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बाढ़ से सहमे 650 परिवारों ने बांध पर डाला डेरा
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गोंडा में बांध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ित।
- फोटो : GONDA
करनैलगंज (गोंडा)। घटते व बढ़ते जलस्तर से जिले के सीमावर्ती गांवों में घाघरा का पानी घुस गया है। इसमें तीन गांव बाराबंकी के पूरी तरह जलमग्न हो गए जबकि तीन गांव गोंडा के आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। घाघरा के उफान के कारण करीब 650 परिवार बेघर हो गए और बांध पर आ टिके हैं।
घाघरा के जलस्तर में भले ही रविवार को गिरावट आई हो मगर ग्रामीण मैदानी इलाकों में पानी का फैलाव तेज हो गया है। खतरे के निशान से घाघरा नदी 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बीते 24 घंटे में करीब 10 सेंटीमीटर से अधिक जलस्तर में कमी आई है। घट रही घाघरा से मैदानी इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। वहीं दो बांधों के बीच में बसे ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। करीब 650 परिवार अपना घर बार छोड़ बांध पर आ गये हैं। दो गांव की करीब तीन हजार की आबादी और 3 गांव की करीब दो हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
घाघरा के घटते जलस्तर और घाघरा की उफान में उठ रहे मशीना से खेती योग्य भूमि लगातार कटती जा रही है। उधर ग्राम नकहरा के ग्रामीणों में मनोज कुमार, संतराम, मनीराम, मोलहे, मंगल प्रसाद आदि का कहना है कि घाघरा का जलस्तर अगर मौजूदा जल स्तर से बढ़ा तो बांध के अंदर बसे करीब 400 घरों में पानी भर जाएगा। दूसरी तरफ ग्राम परसावल, कमियार, माझा रायपुर में पूरी तरह पानी भर चुका है। लोग अपना घर बार छोड़कर बांध पर आ गए हैं। वहीं अब मैदानी इलाकों में पानी धीरे-धीरे भरना शुरू हो गया है।
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कई जगहों पर घाघरा नदी बांध से सटकर बह रही है। जहां फिलहाल अभी कटान नहीं हो रही है। मगर ग्राम पारा व बेहटा के सामने जमीन को काटकर नदी बांध की ओर बढ़ रही है। बांध की सुरक्षा एवं देखरेख में लगे सहायक अभियंता अमरेश कुमार सिंह एवं अवर अभियंता एमके सिंह कहते हैं कि अभी तक बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। दो बांधों के बीच में बसे गांव में पानी भर गया है और ग्रामीण बांध पर बस गए हैं बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
बांध कटा तो होगी भारी तबाही
घाघरा के उफान के कारण शनिवार को केवटाही गांव का एक प्राइमरी स्कूल बाढ़ की चपेट में आ गया था। भवन के पीछे का हिस्सा नदी में समा गया था। रविवार को विद्यालय का आधा हिस्सा नदी में समा गया। बांध की सुरक्षा के लिए बनाया तीसरा अप्रेन भी कट गया और पानी का दबाव बांध पर बना हुआ है। ऐली परसौली व सौनाली मोहम्मदपुर के सात दर्जन मजरों के लोगों में दहशत है। यदि बांध कटा तो भारी तबाही हो सकती है। हालांकि रविवार को जलस्तर कम हुआ है, लेकिन घटते जल स्तर से मशीना उठने का डर है। मशीना उठने के कारण नदी नीचे से कटान करती है।
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घाघरा के जलस्तर में भले ही रविवार को गिरावट आई हो मगर ग्रामीण मैदानी इलाकों में पानी का फैलाव तेज हो गया है। खतरे के निशान से घाघरा नदी 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बीते 24 घंटे में करीब 10 सेंटीमीटर से अधिक जलस्तर में कमी आई है। घट रही घाघरा से मैदानी इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। वहीं दो बांधों के बीच में बसे ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। करीब 650 परिवार अपना घर बार छोड़ बांध पर आ गये हैं। दो गांव की करीब तीन हजार की आबादी और 3 गांव की करीब दो हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
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घाघरा के घटते जलस्तर और घाघरा की उफान में उठ रहे मशीना से खेती योग्य भूमि लगातार कटती जा रही है। उधर ग्राम नकहरा के ग्रामीणों में मनोज कुमार, संतराम, मनीराम, मोलहे, मंगल प्रसाद आदि का कहना है कि घाघरा का जलस्तर अगर मौजूदा जल स्तर से बढ़ा तो बांध के अंदर बसे करीब 400 घरों में पानी भर जाएगा। दूसरी तरफ ग्राम परसावल, कमियार, माझा रायपुर में पूरी तरह पानी भर चुका है। लोग अपना घर बार छोड़कर बांध पर आ गए हैं। वहीं अब मैदानी इलाकों में पानी धीरे-धीरे भरना शुरू हो गया है।
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कई जगहों पर घाघरा नदी बांध से सटकर बह रही है। जहां फिलहाल अभी कटान नहीं हो रही है। मगर ग्राम पारा व बेहटा के सामने जमीन को काटकर नदी बांध की ओर बढ़ रही है। बांध की सुरक्षा एवं देखरेख में लगे सहायक अभियंता अमरेश कुमार सिंह एवं अवर अभियंता एमके सिंह कहते हैं कि अभी तक बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। दो बांधों के बीच में बसे गांव में पानी भर गया है और ग्रामीण बांध पर बस गए हैं बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
बांध कटा तो होगी भारी तबाही
घाघरा के उफान के कारण शनिवार को केवटाही गांव का एक प्राइमरी स्कूल बाढ़ की चपेट में आ गया था। भवन के पीछे का हिस्सा नदी में समा गया था। रविवार को विद्यालय का आधा हिस्सा नदी में समा गया। बांध की सुरक्षा के लिए बनाया तीसरा अप्रेन भी कट गया और पानी का दबाव बांध पर बना हुआ है। ऐली परसौली व सौनाली मोहम्मदपुर के सात दर्जन मजरों के लोगों में दहशत है। यदि बांध कटा तो भारी तबाही हो सकती है। हालांकि रविवार को जलस्तर कम हुआ है, लेकिन घटते जल स्तर से मशीना उठने का डर है। मशीना उठने के कारण नदी नीचे से कटान करती है।