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नहीं पूरी हुई मांग तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने किया आमरण अनशन
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करनैलगंज (गोंडा)। मंडल के इकलौते जीवित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम अचल आचार्य की ओर से मांगों को लेकर एसडीएम को दी गई आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी को एसडीएम ने खारिज कर दिया। जब वो सोमवार को आमरण अनशन पर बैठे तो अधिकारियों ने उन्हें उनके घर तक जाने का रास्ता खुलवाने का देने का आश्वासन देकर किसी तरह मनाकर आमरण अनशन तुड़वा दिया।
पांच दिन पूर्व तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम पतिसा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम अचल आचार्य ने एसडीएम को एक नोटिस देकर कहा था कि उनके द्वारा जिस भूमि का बैनामा लिया गया था उस पर दूसरे लोगों का कब्जा है। उनके घर तक आने-जाने का रास्ता गांव के लोगों द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया है। जिससे छुब्ध होकर उन्होंने सोमवार से आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी थी।
सोमवार को पंडित राम अचल आचार्य करनैलगंज तहसील पहुंच कर अनशन पर बैठने चले तो प्रशासन ने उन्हें तहसील में अनशन पर नहीं बैठने दिया। बाद में वे नगर के मोहल्ला गाड़ी बाजार स्थित एक मंदिर परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गए। उस मंदिर में वह पुजारी हैं। आमरण अनशन पर बैठने के बाद प्रशासन सकते में आया।
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एसडीएम ज्ञान चंद्र गुप्ता ने सेनानी द्वारा दी गई नोटिस को धारा 144 लागू होने एवं आमरण अनशन या अन्य किसी प्रकार का प्रदर्शन धरना न होने का हवाला देते हुए नोटिस को खारिज कर दिया और उनकी भूमि को विवादित एवं न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के नाते उन्हें न्यायालय पर विश्वास रखने की बात कहते हुए अनशन न करने का अनुरोध किया था। उसके बावजूद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सोमवार की सुबह मंदिर के सामने परिसर में बैनर लगाकर अनशन पर बैठ गए।
सूचना मिलने के बाद उपजिलाधिकारी ज्ञान चंद गुप्ता, कोतवाल राजनाथ सिंह, चौकी प्रभारी रणजीत यादव एवं अधिवक्ता त्रिलोकी नाथ तिवारी मौके पर पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। उनके अनशन को अनुचित बताते हुए एसडीएम ने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। इसके साथ साथ उनके घर तक आने-जाने का रास्ता जो विवादित था उसे खाली करवाने के लिए राजस्व की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर भेजा।
आश्वासन के बाद सेनानी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। उपजिलाधिकारी ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि जिस भूमि का विवाद सेनानी आचार्य द्वारा बताया गया उस भूमि का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। मगर जिस रास्ते से उनके घर का रास्ता है उस पर कुछ लोगों ने कांटा रखकर अवरुद्ध कर दिया था। उसे खाली करवाने के लिए मौके पर राजस्व एवं पुलिस की टीम भेजी गई है। रास्ते को खाली करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेनानी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है और उनके अनशन की नोटिस को भी खारिज कर दिया गया है।
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पांच दिन पूर्व तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम पतिसा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम अचल आचार्य ने एसडीएम को एक नोटिस देकर कहा था कि उनके द्वारा जिस भूमि का बैनामा लिया गया था उस पर दूसरे लोगों का कब्जा है। उनके घर तक आने-जाने का रास्ता गांव के लोगों द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया है। जिससे छुब्ध होकर उन्होंने सोमवार से आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी थी।
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सोमवार को पंडित राम अचल आचार्य करनैलगंज तहसील पहुंच कर अनशन पर बैठने चले तो प्रशासन ने उन्हें तहसील में अनशन पर नहीं बैठने दिया। बाद में वे नगर के मोहल्ला गाड़ी बाजार स्थित एक मंदिर परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गए। उस मंदिर में वह पुजारी हैं। आमरण अनशन पर बैठने के बाद प्रशासन सकते में आया।
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एसडीएम ज्ञान चंद्र गुप्ता ने सेनानी द्वारा दी गई नोटिस को धारा 144 लागू होने एवं आमरण अनशन या अन्य किसी प्रकार का प्रदर्शन धरना न होने का हवाला देते हुए नोटिस को खारिज कर दिया और उनकी भूमि को विवादित एवं न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के नाते उन्हें न्यायालय पर विश्वास रखने की बात कहते हुए अनशन न करने का अनुरोध किया था। उसके बावजूद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सोमवार की सुबह मंदिर के सामने परिसर में बैनर लगाकर अनशन पर बैठ गए।
सूचना मिलने के बाद उपजिलाधिकारी ज्ञान चंद गुप्ता, कोतवाल राजनाथ सिंह, चौकी प्रभारी रणजीत यादव एवं अधिवक्ता त्रिलोकी नाथ तिवारी मौके पर पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। उनके अनशन को अनुचित बताते हुए एसडीएम ने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। इसके साथ साथ उनके घर तक आने-जाने का रास्ता जो विवादित था उसे खाली करवाने के लिए राजस्व की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर भेजा।
आश्वासन के बाद सेनानी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। उपजिलाधिकारी ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि जिस भूमि का विवाद सेनानी आचार्य द्वारा बताया गया उस भूमि का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। मगर जिस रास्ते से उनके घर का रास्ता है उस पर कुछ लोगों ने कांटा रखकर अवरुद्ध कर दिया था। उसे खाली करवाने के लिए मौके पर राजस्व एवं पुलिस की टीम भेजी गई है। रास्ते को खाली करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेनानी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है और उनके अनशन की नोटिस को भी खारिज कर दिया गया है।