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अब इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे डीजल लोको, सबको मिलेेगा फायदा

Sun, 17 Apr 2022 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Apr 2022 11:33 PM IST
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loco pilot,rail engin
फोटो-2-गोंडा में स्टेशन पर खड़ा रेलवे इंजन। संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। गोंडा रेलवे यार्ड में गत 40 वर्ष से संचालित डीजल लोको अगले पांच माह के दौरान गोंडा से जुड़े रेलवे के इतिहास का हिस्सा बन कर रह जाएगा। विद्युतीकरण कार्य पूरा हो जाने के बाद यहां से डीजल इंजन चलित किसी भी ट्रेन का संचालन नहीं होगा। फिलहाल कुछ माह तक यहां केवल शंटिंग के दौरान ही डीजल इंजन का प्रयोग दिखाई देगा।
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करीब 50 वर्ष पूर्व गोंडा रेलवे यार्ड में कोयले का उपयोग करके इंजन व लोको से ट्रेनों का संचालन होता था। इसके कुछ वर्ष के बाद कोयला से चलने वाले इंजन को भारतीय रेल ने बंद कर दिया। उसकी जगह डीजल लोको से ट्रेनें चलने लगीं। इसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने डीजल लोको की क्षमता बढ़ाने के लिए गत 30 जनवरी 1982 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री शिवनारायण ने गोंडा रेलवे डीजल लोको शेड का उद्घाटन किया था। इसके लिए यहां 100 से 150 डीजल लोको की क्षमता का शेड बनाया गया। इस शेड में डीजल लोको की मरम्मत व रखरखाव का कार्य होने लगा। इसी शेड के डीजल लोको को लगाकर ट्रेनों को दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, पंजाब व तमिलनाडु आदि स्थानों के लिए रवाना किया जाता था। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने पर रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण का काम युद्ध स्तर से किया जाने लगा। साथ ही गोंडा डीजल शेड का नाम बदलकर गोंडा इलेक्ट्रिक शेड कर दिया गया।
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गोंडा रेलवे यार्ड व लूप लाइन के बलरामपुर मार्ग व बहराइच रेलवे मार्ग का विद्युतीकरण कार्य कराया गया। पहले खंड में गोंडा से लखनऊ व गोरखपुर का विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ। दूसरे खंड में गोंडा से बहराइच रेलमार्ग का विद्युतीकरण किया गया। इसके बाद तीसरे खंड के रूप में गोंडा के लूपलाइन स्थित बलरामपुर रेलमार्ग के गोंडा से सुभागपुर रेलखंड का विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया। अगले पांच महीने के अंदर सुभागपुर से शोहरतगढ़ करीब 120 किलोमीटर रेलखंड का विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद गोंडा रेलवे यार्ड से जुड़े सभी मार्गों पर ट्रेनों का संचालन इलेक्ट्रिक इंजन (लोको) से ही किया जाने लगेगा और 40 वर्ष से संचालित डीजल लोको गोंडा रेलवे यार्ड के इतिहास का एक हिस्सा बना नजर आएगा। (संवाद)
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समय की होगी बचत
गोंडा रेलवे यार्ड के सभी मार्गों पर इलेक्ट्रिक इंजन द्वारा ट्रेन चलने से रेलवे को तो फायदा होगा ही, साथ में आम यात्रियों को भी बहुत लाभ मिलेगा। इलेक्ट्रिक इंजन पूर्ण रूप से पर्यावरण के अनुकूल होंगे। डीजल इंजन को बदलकर इलेक्ट्रिक इंजन में करने के लिए आधा घंटा समय लगता है उसकी बचत होगी।

यात्रियों को फायदा तो रेलवे को मुनाफा
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह बताते हैं कि जल्द ही गोंडा एरिया के सभी मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने लगेगी। इससे आम यात्रियों को जहां ट्रेेन समय पर चलने का फायदा मिलेगा तो रेलवे की भी राजस्व आय बढ़ने से मुनाफा होगा। इलेक्ट्रिक इंजन के प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण को भी प्रभावी तरह से रोकने में मदद मिलेगी। सीपीआरओ ने कहा कि डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक लोको लगाने के दौरान करीब आधा घंटे का समय लगता है। इस समय की बचत से ट्रेनों का संचालन भी समय पर हो सकेगा।
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