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Gonda News: कुश्ती संघ की पिता बृजभूषण की कुर्सी पर काबिज हुए करन

Mon, 12 Feb 2024 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 12 Feb 2024 12:13 AM IST
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Karan took over the chair of wrestling association's father Brij Bhushan.
नवाबगंज/गोंडा। कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह 12 साल तक भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद पर रहने के बाद विवादों में घिर गए थे। महिला पहलवानों द्वारा उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद उन्हें अगले कार्यकाल के लिए अपने पैर पीछे खींचने पड़े थे। इन सबके बीच डब्ल्यूएफआई न सही लेकिन उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ की कमान उनके ही हाथ में रही।
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बृजभूषण का कार्यकाल पूरा होने के बाद यूपी रेसलिंग एसोसिएशन की वार्षिक साधारण सभा की बैठक में नई कमेटी की चुनावी प्रक्रिया पूरी की गई। उप्र कुश्ती संघ के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई कमेटी का चुनाव किया गया। अब उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ की बृजभूषण की कुर्सी पर उनके बेटे करनभूषण सिंह काबिज हो गए हैं।
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डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि खेल मंत्रालय की ओर से महासंघ के नए कार्यों और फैसलों पर रोक लगाई गई थी। प्रदेश में कार्यरत एसोसिएशन का कार्यकाल पूरा होने पर नई कमेटी में पदाधिकारियों के निर्वाचन की प्रक्रिया सामान्य है। पूर्व न्यायाधीश के अलावा ओलंपिक एसोसिएशन और डब्ल्यूएफआई के नामित वरिष्ठ सदस्यों की देखरेख में निष्पक्ष तरीके से चुनाव हुआ है।
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डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष पद पर करन की ताजपोशी करना चाहते थे बृजभूषण

महिला पहलवानों के आरोपों के पहले ही कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बेटे करन भूषण सिंह को डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष पद पर ताजपोशी करने का ताना-बाना बुन चुके थे। महासंघ के नियमों के अनुसार एक व्यक्ति सिर्फ तीन बार या अधिकतम 12 साल ही महासंघ का अध्यक्ष रह सकता है। इसी कारण वर्ष 2023 में उनका अधिकतम कार्यकाल पूरा होने पर बेटे को अपनी कुर्सी पर काबिज कराना चाह रहे थे। जिसके लिए उन्होंने अपने ही कार्यकाल में करनभूषण सिंह को डब्ल्यूएफआई का वरिष्ठ उपाध्यक्ष बना दिया था। लेकिन ऐन वक्त पर महिला पहलवानों ने आरोप लगाकर उनके मनसूबों पर पानी फेर दिया। यहां तक कि महिला पहलवानों ने बृजभूषण के परिवार के किसी सदस्य का नाम डब्ल्यूएफआई के मतदाता सूची में होने पर भी ऐतराज जताया था। जिसके चलते उनके बेटे करनभूषण सिंह और दामाद विशाल सिंह का नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था। बाद में विशाल सिंह को मतदान करने का अधिकार प्राप्त हुआ था।

महासंघ की कुर्सी के लिए एसोसिएशन की सदस्यता जरूरी

भारतीय कुश्ती महासंघ का अध्यक्ष बनने के लिए किसी राज्य के कुश्ती संघ का सदस्य या पदाधिकारी होना जरूरी होता है। इसीलिए बृजभूषण उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी थे। वर्तमान अध्यक्ष संजय सिंह भी यूपी कुश्ती संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं। अब करन को यूपी की कमान मिलने के बाद एक बार नए कयासों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, सांसद बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ की चुनावी प्रक्रिया में सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। रविवार की सुबह अपने समर्थकों संग पहले साधारण सभा की बैठक में शामिल होने पहुंचे पदाधिकारियों से मिले। सबकी खैर-ख्याह लेने के बाद उनका काफिला गोरखपुर के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल पड़ा।

... पर लग रहे सवालिया निशान

संजय सिंह बब्लू के डब्ल्यूएफआई का नया अध्यक्ष बनने के विरोध में पहलवानों से अपने मेडल लौटाते हुए कड़ा विरोध जताया था। दबदबा वाले बयान व अन्य अतिउत्साह वाले भाषण को संज्ञान में लेते हुए खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ के नई कमेटी को निलंबित कर दिया था। अब उनके अगुवाई में यूपी की नई कमेटी बनाए जाने पर सवालिया निशान लग रहे हैं। हालांकि संजय सिंह का दावा है कि वह निर्वाचित अध्यक्ष है। महासंघ का कार्य रुका हुआ है, लेकिन प्रदेश की कमेटी अपना निर्वाचन करने के लिए स्वतंत्र है।




समर्थकों ने जताई खुशी, किया स्वागत

करन के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। गोंडा सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सुमित भूषण सिंह, चेयरमैन डाॅ. सत्येन्द्र सिंह, पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह, अखंड प्रताप सिंह, रामकृपाल सिंह, डाॅ. बीएल सिंह, डाॅ. अजय मिश्र आदि ने खुशी जताई। नंदिनीनगर से लेकर विश्नोहरपुर तक उनका जगह जगह भव्य स्वागत किया गया। सोशल मीडिया पर भी बधाइयों का सिलसिला चला।
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