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चार हजार रसोइयों को नही मिला पूरा मानदेय

Mon, 15 Nov 2021 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 11:09 PM IST
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Four thousand cooks did not get full honorarium
गोंडा। स्कूलों में समानता का पाठ पढ़ाने वाला बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भेदभाव किये जाने का मामला सामने आया है। बच्चों को दोपहर में भोजन बनाने वाली रसोइयों के मानदेय देने में विभाग ने भेदभाव का रेकॉर्ड बनाया है।
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अनुसूचित वर्ग की रसोइयों को तो पूरे पांच माह का मानदेय दे दिया, लेकिन पिछड़े और सामान्य वर्ग की रसोइयों को सिर्फ ढाई माह का मानदेय दिया है। इससे पिछड़े व सामान्य वर्ग की रसोइयों को झटका लगा है, उनका कहना है कि यह कैसा नियम है। दीपावली पर मानदेय भी दे दिया तो दोहरा मापदंड अपनाया है।
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जिले में 8600 के करीब रसोइयां परिषदीय स्कूलों में काम कर रही हैं। बीते पांच माह से मानदेय नहीं दिया गया था, वह तब जब पूरे समय ड्यूटी रसोइया करती हैं। उन्हें 1500 रूपये महीने का अल्प मानदेय ही दिया जाता है। इसके बाद भी पांच- पांच माह तक मानदेय न देेकर विभाग सौतेला व्यवहार करता रहा है।
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इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी को दीपावली से पहले ही एक नवंबर तक मानदेय देने का फरमान सुनाया। इसके बाद मानदेय तो दिए गए, लेकिन विभाग यहां भेदभाव करने से नहीं चूका।
अनूसूचित वर्ग की रसोइयों को तो पांचों महीने का मानदेय दे दिया, लेकिन सामान्य और पिछड़े वर्ग की रसोइयों को मानदेय सिर्फ ढाई माह का ही दिया। इससे खफा रसोइया बेसिक शिक्षा के समग्र शिक्षा अभियान दफ्तर पहुंची। उन लोगों ने अधिकारियों से जानकारी करना चाहा, लेकिन कोई जिम्मेदार नहीं मिल सका। जिससे वह मायूस होकर लौट गईं। यहां तक ही विभाग के जिम्मेदार लोगों की मोबाइल भी बंद मिली।
समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय में एमडीएम समन्वयक से मिलने आईं रसोइयों की कोई सुनवाई नही हुई। वहां उन लोगों ने अमर उजाला को अपना दर्द सुनाया। कन्या जूनियर नेवलगंज की ऊषा तिवारी, सुमन यादव ने कहा कि दीपावली पर उम्मीद थी कि पूरा मानदेय मिल जाएगा।
कहा कि मिलता ही कितना है, उसमें भी पांच माह के स्थान पर ढाई माह का ही मानदेय मिला। इसी तरह राजेंद्र नाथ लाहिडी पूर्व माध्यमिक विद्यालय निर्मला चौहान, राजकला दूबे ने कहा कि यह कौन सा मापदंड है कि इस जाति के लोगों को पूरा और इस जाति के लोगों को आधा ही मानदेय मिलेगा।
ऐसा तो कहीं नही होता है, शिक्षकों के वेतन में तो जाति का बंधन नही है, फिर हम लोगों के मानदेय में ऐसा क्यों होता है। हमारा मानदेय तो मनरेगा के श्रमिकों से भी कम है। इसी तरह कंपोजिट स्कूल पंतनगर की कुमुद यादव, राजरानी शुक्ला ने भी कहा कि मानेदय पूरा दिया जाना चाहिए।

कंपोजिट स्कूल पीएसी की मीना गौर अनीता कुमारी ने कहा कि विभाग ऐसा भेदभाव करके क्या संदेश देना चाहता है। उन लोगों को ऐसी उम्मीद नही थी। मांग किया उनकी समस्या को दूर किया जाए, जब सभी का मानदेय बराबर है तो सभी के बराबर ही मानेदय मिलना चाहिए।
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