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डॉक्टरों की मनमानी बढ़ा रही गर्भवतियों का दर्द
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फोटो-12 गोंडा में महिला अस्पताल के ओपीडी में खाली पड़ी डॉक्टरों की कुुर्सी। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गईं हैं। डॉक्टर दोपहर बाद ओपीडी में नहीं मिलते, जिससे दूरदराज से आने वाली महिलाओं को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है। डॉक्टरों की मनमानी से सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। शनिवार अपराह्न 12.50 बजे ही महिला अस्पताल की चारों ओपीडी में डॉक्टरों की कुर्सी खाली हो गईं। ओपीडी के बाहर 53 किलोमीटर दूर से आईं रेहाना सहित 20 से अधिक महिलाएं फर्श पर बैठी डॉक्टर का इंतजार करती रहीं।
महिला अस्पताल में हर रोज करीब छह सौ महिलाएं इलाज कराने आती हैं। शासन के निर्देशानुसार सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में मरीजों का इलाज करना होता है। मगर यहां डॉक्टरों के न तो आने का समय निर्धारित है और न ही ओपीडी छोड़ने का। शनिवार अपराह्न 12.50 बजे ही अस्पताल की चारों ओपीडी से डॉक्टर चली गईं। 20 से अधिक महिलाएं ओपीडी के बाहर जमीन पर बैठी डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थीं।
छपिया से आईं रेहाना अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टराें की खाली कुर्सियां देखकर मायूस हो गईं। ओपीडी के बाहर बैठे स्वास्थ्य कर्मी से डॉक्टर के आने के बारे में जानकारी लेनी चाही तो बताया गया कि मैडम आएंगी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। रेहाना ने बताया कि मुख्यालय से उनका घर 53 किलोमीटर दूर है, सवारी मिलने में देरी होने से वह अस्पताल देर से पहुंच सकीं। एक बजे के पहले पहुंचने पर भी कोई डॉक्टर न मिलने से रेहाना को निराश लौटना पड़ा। वहीं, जमीन पर बैठी डॉक्टर का इंतजार कर रहीं रुक्मिणी भी मायूस दिखीं। उन्होंने बताया कि वह गर्भवती है, छठा महीना चल रहा है। डॉक्टर को दिखाना है मगर वह ओपीडी में मिली ही नहीं। अब कल फिर से आना पड़ेगा। (संवाद)
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11 बजे के बाद नहीं होती जांच
जिला महिला अस्पताल में जांच कराने का समय 11 बजे तक ही निर्धारित है, जबकि साढ़े नौ बजे से पहले अधिकांश ओपीडी शुरू ही नहीं होती। 11 बजे के बाद ओपीडी में दिखाने वाले को खून, पेशाब व अन्य जांच के लिए दूसरे दिन आने का समय दे दिया जाता है। जिससे मजबूरी में बाहर से ही जांच करानी पड़ती है। शनिवार को राजरानी खून की जांच के लिए सैंपल कलेक्शन कक्ष में गईं तो स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि जांच के लिए कल 11 बजे के अंदर आ जाना। वहीं, कई अन्य महिलाओं ने खून की जांच बाहर से कराई।
हमने कुछ समय पहले राउंड लेकर ओपीडी व वार्डों का निरीक्षण किया है, तब सभी डॉक्टर मौजूद थे। हो सकता है मेरे जाने के बाद उठ गए हों। अभी फिर से राउंड करूंगी, ओपीडी में नहीं मिलने पर संबंधित डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी जाएगी। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल
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महिला अस्पताल में हर रोज करीब छह सौ महिलाएं इलाज कराने आती हैं। शासन के निर्देशानुसार सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में मरीजों का इलाज करना होता है। मगर यहां डॉक्टरों के न तो आने का समय निर्धारित है और न ही ओपीडी छोड़ने का। शनिवार अपराह्न 12.50 बजे ही अस्पताल की चारों ओपीडी से डॉक्टर चली गईं। 20 से अधिक महिलाएं ओपीडी के बाहर जमीन पर बैठी डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थीं।
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छपिया से आईं रेहाना अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टराें की खाली कुर्सियां देखकर मायूस हो गईं। ओपीडी के बाहर बैठे स्वास्थ्य कर्मी से डॉक्टर के आने के बारे में जानकारी लेनी चाही तो बताया गया कि मैडम आएंगी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। रेहाना ने बताया कि मुख्यालय से उनका घर 53 किलोमीटर दूर है, सवारी मिलने में देरी होने से वह अस्पताल देर से पहुंच सकीं। एक बजे के पहले पहुंचने पर भी कोई डॉक्टर न मिलने से रेहाना को निराश लौटना पड़ा। वहीं, जमीन पर बैठी डॉक्टर का इंतजार कर रहीं रुक्मिणी भी मायूस दिखीं। उन्होंने बताया कि वह गर्भवती है, छठा महीना चल रहा है। डॉक्टर को दिखाना है मगर वह ओपीडी में मिली ही नहीं। अब कल फिर से आना पड़ेगा। (संवाद)
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11 बजे के बाद नहीं होती जांच
जिला महिला अस्पताल में जांच कराने का समय 11 बजे तक ही निर्धारित है, जबकि साढ़े नौ बजे से पहले अधिकांश ओपीडी शुरू ही नहीं होती। 11 बजे के बाद ओपीडी में दिखाने वाले को खून, पेशाब व अन्य जांच के लिए दूसरे दिन आने का समय दे दिया जाता है। जिससे मजबूरी में बाहर से ही जांच करानी पड़ती है। शनिवार को राजरानी खून की जांच के लिए सैंपल कलेक्शन कक्ष में गईं तो स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि जांच के लिए कल 11 बजे के अंदर आ जाना। वहीं, कई अन्य महिलाओं ने खून की जांच बाहर से कराई।
हमने कुछ समय पहले राउंड लेकर ओपीडी व वार्डों का निरीक्षण किया है, तब सभी डॉक्टर मौजूद थे। हो सकता है मेरे जाने के बाद उठ गए हों। अभी फिर से राउंड करूंगी, ओपीडी में नहीं मिलने पर संबंधित डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी जाएगी। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल