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Gonda News: लेफ्टिनेंट तन्मय ने कर्नल पिता को दी सलामी
Sat, 07 Mar 2026 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 07 Mar 2026 11:21 PM IST
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पासिंग आउट परेड के बाद परिजनों के साथ लेफ्टिनेंट तन्मय। स्रोत: सोशल मीडिया
गोंडा। गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में शनिवार को पासिंग आउट परेड के दौरान जब तन्मय शुक्ला भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने और उन्होंने अपने पिता कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला को सलामी दी, तो पूरा परिवार गौरवान्वित हो गया। वहां मौजूद उनकी मां डॉ. सुजाता शुक्ला और बहन तन्वी ने भी जयहिंद बोलकर उत्साह बढ़ाया।
मनकापुर तहसील के महेवा नानकार में शुक्ला परिवार के लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला को भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट मिली है। खास बात यह है कि इसी रेजिमेंट की कमान उनके पिता कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला भी संभाल चुके हैं।
पिता कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला इस समय लद्दाख में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल पारिवारिक परंपरा निभाने की बात नहीं है, बल्कि राष्ट्र की सेवा के लिए एक उच्च आह्वान का उत्तर देना है। उन्हें गर्व है कि बेटे तन्मय ने इस चुनौतीपूर्ण मार्ग को स्वेच्छा से चुना। लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला का कहना है कि उनके दादा मानते थे कि युद्ध के मैदान में राष्ट्र सेवा और समाज के लिए सेवा, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यही सोच उनके परिवार की पहचान बन गई है।
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185 वर्ष से चली आ रही परंपरा
लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर 185 वर्षों से चली आ रही देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1841 में हवलदार करता राम शुक्ला से हुई थी। इसके बाद नायक हरि नारायण शुक्ला, फिर लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीनिवास शुक्ला सेना में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला सेना में सेवाएं दे रहे हैं।
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मनकापुर तहसील के महेवा नानकार में शुक्ला परिवार के लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला को भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट मिली है। खास बात यह है कि इसी रेजिमेंट की कमान उनके पिता कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला भी संभाल चुके हैं।
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पिता कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला इस समय लद्दाख में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल पारिवारिक परंपरा निभाने की बात नहीं है, बल्कि राष्ट्र की सेवा के लिए एक उच्च आह्वान का उत्तर देना है। उन्हें गर्व है कि बेटे तन्मय ने इस चुनौतीपूर्ण मार्ग को स्वेच्छा से चुना। लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला का कहना है कि उनके दादा मानते थे कि युद्ध के मैदान में राष्ट्र सेवा और समाज के लिए सेवा, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यही सोच उनके परिवार की पहचान बन गई है।
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185 वर्ष से चली आ रही परंपरा
लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर 185 वर्षों से चली आ रही देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1841 में हवलदार करता राम शुक्ला से हुई थी। इसके बाद नायक हरि नारायण शुक्ला, फिर लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीनिवास शुक्ला सेना में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला सेना में सेवाएं दे रहे हैं।