचाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। नोटिस से लेकर दूसरे जिलों की पुलिस से संवाद नहीं हो पा रहा है। ऐसे में भटकना पड़ रहा है।
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सामंजस्य बनने तक आती है दिक्कतें


--केंद्र पर सुनवाई कर रहे गंगाधर शुक्ल, यशोदानंदन त्रिपाठी और राजमंगल मौर्य समेत परामर्शदाताओं का कहना है कि शादी के बाद दो परिवारों में सामंजस्य बैठने तक दिक्कतें रहती हैं। इस दौरान बाहरी दखल के साथ ही तकनीकी व्यवस्थाएं भी रिश्तों में खटास खो रही है। ऐसे में परामर्श केंद्र के माध्यम से परिवार में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। कुल मिलाकर 37 मामलों की सुनवाई की गई।
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