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Gonda News: सिर्फ नौवें महीने में हो रहा गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड
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गोंडा में महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में चस्पा नोटिस। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। पांच महीने बाद जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शुरू होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं को राहत नहीं मिलती दिखाई दे रही है। गर्भावस्था के आठवें महीने तक उन्हें बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सिर्फ नौवां महीना वाली गर्भवती का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल में जून माह से ही अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा है। जून माह में महिला अस्पताल में तैनात रेडियालॉजिस्ट डॉ. एके राय के गैर जनपद स्थानांतरण से अल्ट्रासाउंड बंद हो गया था। वहीं, महिला अस्पताल में लगभग साढ़े पांच हजार गर्भवती महिलाएं नियमित इलाज व जांच कराने आती है, जिनका अल्ट्रासाउंड न होने से बाहर से कराना पड़ रहा था।
पिछले सप्ताह डीएम के आदेश पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या चौबे व डॉ. मीनाक्षी मिश्रा को अल्ट्रासाउंड के लिए नामित किया गया। मगर जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह की ओर से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर निर्देश दिया गया कि सिर्फ उन्हीं गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड होगा, जिनके गर्भावस्था का नौवां महीना चल रहा है। इन शर्तों के चलते बड़ी संख्या में गर्भवती अल्ट्रासाउंड से वंचित रह गईं। उन्हें पहले की तरह बाहर से अल्ट्रासाउंड की जांच करवानी पड़ रही है।
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सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह का तर्क है कि उन्हीं महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिनका उसी माह अस्पताल में प्रसव कराना होता।
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जिला महिला अस्पताल में जून माह से ही अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा है। जून माह में महिला अस्पताल में तैनात रेडियालॉजिस्ट डॉ. एके राय के गैर जनपद स्थानांतरण से अल्ट्रासाउंड बंद हो गया था। वहीं, महिला अस्पताल में लगभग साढ़े पांच हजार गर्भवती महिलाएं नियमित इलाज व जांच कराने आती है, जिनका अल्ट्रासाउंड न होने से बाहर से कराना पड़ रहा था।
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पिछले सप्ताह डीएम के आदेश पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या चौबे व डॉ. मीनाक्षी मिश्रा को अल्ट्रासाउंड के लिए नामित किया गया। मगर जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह की ओर से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर निर्देश दिया गया कि सिर्फ उन्हीं गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड होगा, जिनके गर्भावस्था का नौवां महीना चल रहा है। इन शर्तों के चलते बड़ी संख्या में गर्भवती अल्ट्रासाउंड से वंचित रह गईं। उन्हें पहले की तरह बाहर से अल्ट्रासाउंड की जांच करवानी पड़ रही है।
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सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह का तर्क है कि उन्हीं महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिनका उसी माह अस्पताल में प्रसव कराना होता।