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डायलिसिस के इंतजार में मरीज तोड़ चुके दम

Wed, 31 Aug 2022 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2022 12:12 AM IST
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फोटो-10 गोंडा के जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस यूनिट में डायलिसिस कराता मरीज। -संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस यूनिट किडनी के मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। मगर हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर मरीजों को महीनों तक इंतजार में करना पड़ रहा है। हेपेटाइटिस-सी के आठ मरीज डायलिसिस के लिए प्रतीक्षारत थे, जिसमें दो ने इंतजार में दम तोड़ दिया। कतार लंबी होने से प्रतीक्षारत मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
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जिले में हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी पॉजिटिव) के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इन मरीजाें कोे नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। जिला अस्पताल स्थित पीपीपी मॉडल से बने डायलिसिस यूनिट में 10 मशीनें स्थापित हैं, जिनमें से नौ मशीनें किडनी के सामान्य मरीजों के लिए तथा एक मशीन हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी पॉजिटिव) मरीजों के लिए है। वर्तमान में हेपेटाइटिस-सी के 12 मरीज पंजीकृत हैं, जिनमें से छह की नियमित डायलिसिस की जाती है, जबकि छह लोग पिछले फरवरी से इंतजार कर रहे हैं।
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करनैलगंज के एक व्यक्ति, जानकीनगर की एक महिला, माधवपुर की एक महिला, बलरामपुर का एक व्यक्ति तथा मनकापुर क्षेत्र के दो व्यक्ति पिछले सात माह से डायलिसिस करवाने के लिए प्रतीक्षारत हैं। ये मरीज निजी अस्पतालों में महंगे दामों में डायलिसिस करवा रहे हैं। इधर, डायलिसिस के इंतजार में धानेपुर की एक महिला और मनकापुर के एक व्यक्ति की हाल ही मौत हो गई।
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मशीन बढ़ाने की मांग
डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक सौरभ शर्मा ने बताया कि मरीजों को हर दूसरे दिन डायलिसिस की जरूरत पड़ती है, एक दिन में अधिकतम तीन मरीजों का डायलिसिस किया जा सकता है। एक मशीन से सिर्फ छह मरीजों का ही नियमित डायलिसिस हो सकता है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए एक और मशीन स्थापित किए जाने की मांग की गई है। प्रमुख अधीक्षक ने स्वास्थ्य निदेशक तथा हेरिटेज हॉस्पिटल के सीईओ को पत्र लिखकर यूनिट में एक मशीन बढ़ाए जाने की मांग की है।

डायलिसिस की जरूरत
जिला अस्पताल के डॉ. कुलदीप पांडेय ने बताया कि शरीर में किडनी का काम खून से यूरिया व क्रिएटिनिन को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालना है। किडनी खराब होने पर मरीज के शरीर में यूरिया व क्रिएटिनिन बढ़ने लगता है। दोनों का स्तर पांच से अधिक होने पर मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। इसमें कृत्रिम गुर्दे से खून छानकर दोनों तत्वों को निकाला जाता है। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट मेें अब तक 384 लोगों का पंजीकरण कर सुविधा दी जा रही है।
किस माह में कितनी बार हुआ डायलिसिस
माह डायलिसिस
मई- 501 बार
जून- 487 बार
जुलाई- 502 बार
अगस्त- 522 बार
कुल डायलिसिस- 17,148 बार
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