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परिवहन विभाग में नहीं कम हो रहा दलालों का दखल

Tue, 27 Oct 2020 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 10:24 PM IST
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Interference of brokers not decreasing in transport department
गोंडा के परिवहन कार्यालय के सामने दलालों का अड्डा। - फोटो : GONDA
गोंडा। परिवहन विभाग का नाम आये और बिचौलियों का जिक्र न हो तो ये काफी अजीब सा लगता है। विभाग के अफसरान बीते कुछ वर्षों से जरूर बिचौलियों के दखल को खत्म करने का दावा करते आये हैं, लेकिन सभी ने केवल अपना दामन ही बचाने का काम किया है, इससे अधिक और कुछ भी नहीं। कुछ दिन पूर्व डीएम डॉ. नितिन बंसल के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी की अगुवाई में अतिक्रमण हटाओ अभियान के बहाने दलालों को हटाने की असफल कोशिश भी की गई थी। ऐसा पहली बार नहीं है कि जब इन दलालों के खिलाफ कार्रवाई हुई हो। ऐसा बीते कुछ सालों में पहले से ही होता आ रहा है। लेकिन इस समय भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब एक बार फिर से दलालों का बाजार परिवहन विभाग के गेट के सामने देखा जा रहा है।
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बता दें कि मौजूदा समय में परिवहन विभाग पर शासन की बढ़ी निगरानी के चलते यहां के अफसरों और कर्मचारियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। ऐसे में जो पहले कार्यालय के अंदर बिचौलियों को बिठाकर कराया जाता था, वो अब बाहर से होता है। हालांकि इससे अपने दामन को बचाने के लिए विभागीय अफसर कई बार कोशिशें भी करते नजर आये हैं। कई बार तो इनमें से ही कुछ दबंग बिचौलिये आरटीओ दफ्तर में ही लोगों से और अन्य कर्मचारियों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इस बारे में एआरटीओ प्रशासन संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कार्यालय के सभी कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है कि कोई भी बिचौलियों का काम करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
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कार्रवाई में बड़े बिचौलियों को छोड़ दिया गया
कुछ दिन पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी की अगुवाई में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। जिसमें कई दलालों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आई थीं लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की गई और जितने भी बड़े बिचौलिये थे उनको छोड़ दिया गया और कुछ अन्य को धर लिया गया। बाद में सभी को कोतवाली से छोड़ दिया गया है। गेट के सामने जो अवैध निर्माण थे, उन्हें जेसीबी से हटवा दिया गया। ऐसा ही एक अभियान तत्कालीन एआरटीओ डॉ. सर्वेश गौतम के कार्यकाल में चला था।
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टेस्ट देना है तो 1 नहीं तो चाहिए 2 हजार
आरटीओ दफ्तर में सबसे अधिक मारामारी लाइसेंस सेक्शन में है। यहां पर हर चीज का रेट निर्धारित कर दिया गया है। लर्निंग लाइसेंस हो या फिर परमानेंट सभी का रेट तय है। सूत्रों की मानें तो शाम को फाइल की संख्या के मुताबिक हिसाब किया जाता है। बताया जा रहा है कि लर्निंग में 1 हजार से लेकर दो हजार तक और परमानेंट में दो हजार से लेकर 4 हजार तक का रेट निर्धारित है। बिचौलिये इसी रेट अफसरों की सख्ती का हवाला देकर वसूली करते हैं।
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