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सवा दो लाख गोल्डन कार्ड धारक, एक भी कोरोना मरीज को इलाज नहीं

Sat, 19 Jun 2021 09:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 09:45 PM IST
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Golden card holders did not get treatment for corona
गोंडा। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कोरोना महामारी के दौरान संक्रमितों के इलाज में सहारा नहीं बन सकी। जिले में सवा दो लाख लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाकर पांच लाख तक निशुल्क इलाज दिए जाने का भरोसा जरूर दिलाया गया लेकिन आपदा के समय में गोल्डन कार्ड महज शोपीस बनकर रह गये।
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जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान सात हजार से अधिक लोगों को संक्रमण का दंश झेलना पड़ा। जिसमें से करीब तीन हजार को अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराना पड़ा।
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कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए चयनित कुछ अस्पतालों में मरीजों को लाखों का खर्च भी करना पड़ा लेकिन इस दौरान किसी भी मरीज को आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इलाज की कोई सुविधा नहीं मिल सकी।
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इसके चलते जिले के किसी भी अस्पताल में एक भी संक्रमित का आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं हुआ। चार महीने के संक्रमण काल के दौरान किसी एक भी अस्पताल ने एक भी मरीज का आयुष्मान भारत के तहत बने गोल्डन कार्ड से इलाज नहीं हुआ।
मरीजों का कहना है कि इस कार्ड को दिखाने के बाद भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया जबकि अस्पताल प्रबंधन दावा कर रहा है कि ऐसा कोई मरीज इलाज को आया ही नहीं। जिम्मेदार अफसर कह रहे हैं कि इसे लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत करेगा तो जांच कर कार्रवाई होगी।
जयप्रभाग्राम स्थित गिरधारीलाल ने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी, निमोनिया के लक्षण लग रहे थे। वह दुखहरणनाथ मंदिर के पास स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने गया वहां काउंटर पर गोल्डन कार्ड से इलाज कराने की बात कही तो बताया गया कारोना के लक्षण दिख रहे हैं। गोल्डन कार्ड से इसका इलाज नहीं हो रहा है। काउंटर से उन्हें वापस कर दिया गया।
महादेवा न्याय पंचायत निवासी अजय पांडेय ने बताया कि उनके पास गोल्डन कार्ड था। उनके पापा की तबियत खराब होने पर दुखहरण नाथ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जो आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए चयनित है। कोराना संक्रमण के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लेकिन योजना का लाभ नहीं मिल पाया। नगद पैसे जमा करने पड़े।

श्याम स्वरुप ने बताया कि उनके भाई का कोरोना पॉजिटिव आने पर शहर के एक निजी अस्पाताल में ले जाया गया। गोल्डन कार्ड से इलाज करने की बात सुनते ही अस्पताल कर्मियों ने बेड खाली न होने की बात कहकर वापस कर दिया।
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