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Gonda News: सहफसली और औषधीय खेती से उगा रहे समृद्धि की फसल
Mon, 22 Dec 2025 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 22 Dec 2025 11:16 PM IST
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वजीरगंज के मझरा में हरी मिर्च की खेत में किसान सुरेश कुमार। -स्रोत: किसान
गोंडा। कभी धान, गेहूं व गन्ने तक सिमटी खेती आज नवाचार, तकनीक और बाजार की समझ से मुनाफे का बड़ा जरिया बन गई है। जिले के कुछ किसानों ने परंपरागत खेती से हटकर नई राह चुनी और आज मुनाफे में बड़े कारोबारियों को भी टक्कर दे रहे हैं। मंगलवार को राष्ट्रीय किसान दिवस के उपलक्ष्य में प्रस्तुत है ऐसे ही कुछ मेहनतकश किसानों की सफलता की कहानी।
सहफसली खेती से हर साल 30 लाख का मुनाफा
रुपईडीह विकासखंड के चयन कुंवर निवासी किसान अनिल पांडेय नवाचार की मिसाल बन चुके हैं। अनिल पांडेय 10 एकड़ अपनी और 35 एकड़ किराये की जमीन लेकर कुल 45 एकड़ में सहफसली खेती कर रहे हैं। इस बार उन्होंने 18 एकड़ गन्ने की फसल में आलू, सरसों व चने की बोआई की है। नौ एकड़ में आलू–गन्ना, सात एकड़ में सरसों-गन्ना तथा 1.5 एकड़ में चना-गन्ना की बोआई की है। एक साथ दो फसलों की बोआई से लागत कम और आमदनी दोगुनी हो रही है। अनिल पांडेय ने बताया कि सहफसली खेती से हर साल करीब 30 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करके किसान भी मोटा मुनाफा कमा सकते हैं।
औषधीय खेती से आत्मनिर्भर बने शिवकुमार
वजीरगंज के रायपुर निवासी शिवकुमार मौर्य ने परंपरागत खेती छोड़कर तुलसी व एलोवेरा सहित अन्य औषधीय पौधों की खेती शुरू की। चार एकड़ की उनकी खेती आज आमदनी का बेहतर जरिया बन चुकी है। शिवकुमार खुद तुलसी की पत्तियों को ड्रायर से सुखाकर पैकिंग करते हैं और सीधे बाजार में बेचते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई और मुनाफा बढ़ गया। वह एक साल में आठ से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
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सब्जी की खेती से छह माह में 2.5 लाख कमाई
वजीरगंज के मझरा निवासी सुरेश कुमार ने धान, गेहूं व गन्ने की परंपरागत खेती छोड़कर मिर्च, मूली व धनिया जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। महज एक एकड़ में सब्जी उगाकर वह खुद मंडी में बेचने जाते हैं, जिससे उन्हें सही दाम मिल जाता है। छह माह में ही करीब 2.5 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं।
नई सोच बदल रही किसानों की किस्मत
अगर परंपरागत सोच से बाहर निकलकर आधुनिक तकनीक, सहफसली व बाजारोन्मुख खेती की जाए तो किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं। किसान दिवस पर ऐसे नवाचारी किसान अन्य के लिए प्रेरणा हैं। सरकार की ओर से ऐसे किसानों का पूरा सहयोग किया जाता है।
प्रेमकुमार ठाकुर, उपनिदेशक कृषि
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सहफसली खेती से हर साल 30 लाख का मुनाफा
रुपईडीह विकासखंड के चयन कुंवर निवासी किसान अनिल पांडेय नवाचार की मिसाल बन चुके हैं। अनिल पांडेय 10 एकड़ अपनी और 35 एकड़ किराये की जमीन लेकर कुल 45 एकड़ में सहफसली खेती कर रहे हैं। इस बार उन्होंने 18 एकड़ गन्ने की फसल में आलू, सरसों व चने की बोआई की है। नौ एकड़ में आलू–गन्ना, सात एकड़ में सरसों-गन्ना तथा 1.5 एकड़ में चना-गन्ना की बोआई की है। एक साथ दो फसलों की बोआई से लागत कम और आमदनी दोगुनी हो रही है। अनिल पांडेय ने बताया कि सहफसली खेती से हर साल करीब 30 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करके किसान भी मोटा मुनाफा कमा सकते हैं।
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औषधीय खेती से आत्मनिर्भर बने शिवकुमार
वजीरगंज के रायपुर निवासी शिवकुमार मौर्य ने परंपरागत खेती छोड़कर तुलसी व एलोवेरा सहित अन्य औषधीय पौधों की खेती शुरू की। चार एकड़ की उनकी खेती आज आमदनी का बेहतर जरिया बन चुकी है। शिवकुमार खुद तुलसी की पत्तियों को ड्रायर से सुखाकर पैकिंग करते हैं और सीधे बाजार में बेचते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई और मुनाफा बढ़ गया। वह एक साल में आठ से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
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सब्जी की खेती से छह माह में 2.5 लाख कमाई
वजीरगंज के मझरा निवासी सुरेश कुमार ने धान, गेहूं व गन्ने की परंपरागत खेती छोड़कर मिर्च, मूली व धनिया जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। महज एक एकड़ में सब्जी उगाकर वह खुद मंडी में बेचने जाते हैं, जिससे उन्हें सही दाम मिल जाता है। छह माह में ही करीब 2.5 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं।
नई सोच बदल रही किसानों की किस्मत
अगर परंपरागत सोच से बाहर निकलकर आधुनिक तकनीक, सहफसली व बाजारोन्मुख खेती की जाए तो किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं। किसान दिवस पर ऐसे नवाचारी किसान अन्य के लिए प्रेरणा हैं। सरकार की ओर से ऐसे किसानों का पूरा सहयोग किया जाता है।
प्रेमकुमार ठाकुर, उपनिदेशक कृषि