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कटान तेज, लोगों ने किया पलायन
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:18 PM IST
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पलायन करते बाढ़ पीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में बाढ़ का पानी तो कम हो गया, मगर दुश्वारियां जस की तस बनी हुई है। बाढ़ पीड़ित नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। जिले के कई स्थानों पर राप्ती नदी की कटान से लोगों में दहशत व्याप्त है। कटान तेज होने से लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है।
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस संसाधन भी नहीं हैं। बाढ़ घटने के साथ ही एक हफ्ते से बंद नेशनल हाईवे को प्रशासन ने चालू करा दिया है, वहीं तमाम जगहों पर बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक सप्ताह बाद भी जिले के सैकड़ों स्कूलों का बाढ़ के पानी के चलते संचालन शुरू नहीं हो सका है।
जिले में बाढ़ में फंसे हजारों लोगों को भोजन, पानी व इलाज आदि नसीब नहीं हो रहा था। जिले के करीब 200 गांवों में राप्ती नदी की बाढ़ से भारी तबाही हुई है। हजारों बीघे में लगीं फसलें पानी में डूबकर तबाह हो गई हैं। बाढ़ घटने के साथ ही राप्ती नदी के कटान ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है।
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बाढ़ का पानी घटने के साथ ही राप्ती नदी ने चौकाकला, झौहना, कल्यानपुर व उतरौला तहसील के एक दर्जन से अधिक गांवों में कटान शुरू कर दी है। राप्ती नदी के कटान में किसानों की फसलें कट रही हैं। किसान अयोध्या प्रसाद, कल्लू, मुन्नालाल, शिव प्रसाद व अमेरिका आदि ने बताया कि राप्ती नदी ने कई किसानों के खेतों को काट लिया है, जिससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। जिला महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रेशम सिंह ने डीएम को शिकायती पत्र देकर लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
अध्यक्ष ने लेखपाल पर बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री वितरित न करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को नेशनल हाईवे पर बेलहा डिप का पानी घटने के साथ ही आवागमन खोल दिया गया। जिले के तमाम स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा होने के चलते शिक्षण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
बीएसए अरुण कुमार ने खंड शिक्षाधिकारियों व शिक्षकों को प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में शैक्षणिक कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया है। डीएम प्रीति शुक्ला ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगे अफसरों व कर्मियों को राहत पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ में मरने वालों के परिवारीजनों को सहायता राशि दिलाने के लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम से रिपोर्ट तलब की गई है। खरझार नाला, लोहेपनिया, साहेबनगर, लैबुड्डी, कनहरा, परसिया व गांगनार आदि डिपो पर बाढ़ का पानी घटने के साथ ही आवागमन शुरू हो गया।
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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस संसाधन भी नहीं हैं। बाढ़ घटने के साथ ही एक हफ्ते से बंद नेशनल हाईवे को प्रशासन ने चालू करा दिया है, वहीं तमाम जगहों पर बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक सप्ताह बाद भी जिले के सैकड़ों स्कूलों का बाढ़ के पानी के चलते संचालन शुरू नहीं हो सका है।
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जिले में बाढ़ में फंसे हजारों लोगों को भोजन, पानी व इलाज आदि नसीब नहीं हो रहा था। जिले के करीब 200 गांवों में राप्ती नदी की बाढ़ से भारी तबाही हुई है। हजारों बीघे में लगीं फसलें पानी में डूबकर तबाह हो गई हैं। बाढ़ घटने के साथ ही राप्ती नदी के कटान ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है।
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बाढ़ का पानी घटने के साथ ही राप्ती नदी ने चौकाकला, झौहना, कल्यानपुर व उतरौला तहसील के एक दर्जन से अधिक गांवों में कटान शुरू कर दी है। राप्ती नदी के कटान में किसानों की फसलें कट रही हैं। किसान अयोध्या प्रसाद, कल्लू, मुन्नालाल, शिव प्रसाद व अमेरिका आदि ने बताया कि राप्ती नदी ने कई किसानों के खेतों को काट लिया है, जिससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। जिला महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रेशम सिंह ने डीएम को शिकायती पत्र देकर लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
अध्यक्ष ने लेखपाल पर बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री वितरित न करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को नेशनल हाईवे पर बेलहा डिप का पानी घटने के साथ ही आवागमन खोल दिया गया। जिले के तमाम स्कूलों में बाढ़ का पानी भरा होने के चलते शिक्षण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
बीएसए अरुण कुमार ने खंड शिक्षाधिकारियों व शिक्षकों को प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में शैक्षणिक कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया है। डीएम प्रीति शुक्ला ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगे अफसरों व कर्मियों को राहत पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ में मरने वालों के परिवारीजनों को सहायता राशि दिलाने के लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम से रिपोर्ट तलब की गई है। खरझार नाला, लोहेपनिया, साहेबनगर, लैबुड्डी, कनहरा, परसिया व गांगनार आदि डिपो पर बाढ़ का पानी घटने के साथ ही आवागमन शुरू हो गया।