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10 हजार हैंडपंप खराब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:48 PM IST
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हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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अप्रैल महीने के पहले सप्ताह में ही गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है लेकिन पेयजल की व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले अफसर अभी मौसम के इस गर्म मिजाज से अंजान बने हुए हैं। जिले की ग्रामीण आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाले करीब 10 हजार हैंडपंप खराब हैं या दूषित पानी दे रहे हैं। लोगों की शिकायतों के बाद भी इन हैंडपंपों की मरम्मत नहीं करायी जा रही है।
सी तरह गांवों में पेयजल के संकट को दूर करने के लिए तालाबों का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन इन तालाबों में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं करायी गयी, जिससे लाखों रुपये की लागत से बनवाये गए यह तालाब सूखे पडे़ हैं। गर्मी शुरू होते ही वाटर लेवल नीचे पहुंच गया है जिससे खेतों की सिंचाई के लिए लगाये गए नलकूप भी दगा देने लगे हैं।
ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ साथ लोगों को आने वाले दिनों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान समय में जिले में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब 52 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। इसके साथ करीब 12 हजार तालाब व सिंचाई के लिए 6 सौ नलकूप लगाये गए हैं।
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धानेपुर में सूखा तालाब
धानेपुर कस्बे में भइया हरिभान दत्त इंटर कॉलेज के ठीक सामने बना तालाब सूखा पड़ा है। करीब एक दशक पहले गर्मी के दिनों में भी यह तालाब पानी से भरा रहता था लेकिन वर्तमान समय में वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण इसमें पानी नहीं रह गया है। ग्राम पंचायत के तरफ से भी इसमें पानी भराने की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे यह तालाब सूखा पड़ा है।
बीएसए दफ्तर का ही हैंडपंप खराब
शहर के पंतनगर स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में लगा हैंडपंप दो वर्षों से खराब है। हैंडपंप की खराबी से यहां काम करने वाले कर्मचारियों व शिक्षकों को पानी के लिए कार्यालय छोड़कर सौ मीटर दूर जाना पड़ता है। इसके मरम्मत के लिए कर्मचारियों ने कई बार शिकायत की लेकिन मरम्मत नहीं हुई।
10 हजार हैंडपंपों को रिबोर का इंतजार
खराब हैंडपंपों की मरम्मत का जिम्मा अब ग्राम पंचायतों के पास है, जबकि इन हैंडपंपों के रीबोर होने की दशा में विधायक से प्रस्ताव कराना होता है। बिना विधायक के प्रस्ताव के हैंडपंप रीबोर नहीं कराया जा सकता है। ऐसे में जिले के 10 हजार हैंडपंपों को रीबोर के लिए विधायक के प्रस्ताव इंतजार है।
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सी तरह गांवों में पेयजल के संकट को दूर करने के लिए तालाबों का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन इन तालाबों में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं करायी गयी, जिससे लाखों रुपये की लागत से बनवाये गए यह तालाब सूखे पडे़ हैं। गर्मी शुरू होते ही वाटर लेवल नीचे पहुंच गया है जिससे खेतों की सिंचाई के लिए लगाये गए नलकूप भी दगा देने लगे हैं।
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ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ साथ लोगों को आने वाले दिनों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान समय में जिले में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब 52 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। इसके साथ करीब 12 हजार तालाब व सिंचाई के लिए 6 सौ नलकूप लगाये गए हैं।
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धानेपुर में सूखा तालाब
धानेपुर कस्बे में भइया हरिभान दत्त इंटर कॉलेज के ठीक सामने बना तालाब सूखा पड़ा है। करीब एक दशक पहले गर्मी के दिनों में भी यह तालाब पानी से भरा रहता था लेकिन वर्तमान समय में वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण इसमें पानी नहीं रह गया है। ग्राम पंचायत के तरफ से भी इसमें पानी भराने की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे यह तालाब सूखा पड़ा है।
बीएसए दफ्तर का ही हैंडपंप खराब
शहर के पंतनगर स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में लगा हैंडपंप दो वर्षों से खराब है। हैंडपंप की खराबी से यहां काम करने वाले कर्मचारियों व शिक्षकों को पानी के लिए कार्यालय छोड़कर सौ मीटर दूर जाना पड़ता है। इसके मरम्मत के लिए कर्मचारियों ने कई बार शिकायत की लेकिन मरम्मत नहीं हुई।
10 हजार हैंडपंपों को रिबोर का इंतजार
खराब हैंडपंपों की मरम्मत का जिम्मा अब ग्राम पंचायतों के पास है, जबकि इन हैंडपंपों के रीबोर होने की दशा में विधायक से प्रस्ताव कराना होता है। बिना विधायक के प्रस्ताव के हैंडपंप रीबोर नहीं कराया जा सकता है। ऐसे में जिले के 10 हजार हैंडपंपों को रीबोर के लिए विधायक के प्रस्ताव इंतजार है।