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49 मदरसों का अनुदान बंद, मान्यता बरकरार
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गोंडा। जिले में वर्ष 2016 से 2019 तक हुई जांच में मनमाने ढंग से संचालित पाए गए 49 मदरसों के अनुदान पर रोक लग चुकी है। मगर मान्यता बरकरार होने के चलते इन मदरसों का संचालन जारी है। इसके पीछे तर्क ये है कि आधुनिकीकरण योजना के तहत ये मदरसे मानक पर खरे नहीं पाए गए मगर मान्यता के निर्धारित मानक पूरे कर रहे हैं।
वहीं, वर्ष 2016 से ही नए मदरसों की मान्यता पर रोक भी है। इसके चलते छह वर्ष में जिले में बिना मान्यता के संचालित मदरसों की संख्या काफी बढ़ गई है। अब शासन के निर्देश पर मदरसों की जांच शुरू हो रही है। इसके लिए सोमवार को कमेटी का गठन किया गया है। ये कमेटी नियमों को दरकिनार करके संचालित हो रहे मदरसों की कुंडली तैयार करके शासन को भेजेगी।
जिले में 546 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मदरसों का संचालन हो रहा है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो छह मदरसे ऐसे हैं जो पूरी तरह सरकारी अनुदान पाते हैं। यहां के शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह ही वेतन व भत्ते मिलते हैं। जिले के 338 मदरसों को वर्ष 2016 तक आधुनिकीकरण योजना से अनुदान दिया जाता रहा है। मगर वर्ष 2016 से 2019 तक हुई जांच में 49 मदरसों के अनुदान पर रोक लगा दी गई। हालांकि इन मदरसों की मान्यता बरकरार है।
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दरअसल इन मदरसों की जांच में अनुदान के मानकों की अनदेखी का मामला ही उजागर हुआ था। शिक्षकों के चयन में भी गोलमाल की बात सामने आई थी। कई मदरसों में अनियमित ढंग से शिक्षकों का चयन किए जाने की पुष्टि हुई। इसके अलावा इन मदरसों के संचालन में भी समयबद्धता और निरंतरता नहीं रही। सिर्फ अनुदान हासिल करने के लिए कागजी खानापूर्ति करके भी कई मदरसे संचालित होते मिले। इसी रिपोर्ट के बाद आधुनिकीकरण योजना से 49 मदरसों को बाहर कर दिया गया। हालांकि मान्यता के मानक पूरे होने से मान्यता निरस्त नहीं की गई।
मौजूदा समय में आधुनिकीकरण योजना में 289 मदरसे ही शामिल हैं। यहां के शिक्षकों को मानदेय के लिए शासन से अनुदान मिलता है। आधुनिकीकरण में शामिल मदरसों के साथ ही मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच बीते छह साल से हो रही है। अभी तक ये जांच पूरी नहीं हो सकी है। उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनी कमेटी अभी भी जांच कर रही है।
अब शासन ने ऐसे मदरसों की जांच के आदेश दिए हैं जो बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन मदरसों का विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो साल 2016 से मदरसों की मान्यता बंद है। इससे संचालित मदरसों की तरफ से कोई आवेदन नहीं किया गया। अब एक-एक मदरसे का सर्वे करके मान्यता की स्थिति के साथ ही व्यवस्थाओं की पड़ताल की जाएगी। विभाग ने मदरसा संचालकों से सर्वे टीम को सहयोग की अपील की है।
सर्वे के लिए गठित टीम में संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी, बीएसए व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल होंगे। ये टीम अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के निर्देशन में सर्वे कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मदरसों का सर्वे 15 अक्तूबर को पूरा होगा। इसके बाद 25 अक्तूबर तक शासन को रिपोर्ट दी जाएगी। टीम मदरसे का नाम, संचालन करने वाली संस्था का नाम, स्थापना वर्ष, मदरसे की अवस्थिति का संपूर्ण विवरण, मदरसे में छात्र-छात्राओं के लिए आवश्यक बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं की सूचनाएं इकट्ठा करेगी। इसके साथ ही वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की संख्या, मदरसों में लागू पाठ्यक्रम, मदरसे की आय का स्रोत, मदरसों के छात्र किसी अन्य विद्यालय में नामांकित हैं या नहीं, इसका विवरण भी जुटाएगी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गौरव स्वर्णकार ने बताया कि गैर मान्यता के संचालित मदरसों का सर्वे करके चिह्नित किया जाएगा। इसके साथ ही संचालित मदरसों के बारे में पूरी जानकारी की जाएगी। इसके लिए टीम बना दी गई है।
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वहीं, वर्ष 2016 से ही नए मदरसों की मान्यता पर रोक भी है। इसके चलते छह वर्ष में जिले में बिना मान्यता के संचालित मदरसों की संख्या काफी बढ़ गई है। अब शासन के निर्देश पर मदरसों की जांच शुरू हो रही है। इसके लिए सोमवार को कमेटी का गठन किया गया है। ये कमेटी नियमों को दरकिनार करके संचालित हो रहे मदरसों की कुंडली तैयार करके शासन को भेजेगी।
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जिले में 546 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मदरसों का संचालन हो रहा है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो छह मदरसे ऐसे हैं जो पूरी तरह सरकारी अनुदान पाते हैं। यहां के शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह ही वेतन व भत्ते मिलते हैं। जिले के 338 मदरसों को वर्ष 2016 तक आधुनिकीकरण योजना से अनुदान दिया जाता रहा है। मगर वर्ष 2016 से 2019 तक हुई जांच में 49 मदरसों के अनुदान पर रोक लगा दी गई। हालांकि इन मदरसों की मान्यता बरकरार है।
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दरअसल इन मदरसों की जांच में अनुदान के मानकों की अनदेखी का मामला ही उजागर हुआ था। शिक्षकों के चयन में भी गोलमाल की बात सामने आई थी। कई मदरसों में अनियमित ढंग से शिक्षकों का चयन किए जाने की पुष्टि हुई। इसके अलावा इन मदरसों के संचालन में भी समयबद्धता और निरंतरता नहीं रही। सिर्फ अनुदान हासिल करने के लिए कागजी खानापूर्ति करके भी कई मदरसे संचालित होते मिले। इसी रिपोर्ट के बाद आधुनिकीकरण योजना से 49 मदरसों को बाहर कर दिया गया। हालांकि मान्यता के मानक पूरे होने से मान्यता निरस्त नहीं की गई।
मौजूदा समय में आधुनिकीकरण योजना में 289 मदरसे ही शामिल हैं। यहां के शिक्षकों को मानदेय के लिए शासन से अनुदान मिलता है। आधुनिकीकरण में शामिल मदरसों के साथ ही मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच बीते छह साल से हो रही है। अभी तक ये जांच पूरी नहीं हो सकी है। उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनी कमेटी अभी भी जांच कर रही है।
अब शासन ने ऐसे मदरसों की जांच के आदेश दिए हैं जो बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन मदरसों का विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो साल 2016 से मदरसों की मान्यता बंद है। इससे संचालित मदरसों की तरफ से कोई आवेदन नहीं किया गया। अब एक-एक मदरसे का सर्वे करके मान्यता की स्थिति के साथ ही व्यवस्थाओं की पड़ताल की जाएगी। विभाग ने मदरसा संचालकों से सर्वे टीम को सहयोग की अपील की है।
सर्वे के लिए गठित टीम में संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी, बीएसए व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल होंगे। ये टीम अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के निर्देशन में सर्वे कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मदरसों का सर्वे 15 अक्तूबर को पूरा होगा। इसके बाद 25 अक्तूबर तक शासन को रिपोर्ट दी जाएगी। टीम मदरसे का नाम, संचालन करने वाली संस्था का नाम, स्थापना वर्ष, मदरसे की अवस्थिति का संपूर्ण विवरण, मदरसे में छात्र-छात्राओं के लिए आवश्यक बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं की सूचनाएं इकट्ठा करेगी। इसके साथ ही वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की संख्या, मदरसों में लागू पाठ्यक्रम, मदरसे की आय का स्रोत, मदरसों के छात्र किसी अन्य विद्यालय में नामांकित हैं या नहीं, इसका विवरण भी जुटाएगी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गौरव स्वर्णकार ने बताया कि गैर मान्यता के संचालित मदरसों का सर्वे करके चिह्नित किया जाएगा। इसके साथ ही संचालित मदरसों के बारे में पूरी जानकारी की जाएगी। इसके लिए टीम बना दी गई है।