१.३३ करोड़ रुपये हड़प रहीं गैस एजेंसियां
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होम डिलीवरी का पैसा लेने के बावजूद गैस वितरण एजेंसियां अपनी सुविधा के मुताबिक वितरण प्वाइंट बनाकर उपभोक्ताओं को गैस के लिए यहां दौड़ा रही हैं। धूप में घंटों लाइन लगाने के बाद उन्हें गैस मिल पाती है।
शहर में छह बड़ी गैस एजेंसियां के 69 हजार 304 कार्डधारक रसोई गैस उपभोक्ता हैं। शहर की गैस एजेंसियों के लिए नियम है कि वे शहर के गैस उपभोक्ताओं को गैस की उसके घर पर होम डिलीवरी करेंगी।
जिलाधिकारी की ओर से एजेंसियों को वाहन व ठेला बनवा कर गैस आपूर्ति करने के निर्देश दिये गये थे। जिलाधिकारी की कड़ाई पर गैस एजेंसियों ने कुछ दिन होम डिलीवरी करने के बाद इसे धीरे-धीरे बंद कर दिया। अब मात्र 10 फीसदी उपभोक्ताओं को ही गैस की होम डिलीवरी मिल पा रही है।
गैस एजेन्सियों को होम डिलीवरी का 16 रुपये अतिरिक्त मिलता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसियां यदि नियमानुसार गैस का वितरण करें तो उन्हें एक उपभोक्ता से 49.50 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलेगा। इसके बावजूद एजेंसियां मनमानी कर रही हैं।
गैस एजेंसी वालों ने अपनी सुविधा के मुताबिक गैस वितरण का स्थान बना रखा है। उपभोक्ताओं को वहां गैस आने तक इंतजार करने को कहा जाता है। लाइन लगाने के बाद होम डिलीवरी वाले चार्ज में गैस बांटा जा रहा है।
एक उपभोक्ता से 600 से 650 रुपये वसूल किये जा रहे हैं। उपभोक्ता मजबूरी में अधिक पैसे देकर गैस लेने को मजबूर है, जबकि गैस एजेंसियां उपभोक्ता सुविधाओं के लिए होम डिलीवरी का करीब 11.8 लाख रुपये हर माह हजम कर रही हैं।
सालाना 1.33 करोड़ रुपये का होम डिलीवरी चार्ज को बिना काम के खा जाने का खेल हो रहा है। मजे की बात तो यह है कि पिछले कई साल से यह खेल चल रहा है, लेकिन न कोई जनप्रतिनिधि बोलता है और न ही किसी अधिकारी ने इस ओर ध्यान दिया है। बहराइच रोड पर मंगलम गैस एजेंसी के वितरण प्वांइट पर गैस लेने आये रमेश कुमार ने बताया पैसा पूरा लेते हैं, लेकिन कभी घर पर गैस नहीं भेजी।
आईटीआई मैदान में गैस आने का पता करने आये सुरेश कुमार ने बताया कोको गैस एजेंसी पर गैस के लिए फोन करने पर बताया जाता है कि आईटीआई मैदान में गैस आने का इंतजार करो, जबकि यहीं पर शहीद सत्यवान एजेंसी के उपभोक्ता लाइन लगाते हैं। इस बाबत डीएसओ विमल कुमार शुक्ला का कहना है कि गैस वितरकों पर कार्रवाई पेट्रोलियम कंपनियों को करना है। एजेंसियां हमारे अंडर में नहीं हैं।
इस समय लगन का सीजन चल रहा है ऐसे में गैस की मांग बढ़ी है। मिठाई बनाने की सभी छोटी बड़ी दुकानों से लेकर शादी घरों पर कालाबाजारी में घरेलू गैस सिलेंडर खपाए जा रहे हैं। दुकानों में दो से चार व शादी घरों में 10 गैस सिलेंडरों की मांग है।
गैस की आपूर्ति करने वाले एक एजेंसी के एक कर्मचारी का कहना था कि सस्ता होने की वजह से दुकानदार घरेलू सिलेंडर की ही मांग कर रहे हैं। कुछ आवंटित गैस सिलेंडरों को वह तो सिर्फ दिखाने के लिए ले जा रहे हैं।
वहीं गैस सिलेंडरों की आपूर्ति के काम में लगे एक व्यक्ति का कहना था कि अधिकारी से लेकर कारोबारी की मिलीभगत है। कारोबारी गैस एजेन्सी व अधिकारियों से साठगांठ कर कामर्शियल गैस लेने के बजाए सब्सिडी वाला गैस उठा ले जाते हैं। गैस एजेंसी के लोग उपभोक्ताओं के हिस्से की गैस को साल के आखिरी वक्त में मैनेज करते हैं।
एसडीएम सदर गोंडा अविनाश कुमार का कहना है कि गैस एजेंसियों की मनमानी की शिकायतें आ रही हैं। इस बाबत जल्द ही डीएसओ के साथ बैठक कर होने वाली गड़बड़ी के जरूरी बिन्दुओं को चिन्ह्ति किया जाएगा। इसके बाद गड़बड़ी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट
शहर की गैस एजेंसियां और उसके कन्ज्यूमर
मंगलम गैस प्रतिष्ठान गोंडा - 19,800
शहीद सत्यवान भारत गैस सेवा गोंडा - 16,229
साहू भारत गैस गोंडा - 2,229
सहकारी गैस सर्विस बड़गांव गोंडा- 6,765
शिवम भारत गैस सर्विस - 11,000
इनसेट
फैक्ट फाइल
* जिले में कुल गैस एजेंसियां - 33
* जिले में कुल कार्डधारक उपभोक्ता - 1.30 लाख
* जिले में कुल कामर्शियल गैस उपभोक्ता - 15 हजार
* उपभोक्ता को एक साल में मिलेंगे सिलेण्डर- 12
* रसोई गैस की वास्तविक कीमत - 561 रुपये
* रसोई गैस का बाजार मूल्य - 600 से 650 रु पये
* उपभोक्ता के खाते में आने वाली सब्सिडी- 133 रुपये
इनसेट
गैस वितरण कराने की इन पर है जिम्मेदारी
* पेट्रोलियम कम्पनी के अधिकारियों * गैस एजेन्सी संचालकों * जिला पूर्ति अधिकारी * क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक * नगर मजिस्ट्रेट * तहसीलवार * उप जिलाधिकारी।