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जलाने के बजाए गोआश्रय केंद्र पर पराली भेज सकते किसान

Wed, 04 Nov 2020 10:05 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2020 10:05 PM IST
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Instead of lighting the farmers, they can send stubble to the Goashray center
गोंडा। उपनिदेशक कृषि डॉ. मुकुल तिवारी ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं। किसान पराली का सदुपयोग कर खाद बना सकते हैं। ऐसा न हो पाने पर वे नजदीकी गोआश्रय केंद्र पर उसे भेज दें जिससे उसे चारा के रूप में प्रयोग किया जा सके।
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उपनिदेशक तिवारी ने किसानों से अपील की है वे कि फसल अवशेष जलाए जाने से रोकने के संबंध में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के रोकथाम तथा पराली के यथा स्थान इनसीटू प्रबंधन विषयक आवश्यक दिशा-निर्देश एनजीटी द्वारा प्राप्त हुए हैं। वर्तमान समय में जनपद में धान के फसल की कटाई का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। जिन कृषकों द्वारा धान की मड़ाई थ्रेशर से की गई है अथवा की जा रही है, उनके द्वारा मड़ाई के उपरांत निकलने वाले अपशिष्टों का ढेर लगाया जा रहा है।
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ऐसी स्थिति में इस बात की आशंका है कि कुछ किसानों द्वारा इन अपशिष्टों को निस्तारित करने के लिए इन्हें जलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से दो एकड़ से कम क्षेत्रफल के लिए ढाई हजार रुपये प्रति घटना, दो एकड़ से अधिक तथा पांच एकड़ तक के क्षेत्रफल के लिए पांच हजार रुपये प्रति घटना एवं पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल के लिए 15 हजार रुपये प्रति घटना के हिसाब से अर्थदंड का प्राविधान किया गया है। तथा दोषी व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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उन्होंने इस संबंध में जनपद के किसान भाइयों को यह भी सुझाव दिया है कि फसल अपशिष्टों के निस्तारण के लिए उन्हें खेत में सड़ाकर खाद बनाया जा सकता है जिससे मृदा में जीवांश पदार्थ की मात्रा में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त किसान भाई अवशेष के रूप में प्राप्त भूसे अथवा पुवाल को नजदीकी गो-आश्रय केंद्र पर देने के लिए गो-आश्रय केंद्र प्रभारी, पंचायत सेक्रेटरी अथवा ग्राम प्रधान से संपर्क कर सकते हैं जिनके द्वारा पराली को गो-आश्रय केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
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