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वोट की जुगत में प्रवासियों के हाथ पांव पकड़ रहे प्रत्याशी, पड़ सकता भारी

Tue, 13 Apr 2021 10:37 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Apr 2021 10:37 PM IST
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Kovid protocol rate edge in manipulation of winning electoral battle
गोंडा। चुनावी जंग में जीत हासिल करने को प्रत्याशी कोई भी हथकंडा अपनाने स नहीं चूक रहे। इसके चलते ही पंचायत चुनाव में अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए करीब एक लाख प्रवासियों को दूसरे राज्यों से रेल टिकट भेजकर अथवा बसें बुक कर प्रत्याशियों ने जुटाया है।
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चुनावी बाजी जीतने को प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक के प्रत्याशी जिताऊ माने जाने वाले इन प्रवासी वोटरों के पैर पकड़ने से भी कोई गुरेज नहीं बरत रहे। कोरोना जांच के बिना ही संक्रमित राज्यों से आने वाले प्रवासी मतदाताओं के हाथ पांव पकड़ कर वोट मांगना प्रत्याशियों व समर्थकों को भारी भी पड़ सकता है।
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अकेले इटियाथोक, रूपईडीह, कटरा बाजार, करनैलगंज व मुजेहना विकास खंड से करीब 30 हजार ग्रामीण मतदाता दूसरे प्रदेशों से बुलाए गए हैं। प्रचार की इस व्यूह रचना में प्रत्याशियों का बार-बार हाथ-पैर पकड़ना लोगों पर कभी भी भारी पड़ सकता है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी के नियम का पालन भी नहीं हो पा रहा।
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पंचायत चुनाव की मतदान तिथि करीब आने के साथ ही तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के प्रकोप ने प्रत्याशियों से लेकर प्रशासन तक की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान यदि एक निर्वाचन क्षेत्र में अगर दस उम्मीदवार हैं तो संबंधित मतदाता के पास दस लोग पहुंचेंगे।
ये आठ उम्मीदवार निर्वाचन क्षेत्र के 100 अन्य लोगों के पास भी गए तो इस हिसाब से 1000 बार संपर्क होगा। इसमें से अगर एक भी व्यक्ति कोविड संक्रमित हुआ तो फिर संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे रणबांकुरों जीतने का कोई जुगत छोड़ना नहीं चाहते हैं। ऐसे में गांवों के वो मतदाता जो दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे हैं उन्हें प्रत्याशी अपने पक्ष में मतदान करने को खुद के खर्च पर गांव बुलाने में जुटे हैं। जानकारों की माने तो जिले में के करीब एक लाख मतदाता को दूसरे प्रदेशों से पंचायत चुनाव में भाग लेने को लाया जा रहा है।

चुनाव जीतने के जुनून में प्रत्याशी कोरोना संक्रमण का खतरा बिल्कुल नजरअंदाज कर रहे हैं। बैनर पोस्टर बनाने वाले प्रिंटिंग प्रेस पर प्रत्याशियों व समर्थकों का मेला लगा रहता है। ऐसे में प्रत्याशी न तो सामाजिक दूरी का ख्याल रख पाते हैं। न ही मास्क लगाना उचित समझते हैं। ऐसे में गांवों से लेकर शहरों तक पंचायत चुनावों के बाद कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ने की संभावना है।
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