{"_id":"624f282028b81e0f5c660d43","slug":"hospital-unmannagment-gonda-news-lko6250789112","type":"story","status":"publish","title_hn":"टार्च की रोशनी में इलाज, जांच के लिए 88 सीढ़ियां चढ़ती गर्भवती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टार्च की रोशनी में इलाज, जांच के लिए 88 सीढ़ियां चढ़ती गर्भवती
विज्ञापन
फोटो-10ह्म्-गोंडा के जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में पर्चा देखतीं डॉ. ?
- फोटो : GONDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं दावे कागजी साबित हो रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता व ढिलाई के कारण जिला महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को आए दिन काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गुरुवार को अचानक गुल हुई बिजली के बाद जेनरेटर का संचालन भी ठप रहा। इस दौरान ओपीडी में डॉक्टर को टार्च की रोशनी में मरीज देखना पड़े। साथ ही प्रसव पूर्व होने वाली कोरोना व खून की जांच के लिए भी महिलाओं को चौथी मंजिल तक पहुंचने के लिए 88 सीढ़ियां चढ़ने की परेशानी उठानी पड़ी।
गुरुवार को महिला अस्पताल में लाइन में आयी फाल्ट के कारण करीब दो घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही। इस दौरान मरीजों को होने वाली परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने जेनरेटर चलवाना मुनासिब नहीं समझा। इसके चलते ही सुबह 11.30 बजे का समय होने के बाद भी अस्पताल के जांच व परीक्षण कक्षों में अंधेरा छाया दिखा। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर लंबी लाइन में खड़े मरीज पंखा न चलने से बार बार पसीना पोछते बदहाल दिखे। इस दौरान डॉ. सुषमा सिन्हा ओपीडी कक्ष में छाए अंधेरे के बावजूद में मोबाइल फोन के टार्च की रोशनी में मरीज का चिकित्सकीय परीक्षण करती मिली। डॉ. सुवर्णा कुमार व डॉ. माधुरी भी गर्मी की चिंता छोड़ अंधेरे कक्ष में मरीज देख रही थी।
बिजली गुल होने के कारण लिफ्ट भी बंद मिली, इससे प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल पहुंची महिलाओं को खून व कोविड की जांच करवाने के लिए 88 सीढ़ी चढ़कर चौथे मंजिल पर जाने की परेशानी भी उठानी पड़ी। इस दौरान कुछ गर्भवती को सीढ़ी चढ़ने में काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ा। इलाज को पहुंचे तीमारदार गुड्डू मंसूरी ने बताया कि करीब दो घंटे से अस्पताल में बिजली गुल होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर नहीं चलवाया। बिजली न होने से पीआईसीयू यूनिट में लगी मशीनों के संचालन में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
जुगाड़ सहारे व्हीलचेयर, भगवान भरोसे मरीज
अस्पताल में प्राइवेट पर भर्ती मरीज के तीमारदार तनु ने बताया कि 11 बजे ही उनके मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया है लेकिन व्हील चेयर न मिलने के कारण प्रसूता को नीचे ले जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ी। चौथी मंजिल पर बने वार्ड में मौजूद एकमात्र व्हील चेयर के दोनों हत्थे टूटे मिले, जिन्हें जुगाड़ के साथ पट्टी व रस्सी के सहारे बांधा गया था। ऐसे में इस पर बैठाकर मरीज को नीचे ले जाने पर यदि हत्ते पर लगी पट्टी खुल गयी तो मरीज के लिए आफत ही बनेगी।
शो-पीस बना था वॉटरकूलर
- विसेश्वरगंज से आए तीमारदार दिनेश कुमार चौथे मंजिल पर लगे वॉटरकूलर से पानी निकालने का प्रयास करते मिले। काफी प्रयास के बाद भी मशीन से एक बूंद भी पानी नहीं निकला। राजितराम ने बताया कि उनका मरीज पिछले तीन दिनों से भर्ती है। यहां पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां लगा वॉटरकूलर महज शो-पीस बना है। पानी के लिए सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं के लिए जनरेटर की व्यवस्था है। बिजली गुल हो जाने पर जनरेटर चलाया जाता है। गुरुवार को बत्ती चले जाने के बाद कुछ समय तक जनरेटर न चलने की शिकायत मिली है। इसके लिए जिम्मेदार कर्मियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि सिस्टम में कुछ तकनीकी फाल्ट आ गयी थी। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस
विज्ञापन
गुरुवार को महिला अस्पताल में लाइन में आयी फाल्ट के कारण करीब दो घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही। इस दौरान मरीजों को होने वाली परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने जेनरेटर चलवाना मुनासिब नहीं समझा। इसके चलते ही सुबह 11.30 बजे का समय होने के बाद भी अस्पताल के जांच व परीक्षण कक्षों में अंधेरा छाया दिखा। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर लंबी लाइन में खड़े मरीज पंखा न चलने से बार बार पसीना पोछते बदहाल दिखे। इस दौरान डॉ. सुषमा सिन्हा ओपीडी कक्ष में छाए अंधेरे के बावजूद में मोबाइल फोन के टार्च की रोशनी में मरीज का चिकित्सकीय परीक्षण करती मिली। डॉ. सुवर्णा कुमार व डॉ. माधुरी भी गर्मी की चिंता छोड़ अंधेरे कक्ष में मरीज देख रही थी।
विज्ञापन
बिजली गुल होने के कारण लिफ्ट भी बंद मिली, इससे प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल पहुंची महिलाओं को खून व कोविड की जांच करवाने के लिए 88 सीढ़ी चढ़कर चौथे मंजिल पर जाने की परेशानी भी उठानी पड़ी। इस दौरान कुछ गर्भवती को सीढ़ी चढ़ने में काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ा। इलाज को पहुंचे तीमारदार गुड्डू मंसूरी ने बताया कि करीब दो घंटे से अस्पताल में बिजली गुल होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर नहीं चलवाया। बिजली न होने से पीआईसीयू यूनिट में लगी मशीनों के संचालन में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
जुगाड़ सहारे व्हीलचेयर, भगवान भरोसे मरीज
अस्पताल में प्राइवेट पर भर्ती मरीज के तीमारदार तनु ने बताया कि 11 बजे ही उनके मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया है लेकिन व्हील चेयर न मिलने के कारण प्रसूता को नीचे ले जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ी। चौथी मंजिल पर बने वार्ड में मौजूद एकमात्र व्हील चेयर के दोनों हत्थे टूटे मिले, जिन्हें जुगाड़ के साथ पट्टी व रस्सी के सहारे बांधा गया था। ऐसे में इस पर बैठाकर मरीज को नीचे ले जाने पर यदि हत्ते पर लगी पट्टी खुल गयी तो मरीज के लिए आफत ही बनेगी।
शो-पीस बना था वॉटरकूलर
- विसेश्वरगंज से आए तीमारदार दिनेश कुमार चौथे मंजिल पर लगे वॉटरकूलर से पानी निकालने का प्रयास करते मिले। काफी प्रयास के बाद भी मशीन से एक बूंद भी पानी नहीं निकला। राजितराम ने बताया कि उनका मरीज पिछले तीन दिनों से भर्ती है। यहां पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां लगा वॉटरकूलर महज शो-पीस बना है। पानी के लिए सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं के लिए जनरेटर की व्यवस्था है। बिजली गुल हो जाने पर जनरेटर चलाया जाता है। गुरुवार को बत्ती चले जाने के बाद कुछ समय तक जनरेटर न चलने की शिकायत मिली है। इसके लिए जिम्मेदार कर्मियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि सिस्टम में कुछ तकनीकी फाल्ट आ गयी थी। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस