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छपिया महोत्सव में बरसे फूल

Sat, 05 Nov 2016 11:26 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 05 Nov 2016 11:26 PM IST
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flower lashed in chapia festival
छपिया महोत्सव में जुटे संत - फोटो : अमर उजाला
आसमां से हेलीकाप्टर पुष्पवर्षा कर रहा था तो जमीं पर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था बूंदें छलककर श्रद्धा के सागर का आभास दे रहीं थीं। कुछ ऐसे ही अध्यात्म व उल्लास के माहौल में भगवान घनश्याम की 235वी जंयती पर शनिवार को उनकी जन्मस्थली छपिया में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ छपिया महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
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जन्मोत्सव मनाने के लिए भगवान की जन्मस्थली वाले पुराने मंदिर व नवनिर्मित मंदिर में हेलीकाप्टर से करीब 50 क्विंटल पुष्प बरसाए गए। नौ दिवसीय हरिकथा की शुरुआत के मौके पर मंदिर परिसर से कथा पंडाल तक पोथी यात्रा भी निकाली गई।
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 भगवान घनश्याम की 235वीं जयंती पर शनिवार को उनकी जन्मस्थली छपिया में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नौ दिवसीय छपिया महोत्सव का शुभारंभ किया गया। देश के कोने कोने से आए स्वामी नारायण के हजारों अनुयायिओं की मौजूदगी में महोत्सव के शुरूआत में भगवान के जन्मस्थल वाले पुराने मंदिर व नवनिर्मित मंदिर में हेलीकाप्टर ने करीब 50 क्विंटल फूल बरसाए।
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पुष्पवर्षा देखकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। श्रद्धालुओं ने पवित्र नारायण सरोवर में डुबकी लगा पुण्य लाभ लिया। स्नान के बाद में भगवान घनश्याम के भक्तों ने मंदिर परिसर से कथा पंडाल तक पोथी यात्रा निकाली।

इस पोथी यात्रा में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत देश के कई अन्य प्रांतों से आए लोगों ने भाग लिया। भगवान के जन्मोत्सव के मौके पर नौ दिवसीय हरिकथा का आयोजन किया गया है। इसके लिए गुजरात से आए कारीगरों ने व्यास पीठ के मंच को अक्षरधाम मंदिर के रूप मे बनाया है।

व्यास पीठ को फूलों से सजाया है जो हरिभक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भगवान घनश्याम महराज की लीला की 235वीं कथा के अमृतपान के लिए हजारों की संख्या में भगवान के अनुयायी छपिया पहुंच चुके हैं।

स्वामी नित्यस्वरूपदास ने भगवान स्वामी नारायण के लीला की 335 वीं कथा से इस नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ किया। स्वामी नारायण मंदिर के महंत वासुदेवानंद ने बताया कि इसके पहले राजस्थान, उड़ीसा व गुजरात में कथा का आयोजन किया जा चुका है।

जिले के छपिया गांव में आज से 235 वर्ष पहले भगवान घनश्याम महाराज का जन्म हुआ था। बाल्यकाल मेें ही वे वैराग्य धारण कर अयोध्या चले गए। इसके बाद वह गुजरात गए और वहां लोगों को कुरीतियों से बचने व मानव धर्म का पालन करने की शिक्षा दी। धर्म का संदेश देने के लिए भगवान घनश्याम जी महाराज ने गुजरात मे ही स्वामी नारायण संप्रदाय की स्थापना की। आज दुनिया भर में स्वामी नारायण संप्रदाय के लाखों अनुयायी धर्म का प्रचार कर रहे हैं।

छपिया तीर्थधाम मे सूरत से आये जुड़वा भाई मुकेश व महेश भाई ने बताया कि वह तमाम हरिभक्तों के साथ पन्द्रह बसों से यहां पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि यहां पहुंचकर उनका जीवन धन्य हो गया।


हीरे के व्यवसायी हर्षद भाई ने बताया कि वह बचपन से ही घनश्याम महाराज के अनुयायी हैं। यहां आकर जीवन सफल हो गया। इसी तरह सूरत से आई सविता व गीता ने बताया कि उन्हें अपने आराध्य देव की जन्मस्थली स्वामी नारायण छपिया तीर्थधाम में आने के बाद बहुत सुखद अनुभूति हुई। कथा महोत्सव में पोथी यात्रा के पहले गुजरात की महिला श्रद्धालुओं ने गरबा नृत्य किया।
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