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दूसरों का मनरंजन कराने वाले दिहाड़ी मजदूरों का हाल बेहाल
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वजीरगंज (गोंडा)। प्रदेश में एक विभाग ऐसा भी है, जहां मनरेगा मजदूरों से भी कम दिहाड़ी पर दशकों से दैनिक वेतन भोगी कर्मी कार्यरत हैं। इस महंगाई के दौर में यहां के मजदूरों को कई माह से पारिश्रमिक नहीं मिला है। मामला वन विभाग का है। क्षेत्र के पार्वती-अरंगा पक्षी विहार में डेढ़ दशक से ज्यादा अरसे से दैनिक वेतन भोगी कर्मी नियुक्त हैं। 11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाली इन झीलों पर केवल वन क्षेत्राधिकारी, एक वन दरोगा व एक वन रक्षक की नियुक्ति है। वन क्षेत्राधिकारी के पास बलरामपुर जनपद के भांभर वन रेंज का भी प्रभार है। वन संपदा होने से वे अपना ज्यादा समय वहीं व्यतीत करते हैं। यहां बचे दो विभागीय कर्मियों की सहायता के लिए यहाँ पर सात दैनिक वेतन भोगी कर्मी नियुक्त हैं।
कई तो यहां डेढ़ दशक से तैनात हैं। इन्हें 194 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से महीने में 26 दिनों का ही पारिश्रमिक मिलता है। इन कर्मियों का मुख्य कार्य थल व जल गश्त, पक्षी विहार कार्यालय परिसर की देखरेख सहित दोनों झीलों की सुरक्षा है। इन्हीं को नाविक का कार्य भी करना पड़ता है, ड्यूटी चौबीसों घंटे की है।
दैनिक वेतन भोगी इन कर्मियों को कई-कई महीनों तक पारिश्रमिक नहीं मिलता है। कर्मी राजेंद्र प्रसाद, प्रेम प्रकाश शर्मा, छेदी लाल, लाले, पन्ना लाल, मिठाई लाल व अवधेश ने बताया कि उनका कुल 18 माह का पारिश्रमिक बकाया है। घर को पैसा भेजने की बात तो दूर इन सब के पास मोबाइल रिचार्ज कराने तक के पैसे नहीं है, जिससे घर बात कर सकें। खुद का खर्चा चलाना मुश्किल है, घर को पैसे कहां से भेजें। प्रभागीय वनाधिकारी सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग, बलरामपुर प्रखर गुप्ता ने बताया कि प्रकरण जानकारी में नहीं है, इसे दिखवाया जाएगा।
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कई तो यहां डेढ़ दशक से तैनात हैं। इन्हें 194 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से महीने में 26 दिनों का ही पारिश्रमिक मिलता है। इन कर्मियों का मुख्य कार्य थल व जल गश्त, पक्षी विहार कार्यालय परिसर की देखरेख सहित दोनों झीलों की सुरक्षा है। इन्हीं को नाविक का कार्य भी करना पड़ता है, ड्यूटी चौबीसों घंटे की है।
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दैनिक वेतन भोगी इन कर्मियों को कई-कई महीनों तक पारिश्रमिक नहीं मिलता है। कर्मी राजेंद्र प्रसाद, प्रेम प्रकाश शर्मा, छेदी लाल, लाले, पन्ना लाल, मिठाई लाल व अवधेश ने बताया कि उनका कुल 18 माह का पारिश्रमिक बकाया है। घर को पैसा भेजने की बात तो दूर इन सब के पास मोबाइल रिचार्ज कराने तक के पैसे नहीं है, जिससे घर बात कर सकें। खुद का खर्चा चलाना मुश्किल है, घर को पैसे कहां से भेजें। प्रभागीय वनाधिकारी सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग, बलरामपुर प्रखर गुप्ता ने बताया कि प्रकरण जानकारी में नहीं है, इसे दिखवाया जाएगा।
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