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Gonda News: कांगो में छपिया के कामगार की मौत
Mon, 02 Sep 2024 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 02 Sep 2024 12:16 AM IST
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देवी प्रसाद। स्रोत: परिजन
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गोंडा। अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सेफ्री कोड कंपनी में काम करने वाले छपिया इलाके के देवी प्रसाद (50) की बीते 26 अगस्त को मौत हो गई। कंपनी से एक कर्मचारी ने परिजनों को फोन करके सूचना दी। परिजनों ने शव भेजने को कहा मगर कंपनी ने मना कर दिया। यही नहीं देवी प्रसाद ने उक्त कंपनी में 40 लाख रुपये एकत्र किए थे। मगर कंपनी रकम देने से भी हाथ खड़े कर रही है। पीड़ित परिजनों ने विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह से गुहार लगाई है।
छपिया थाना क्षेत्र के बभनीखास निवासी संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि उनके पिता देवी प्रसाद (50) जो वर्तमान में बस्ती जनपद के छावनी अमोढ़ा गांव में घर बनाए हैं। वह वहीं से वर्ष 2022 में नौकरी के लिए मुंबई गए थे, जहां की श्रीजी कंसलटेंसी कंपनी में काम करने लगे थे। वहां से कुछ दिनों बाद ही वह दो वर्ष के वीजा पर दक्षिण अफ्रीका के कांगो में नौकरी करने चले गए। बीते 24 अगस्त को वहीं पर उनकी मौत की सूचना मिली, जिसके बाद से शव वापसी के लिए प्रयास किया जा रहा है। कंपनी शव भेजने को तैयार नहीं है। यही नहीं उनके पिता ने वहां काम करके जो रकम कमाई, वह भी कंपनी में ही जमा है।
कंपनी के ही एक कर्मचारी ने बताया कि देवी प्रसाद के करीब 40 लाख रुपये जमा हैं। संतोष ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों से बात की थी। कंपनी के लोग 16 लाख रुपये ही देने की बात कह रहे हैं। शव भेजने से इन्कार कर रहे हैं। परिजनों ने विदेश राज्यमंत्री से शव मंगाने के साथ ही कंपनी से बकाया भुगतान भी कराने की मांग की है।
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दक्षिण अफ्रीका में कामगार की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। मौत की खबर से देवी प्रसाद की पत्नी कामिनी सदमे में हैं। बेटे संतोष का भी बुरा हाल है। परिजनों के साथ ही गांव में शोक की लहर है। शव नहीं आ पाने से परिवार को लोग परेशान हैं। परिजन व गांव के लोग देवी प्रसाद के अंतिम दर्शन की चाह में विदेश राज्यमंत्री से आस लगाए हैं।
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छपिया थाना क्षेत्र के बभनीखास निवासी संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि उनके पिता देवी प्रसाद (50) जो वर्तमान में बस्ती जनपद के छावनी अमोढ़ा गांव में घर बनाए हैं। वह वहीं से वर्ष 2022 में नौकरी के लिए मुंबई गए थे, जहां की श्रीजी कंसलटेंसी कंपनी में काम करने लगे थे। वहां से कुछ दिनों बाद ही वह दो वर्ष के वीजा पर दक्षिण अफ्रीका के कांगो में नौकरी करने चले गए। बीते 24 अगस्त को वहीं पर उनकी मौत की सूचना मिली, जिसके बाद से शव वापसी के लिए प्रयास किया जा रहा है। कंपनी शव भेजने को तैयार नहीं है। यही नहीं उनके पिता ने वहां काम करके जो रकम कमाई, वह भी कंपनी में ही जमा है।
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कंपनी के ही एक कर्मचारी ने बताया कि देवी प्रसाद के करीब 40 लाख रुपये जमा हैं। संतोष ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों से बात की थी। कंपनी के लोग 16 लाख रुपये ही देने की बात कह रहे हैं। शव भेजने से इन्कार कर रहे हैं। परिजनों ने विदेश राज्यमंत्री से शव मंगाने के साथ ही कंपनी से बकाया भुगतान भी कराने की मांग की है।
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दक्षिण अफ्रीका में कामगार की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। मौत की खबर से देवी प्रसाद की पत्नी कामिनी सदमे में हैं। बेटे संतोष का भी बुरा हाल है। परिजनों के साथ ही गांव में शोक की लहर है। शव नहीं आ पाने से परिवार को लोग परेशान हैं। परिजन व गांव के लोग देवी प्रसाद के अंतिम दर्शन की चाह में विदेश राज्यमंत्री से आस लगाए हैं।