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Gonda News: कागजों में तालाब निर्माण दिखाकर हड़पे 16 लाख, वसूली की संस्तुति
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गोंडा। मनकापुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत गुनौरा में अमृत सरोवर योजना में घपले का खुलासा हुआ है। बिना काम कराए ही ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने कागजों में ही तालाब का निर्माण दिखा दिया। यही नहीं उसकी खोदाई व सुंदरीकरण कराने के नाम पर फर्जी वर्क आईडी तैयार कर 16.17 लाख रुपये हड़प लिए गए। मनरेगा लोकपाल नंद कुमार त्रिपाठी की जांच में इसका खुलासा हुआ है। उन्होंने ग्राम विकास आयुक्त को जांच रिपोर्ट भेजकर गबन की गई धनराशि की वूसली करने के साथ ही एफआईआर की संस्तुति की है।
बृहस्पतिवार को मनरेगा लोकपाल नंद कुमार तिवारी ने गुनौरा पहुंचकर कराए गए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया तो भ्रष्टाचार का बड़ा खेल सामने आया। गांव में भीटा तालाब की खोदाई के नाम पर वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 में 6.41 लाख रुपये निकाल लिए गए। जांच के दौरान गांव में तालाब नहीं मिला। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक ने मिलीभगत कर कागजों पर तालाब बनाकर मनरेगा से फर्जी वर्क आईडी जारी कराकर धनराशि हड़प ली।
इसी गांव में कोल्हुआ तालाब के जीर्णोद्धार के नाम पर 3.80 लाख का भुगतान लिया गया, जबकि मौके पर काम आधा अधूरा मिला। वहां सीआईबी बोर्ड लगा नहीं पाया गया। नरेन्द्रपुर तालाब के जीर्णोद्धार पर स्वीकृत लागत के सापेक्ष 3.16 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया। लेकिन जांच में तालाब सामान्य अवस्था मिला। यहां वर्क आईडी बदलकर खर्च की गई धनराशि गबन कर ली गई। इसी तरह बेलवा तालाब के बंधा निर्माण कराने के नाम पर स्वीकृत लागत के सापेक्ष 4.68 लाख का भुगतान ले लिया गया, जबकि मौके पर कार्य का होना नहीं पाया गया।
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मनरेगा लोकपाल नंदकुमार तिवारी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन ग्राम प्रधान रघु नायक दूबे, ग्राम पंचायत सचिव शिव कुमार पटेल, तत्कालीन तकनीकी सहायक रंगनाथ त्रिपाठी व ग्राम रोजगार सेवक राज बहादुर वर्मा ने आपस में कूटरचना करके फर्जी व जाली अभिलेख तैयार करके मनरेगा प्राधिकारियों की मिलीभगत से 16.18 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।
मनरेगा के कार्य में बड़े स्तर पर घपला उजागर हुआ है। जिसमें कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है। नंद कुमार त्रिपाठी, लोकपाल मनरेगा
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बृहस्पतिवार को मनरेगा लोकपाल नंद कुमार तिवारी ने गुनौरा पहुंचकर कराए गए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया तो भ्रष्टाचार का बड़ा खेल सामने आया। गांव में भीटा तालाब की खोदाई के नाम पर वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 में 6.41 लाख रुपये निकाल लिए गए। जांच के दौरान गांव में तालाब नहीं मिला। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक ने मिलीभगत कर कागजों पर तालाब बनाकर मनरेगा से फर्जी वर्क आईडी जारी कराकर धनराशि हड़प ली।
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इसी गांव में कोल्हुआ तालाब के जीर्णोद्धार के नाम पर 3.80 लाख का भुगतान लिया गया, जबकि मौके पर काम आधा अधूरा मिला। वहां सीआईबी बोर्ड लगा नहीं पाया गया। नरेन्द्रपुर तालाब के जीर्णोद्धार पर स्वीकृत लागत के सापेक्ष 3.16 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया। लेकिन जांच में तालाब सामान्य अवस्था मिला। यहां वर्क आईडी बदलकर खर्च की गई धनराशि गबन कर ली गई। इसी तरह बेलवा तालाब के बंधा निर्माण कराने के नाम पर स्वीकृत लागत के सापेक्ष 4.68 लाख का भुगतान ले लिया गया, जबकि मौके पर कार्य का होना नहीं पाया गया।
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मनरेगा लोकपाल नंदकुमार तिवारी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन ग्राम प्रधान रघु नायक दूबे, ग्राम पंचायत सचिव शिव कुमार पटेल, तत्कालीन तकनीकी सहायक रंगनाथ त्रिपाठी व ग्राम रोजगार सेवक राज बहादुर वर्मा ने आपस में कूटरचना करके फर्जी व जाली अभिलेख तैयार करके मनरेगा प्राधिकारियों की मिलीभगत से 16.18 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।
मनरेगा के कार्य में बड़े स्तर पर घपला उजागर हुआ है। जिसमें कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है। नंद कुमार त्रिपाठी, लोकपाल मनरेगा