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किसानों को नहीं मिली सूखा राहत
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:24 PM IST
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
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जिला प्रशासन व राजस्व कर्मियों की लापरवाही खामियाजा आपदा पीड़ित किसानों को भुगताना पड़ रहा है। सभी किसानों को सूखा राहत की धनराशि अभी तक नहीं मिल सकी है। प्रकृति की मार झेल रहे किसानों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है।
जिले के दो तहसीलों में सूखा राहत देेने के लिए करीब 92 हजार किसानों को चिह्नित किया गया है। किसानों की सूची बनाने में लेखपालों ने मनमानी की है। किसानों को सूखा राहत की धनराशि देने के बजाए प्रशासन ने डेढ़ करोड़ रुपये सरेंडर कर दिया है।
वर्ष 2016 में बारिश न होने से जिले में धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। शासन के निर्देश पर प्रशासन ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में हुए फसलों के नुकसान का आकलन कराया। शासन नेे जिले की दो तहसीलों के किसानों को सूखा राहत देने की घोषणा की।
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शासन के निर्देश पर प्रशासन ने बलरामपुर व तुलसीपुर तहसीलों में 92 हजार किसानों को सूखा राहत देने के लिए चिह्नित किया। इन किसानों को सूखा राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने 13 करोड़ रुपये का डिमांड शासन को भेजी थी।
प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने बलरामपुर व तुलसीपुर तहसीलों के सूखाग्रस्त घोषित किसानों को सूखा राहत देने के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये जारी कर दिया।
दोनों तहसीलों के किसानों के बैंक खातों में प्रशासन ने चार करोड़ रुपये की धनराशि भेज दी। डेढ़ करोड़ रुपये हस्तांतरण न होने के कारण जिला प्रशासन ने धनराशि सरेंडर कर दिया। प्रशासन व राजस्व कर्मियों की लापरवाही से सभी किसानों को अभी तक सूखा राहत की धनराशि नहीं मिल सकी है।
बलरामपुर व तुलसीपुर तहसील के किसान राम सागर, आयोध्या प्रसाद, जंगली, देवता प्रसाद, कासिम, छोट्टन, कल्लू, रामनरेश, लल्लू, मलहूराम, कृपा राम, महिपाल, राम नगीना, सुलेमान व बलदेव आदि का कहना है कि लेखपालों ने किसानों के नाम, बैंक अकाउंट का विवरण व क्षति का अनुमान भेजने में मनमानी की है।
लेखपालों की रिपोर्ट देर से आने के कारण प्रशासन को धनराशि सरेंडर करना पड़ा है। तैयार की गई सूची के सापेक्ष करीब 75 से 80 प्रतिशत तक किसानों को सूखा राहत की धनराशि नहीं मिल सकी है।
आपदा प्रभारी व एडीएम शिवपूजन ने बताया कि जिले की दो तहसीलों में सूखा राहत के लिए करीब 92 हजार किसानों को चिह्नित किया गया है। किसानों को सूखा राहत की धनराशि दिलाने के लिए 13 करोड़ रुपये का डिमांड भेजा गया था।
शासन से साढ़े पांच करोड़ रुपये की पहली किस्त मिली थी। चार करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे गए और वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण डेढ़ करोड़ रुपये वापस कर दिए गए।
चिह्नित सभी किसानों को सूखा राहत दिलाने के लिए शासन को धनराशि के लिए डिमांड भेजा गया है। धनराशि मिलने के बाद किसानों के खातों में सूखा राहत की धनराशि भेजी जाएगी।
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जिले के दो तहसीलों में सूखा राहत देेने के लिए करीब 92 हजार किसानों को चिह्नित किया गया है। किसानों की सूची बनाने में लेखपालों ने मनमानी की है। किसानों को सूखा राहत की धनराशि देने के बजाए प्रशासन ने डेढ़ करोड़ रुपये सरेंडर कर दिया है।
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वर्ष 2016 में बारिश न होने से जिले में धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। शासन के निर्देश पर प्रशासन ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में हुए फसलों के नुकसान का आकलन कराया। शासन नेे जिले की दो तहसीलों के किसानों को सूखा राहत देने की घोषणा की।
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शासन के निर्देश पर प्रशासन ने बलरामपुर व तुलसीपुर तहसीलों में 92 हजार किसानों को सूखा राहत देने के लिए चिह्नित किया। इन किसानों को सूखा राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने 13 करोड़ रुपये का डिमांड शासन को भेजी थी।
प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने बलरामपुर व तुलसीपुर तहसीलों के सूखाग्रस्त घोषित किसानों को सूखा राहत देने के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये जारी कर दिया।
दोनों तहसीलों के किसानों के बैंक खातों में प्रशासन ने चार करोड़ रुपये की धनराशि भेज दी। डेढ़ करोड़ रुपये हस्तांतरण न होने के कारण जिला प्रशासन ने धनराशि सरेंडर कर दिया। प्रशासन व राजस्व कर्मियों की लापरवाही से सभी किसानों को अभी तक सूखा राहत की धनराशि नहीं मिल सकी है।
बलरामपुर व तुलसीपुर तहसील के किसान राम सागर, आयोध्या प्रसाद, जंगली, देवता प्रसाद, कासिम, छोट्टन, कल्लू, रामनरेश, लल्लू, मलहूराम, कृपा राम, महिपाल, राम नगीना, सुलेमान व बलदेव आदि का कहना है कि लेखपालों ने किसानों के नाम, बैंक अकाउंट का विवरण व क्षति का अनुमान भेजने में मनमानी की है।
लेखपालों की रिपोर्ट देर से आने के कारण प्रशासन को धनराशि सरेंडर करना पड़ा है। तैयार की गई सूची के सापेक्ष करीब 75 से 80 प्रतिशत तक किसानों को सूखा राहत की धनराशि नहीं मिल सकी है।
आपदा प्रभारी व एडीएम शिवपूजन ने बताया कि जिले की दो तहसीलों में सूखा राहत के लिए करीब 92 हजार किसानों को चिह्नित किया गया है। किसानों को सूखा राहत की धनराशि दिलाने के लिए 13 करोड़ रुपये का डिमांड भेजा गया था।
शासन से साढ़े पांच करोड़ रुपये की पहली किस्त मिली थी। चार करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे गए और वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण डेढ़ करोड़ रुपये वापस कर दिए गए।
चिह्नित सभी किसानों को सूखा राहत दिलाने के लिए शासन को धनराशि के लिए डिमांड भेजा गया है। धनराशि मिलने के बाद किसानों के खातों में सूखा राहत की धनराशि भेजी जाएगी।