फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Gram Panchayat not have sources of income

ग्राम पंचायतों के पास नहीं आय के साधन

Mon, 20 Jul 2015 11:38 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 20 Jul 2015 11:38 PM IST
विज्ञापन
हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों के पास अपना कुछ भी नहीं हैं। स्व सरकार  चलाने वाली इन ग्राम पंचायतों के पास अपना आय का कोई साधन नहीं है। हर वर्ष ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त एवं 13वें वित्त सहित अन्य योजनाओं से करोड़ों रुपये मिलते हैं कि वे गांवों का विकास कराएं और पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए आय का साधन तैयार करें, लेकिन यहां एक भी ऐसी ग्राम पंचायत नहीं है, जिसके पास आय के साधन हों।
विज्ञापन


जिले में 1054 ग्राम पंचायतें हैं। हर वर्ष राज्य वित्त एवं 13वें वित्त से करीब 50-55 करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों के विकास के लिए दिए जाते हैं। राज्य एवं 13वें वित्त की राशि को ग्राम पंचायत के किसी भी विकास मद में खर्च किया जा सकता है, जबकि मनरेगा के धन के लिए मानक तय है।
विज्ञापन


राज्य वित्त एवं 13वें वित्त से गांवों में रोजगार का सृजन किया जा सकता है। इसमें हाट बाजार का निर्माण कराया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे साधन विकसित किए जा सकते हैं, जिससे विकास के साथ आय के साधन भी तैयार हों। इस आय की राशि से गांवों का विकास किया जा सकता है। ऐसा राज्य वित्त एवं 13वें वित्त की गाइड लाइन में भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आय के लिए कराए जा सकते हैं ये कार्य
- गांव में सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य।
- ग्रामीण बाजार का निर्माण।
- मेलों का आयोजन।
- शिक्षा की व्यवस्था।
- शासकीय भूमि पर पौधरोपण।
- पशुओं का व्यापार।
- तीर्थ स्थान है तो उस पर कर लगाया जा सकता है।


केंद्र सरकार ने 14वें वित्त को लागू करने के लिए ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट मांगी है। इसमें ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट में यह भी मांगा जा चुका है कि गांव में आय के क्या साधन तैयार हुए और उनका प्रयोग कहां-कहां किया गया है। इन साधनों से कितनी आय ग्राम पंचायतों को हो रही है और कितने लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।



ग्राम पंचायतों में आय के क्या साधन हैं, इसकी सूची बनवाई जा रही है। कितनी ग्राम पंचायतें हैं, जो सशक्त हो चुकी हैं। जहां हाट का निर्माण हुआ है, दुकानें बनी हैं, वहां कितनी आय होती है। इसकी भी सूची मांगी गई है। - जयंत कुमार दीक्षित, सीडीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed