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बजट खर्च में कंजूसी पर सीएमओ से स्पष्टीकरण तलब, आयुक्त ने मांगा जवाब
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फोटो-10 गोंडा में अमर उजाला अखबार में प्रकाशित खबर। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट मिलने के बावजूद स्वास्थ्य योजनाओं के लिए न खर्च करने के मामले में आयुक्त ने अपर निदेशक व सीएमओ से जवाब मांगा है। एनएचएम के 28 करोड़ बजट दिए जाने के बावजूद 12 से अधिक स्वास्थ्य योजनाओं के शिथिल पड़ने व स्वास्थ्यकर्मियों को मानदेय न दिए जाने पर आयुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने सीएमओ से स्पष्टीकरण तलब करते हुए लापरवाह अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई कर सूचित करने को कहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से संचालित दर्जन भर से अधिक स्वास्थ्य योजनाएं शिथिल पड़ गई हैं। महिला अस्पताल में सर्जरी के लिए जरूरी सामानों का टोटा हैैैै। मिशन से जुड़े करीब 12 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को पांच महीने से मानदेय नहीं दिया गया है। सितंबर के पहले सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग के पास 28 करोड़ रुपये डंप पड़ा था। प्रदेश रैंकिंग में सबसे कम बजट खर्च करने वाले जिलों की सूची में गोंडा का चौथा स्थान रहा। विभागीय लापरवाही को लेकर अमर उजाला में 20 सितंबर के अंक में ‘28 करोड़ मिलने के बाद भी बजट खर्च करने में कंजूसी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई।
खबर को संज्ञान में लेते मंडलायुक्त डॉ. एमपी अग्रवाल ने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. अनिल मिश्र तथा सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा से स्पष्टीकरण तलब करते हुए जवाब मांगा। आयुक्त ने पूछा कि एनएचएम की ओर से 28 करोड़ धनराशि प्राप्त होने के बावजूद भी नियमानुसार धन का व्यय क्यों नहीं किया गया। जिससे दर्जनों स्वास्थ्य योजनाएं शिथिल पड़ने के साथ हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को मानदेय नहीं मिल पाया। अपर निदेशक अनिल मिश्र ने सीएमओ को स्पष्टीकरण पत्र जारी कर धनराशि खर्च न करने का कारण पूछा। अपर निदेशक ने कर्मचारियों के मानदेय की स्थित व विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के भुगतान की स्थित की जानकारी ली।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से संचालित दर्जन भर से अधिक स्वास्थ्य योजनाएं शिथिल पड़ गई हैं। महिला अस्पताल में सर्जरी के लिए जरूरी सामानों का टोटा हैैैै। मिशन से जुड़े करीब 12 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को पांच महीने से मानदेय नहीं दिया गया है। सितंबर के पहले सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग के पास 28 करोड़ रुपये डंप पड़ा था। प्रदेश रैंकिंग में सबसे कम बजट खर्च करने वाले जिलों की सूची में गोंडा का चौथा स्थान रहा। विभागीय लापरवाही को लेकर अमर उजाला में 20 सितंबर के अंक में ‘28 करोड़ मिलने के बाद भी बजट खर्च करने में कंजूसी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई।
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खबर को संज्ञान में लेते मंडलायुक्त डॉ. एमपी अग्रवाल ने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. अनिल मिश्र तथा सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा से स्पष्टीकरण तलब करते हुए जवाब मांगा। आयुक्त ने पूछा कि एनएचएम की ओर से 28 करोड़ धनराशि प्राप्त होने के बावजूद भी नियमानुसार धन का व्यय क्यों नहीं किया गया। जिससे दर्जनों स्वास्थ्य योजनाएं शिथिल पड़ने के साथ हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को मानदेय नहीं मिल पाया। अपर निदेशक अनिल मिश्र ने सीएमओ को स्पष्टीकरण पत्र जारी कर धनराशि खर्च न करने का कारण पूछा। अपर निदेशक ने कर्मचारियों के मानदेय की स्थित व विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के भुगतान की स्थित की जानकारी ली।
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