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ओपनिंग में ही क्लीन बोल्ड हुए एसपी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:14 PM IST
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पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए अभी कुछ दिन पहले तैनात किए गए एसपी अनिल कुमार सिंह को मतदान के दौरान हिंसा रोक पाने में फेल होने पर चुनाव आयोग ने हटा दिया है। वहीं, एसडीएम सदर, सीओ सिटी व कोतवाल देहात पर भी निलंबन की गाज गिरी है। निलंबित होने वाले अधिकारियों पर सूचना मिलने के बाद भी समय से मौके पर न पहुंचने की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। इसकी चर्चा जनपद में काफी समय से चल रही थी।
आईपीएस अनिल कुमार सिंह को बीती 21 सितंबर को शासन ने जिले का एसपी बनाकर यहां भेजा था। इसी के एक दिन बाद 23 सितंबर को गणेश प्रतिमा जुलूस के दौरान उतरौला रोड पर एक मस्जिद के पास बवाल हो गया। इसमें जमकर पथराव भी हुआ।
पथराव की खबर एकता चौक तक पहुंची तो वहां अराजकतत्वों ने कृष्णा मार्केट में छह दुकानें फूंक दीं। जुलूस पास कराने के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी, जो पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे, वे संख्या बल कम होने से तमाशबीन बने रहे।
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इसमें एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह भी मौके पर बहुत देर से पहुंचे थे। इसके तीन दिन बाद तक बवाल होता रहा, मगर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी इसे रोकने में नाकाम रहे।
उसी दौरान जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के लिए चुनाव होना था, इसमें भी कई जगह हिंसक घटनाएं हुईं, जिसे नहीं रोका जा सका।
चर्चा थी कि एसपी नए हैं, इसलिए जनपद की भौगोलिक व आपराधिक गतिविधियों की जानकारी नहीं हो पायी है। मगर तीन माह बाद जब प्रधान व सदस्य पदों के लिए चुनाव शुरू हुए तो पहले चरण में ही हलधरमऊ के हाता मतदान केंद्र पर जमकर बवाल हुआ। यहां तक कि सेक्टर मजिस्ट्रेट की गाड़ी भी तोड़ दी गई।
सोमवार को दूसरे चरण की पोलिंग पार्टियों की रवानगी के समय एसडीएम सदर ने जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज में पीठासीन अधिकारी को मारापीटा और अपने हमराहियों से पिटवाया। इसको लेकर पूरे दिन बवाल होता रहा।
इस मामले में एसडीएम के खिलाफ शिक्षक ने तहरीर दे दी। मंगलवार की ताजा घटना में कोतवाली देहात क्षेत्र के फिरोजपुर गांव के भरहापारा मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग को लेकर हुई फायरिंग में एक बुजुर्ग की मौत हो गई और उसका बेटा व बेटी घायल हो गए।
यहां पहले से ही दो पक्षों में माहौल गर्म था, मगर देहात पुलिस व सर्किल अधिकारी ने इसे हलके में लिया। नतीजतन मंगलवार को एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह, सीओ अखंड प्रताप सिंह व इंस्पेक्टर देहात फणींद्र सिंह यादव को आयोग ने निलंबित कर दिया और एसपी को तत्काल हटाने का आदेश जारी किया है।
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आईपीएस अनिल कुमार सिंह को बीती 21 सितंबर को शासन ने जिले का एसपी बनाकर यहां भेजा था। इसी के एक दिन बाद 23 सितंबर को गणेश प्रतिमा जुलूस के दौरान उतरौला रोड पर एक मस्जिद के पास बवाल हो गया। इसमें जमकर पथराव भी हुआ।
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पथराव की खबर एकता चौक तक पहुंची तो वहां अराजकतत्वों ने कृष्णा मार्केट में छह दुकानें फूंक दीं। जुलूस पास कराने के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी, जो पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे, वे संख्या बल कम होने से तमाशबीन बने रहे।
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इसमें एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह भी मौके पर बहुत देर से पहुंचे थे। इसके तीन दिन बाद तक बवाल होता रहा, मगर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी इसे रोकने में नाकाम रहे।
उसी दौरान जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के लिए चुनाव होना था, इसमें भी कई जगह हिंसक घटनाएं हुईं, जिसे नहीं रोका जा सका।
चर्चा थी कि एसपी नए हैं, इसलिए जनपद की भौगोलिक व आपराधिक गतिविधियों की जानकारी नहीं हो पायी है। मगर तीन माह बाद जब प्रधान व सदस्य पदों के लिए चुनाव शुरू हुए तो पहले चरण में ही हलधरमऊ के हाता मतदान केंद्र पर जमकर बवाल हुआ। यहां तक कि सेक्टर मजिस्ट्रेट की गाड़ी भी तोड़ दी गई।
सोमवार को दूसरे चरण की पोलिंग पार्टियों की रवानगी के समय एसडीएम सदर ने जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज में पीठासीन अधिकारी को मारापीटा और अपने हमराहियों से पिटवाया। इसको लेकर पूरे दिन बवाल होता रहा।
इस मामले में एसडीएम के खिलाफ शिक्षक ने तहरीर दे दी। मंगलवार की ताजा घटना में कोतवाली देहात क्षेत्र के फिरोजपुर गांव के भरहापारा मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग को लेकर हुई फायरिंग में एक बुजुर्ग की मौत हो गई और उसका बेटा व बेटी घायल हो गए।
यहां पहले से ही दो पक्षों में माहौल गर्म था, मगर देहात पुलिस व सर्किल अधिकारी ने इसे हलके में लिया। नतीजतन मंगलवार को एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह, सीओ अखंड प्रताप सिंह व इंस्पेक्टर देहात फणींद्र सिंह यादव को आयोग ने निलंबित कर दिया और एसपी को तत्काल हटाने का आदेश जारी किया है।