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किसानों ने सीखे खेती किसानी के गुर
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2016 10:49 PM IST
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मैक्स ब्लॉक के सौजन्य व अमर उजाला की ओर से पंडरीकृपाल ब्लॉक के जयनगर गांव में शुक्रवार को एक चौपाल आयोजित हुई। इसमें सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में आए अफसरों ने सरकार की ओर से चलायी जा रही कृषि योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का आगाज जन कवि शिवपूजन शुक्ला की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि रहे सीडीओ जयंत कुमार दीक्षित ने अमर उजाला की ओर से किसानों को बेहतर खेती किसानी की जानकारी के लिए लगाए गए चौपाल की सराहना की।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान जय किसान का हवाला देते हुए कहा कि जब देश का जवान व किसान ठीक होगा तभी देश का विकास होगा। उन्होंने इस मौके पर कई किसानों को सम्मानित किया।
उन्होंने मजदूरों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। वहीं इस मौके पर कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने कृ षि विभाग की ओर से संचालित किसानों के लिये कई कल्याण कारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान विभाग में अपना पंजीकरण अवश्य कराएं।
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बीज, खाद, कृषि उपकरण व यंत्रों में छूट की जानकारी दी। इस मौके पर डीसीओ पीएन सिंह,जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह, शशि मिश्रा, पवन मिश्रा, राज कुमार पाठक, हरीश पाठक, चन्द्रबली पाठक, उमेश्चवर पाण्डेय, विजय श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव व भीम सिंह आदि तमाम किसान मौजूद रहे।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से किया संवाद
चौपाल में कृषि विशेषज्ञों ने खेती के संबंध में कि सानों से संवाद किया। इस मौके पर कृ षि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह ने किसानों को खेती की भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि खेत में गोबर की खाद के प्रयोग की पुरानी परम्परा को कायम रखने के साथ खेती में नई तकनीक से काम करें। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग संतुलित रखकर खेतों की सेहत को अच्छा रखा जा सकता है। न्होंने बताया कि किसान खेत में जैविक खाद का प्रयोग करें। खेत की मिट्टी की जांच कराएं। जांच के बाद दी गई सलाह पर खाद का प्रयोग करें। खेत को समतल कराने के बाद मेढ़बंदी कराएं।
इससे खेत के पोषक तत्व बेकार न जाएं। कृषि विशेषज्ञ मिथलेश कुमार झा ने कम लागत में अधिक उपज लेने के लिए खेत के समतलीकरण पर जोर दिया। उन्होंने नये कृ षि यन्त्रों के प्रयोग से अधिक लाभ पाने के नुस्खे बताये। उन्होंने खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए गर्मी में गहरी जोताई करने को कहा।
‘चौपाल’ पत्रिका को किसानों ने सराहा
गोंडा। अमर उजाला की ओर से प्रकाशित पत्रिका ‘चौपाल’ की किसानों ने काफी प्रसंशा की। पत्रिका में खेती किसानी के बारे में विस्तार से दी जाने वाली जानकारी को किसानों को काफी पसन्द आया।
अमर उजाला की ओर से सैकड़ों किसानों को चौपाल पत्रिका का निशुल्क वितरण किया गया। इस मौके पर किसान कन्हैया लाल ने कहा कि इसमें गन्ने की खेती की विस्तार से जानकारी दी गई जो काफी उपयोगी है। इस तरह का प्रयास आगे भी चलते रहना चाहिए। किसान वासुदेव का कहना था कि चौपाल एक सम्पूर्ण कृषि पत्रिका है। इसमें कृषि से संबंधित सभी लेख उपयोगी होते हैं।
किसान सुरेश पाठक ने बताया कि पत्रिका में उन्हें मेंथा व धान की खेती की जानकारी काफी पसन्द आयी। चौपाल किसानों का सच्चा सहयोगी है। किसान शशि मिश्रा व हरीश पाठक ने बताया कि पत्रिक ा में जैविक खाद व औषधीय और फूलों की खेती की जानकारी बेजोड़ है।
अच्छी प्रजाति के गन्ने की बोआई की सलाह
गोंडा। चौपाल में रज्जनपुर गन्ना शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने भी शिरकत की। उन्होंने किसानों को अच्छी प्रजाति के गन्ने की बोआई करने की सलाह दी। संस्थान के वैज्ञानिक राम नरेश वर्मा ने किसानों को सलाह दी कि समस के साथ वे नई प्रजाति के गन्ने की बोआई कर कम लागत में अधिक उत्पादन ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि किसान अगैती व सामान्य प्रजाति के ही गन्ने की बोआई करें। पुराने प्रजाति के गन्ने की बार बार बोआई से उत्पादन घट जाता है। उन्होंने कहा किसान गन्ने की बोआई के लिए खेत को तैयार कर मिट्टी भुरभुरी कर लें। औसत खाद का प्रयोग करें और गन्ने का छोटा बैंड़ा काट कर बोआई करें। उन्होंने बताया कि किसान कभी भी उनके फोन नम्बर 9452828911 पर जानकारी ले सकते हैं।
लोक गीतों से बांधा समां
गोंडा। जिले के अवधी के जनक वि शिव पूजन शुक्ला ने खेती किसानी व किसानों के हालात का अपनी रचनाओं में खूबसूरत चित्रण किया। अमर उजाला की ओर से आयोजित चौपाल कार्यक्रम में शिव पूजन ने जब रचानाएं सुनाईं तो किसान झूम उठे। उन्होंने परदेश गए पति का फोन पर हाल चाल लेने का चित्रण कुछ इस तरह किया ‘एक दिन बडे़ सवेरे फोन किहिस घर वाली दीवाली अबही दूर बहुत है।’
इसके अलावा ‘होईगे मकई कै फसल जवान अब तो घर आ जा निरमोहिया’ और ‘कहिया अईबौ हे सनेही हमरे गांव’ जैसे गीत सुना कर कि सानों व मौजूद अधिकारियों को भाव विभोर कर दिया। खेती व किसानों से जुड़े गीत सुन कर लोगों ने खूब सराहना की।
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कार्यक्रम में आए अफसरों ने सरकार की ओर से चलायी जा रही कृषि योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का आगाज जन कवि शिवपूजन शुक्ला की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि रहे सीडीओ जयंत कुमार दीक्षित ने अमर उजाला की ओर से किसानों को बेहतर खेती किसानी की जानकारी के लिए लगाए गए चौपाल की सराहना की।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान जय किसान का हवाला देते हुए कहा कि जब देश का जवान व किसान ठीक होगा तभी देश का विकास होगा। उन्होंने इस मौके पर कई किसानों को सम्मानित किया।
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उन्होंने मजदूरों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। वहीं इस मौके पर कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने कृ षि विभाग की ओर से संचालित किसानों के लिये कई कल्याण कारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान विभाग में अपना पंजीकरण अवश्य कराएं।
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बीज, खाद, कृषि उपकरण व यंत्रों में छूट की जानकारी दी। इस मौके पर डीसीओ पीएन सिंह,जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह, शशि मिश्रा, पवन मिश्रा, राज कुमार पाठक, हरीश पाठक, चन्द्रबली पाठक, उमेश्चवर पाण्डेय, विजय श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव व भीम सिंह आदि तमाम किसान मौजूद रहे।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से किया संवाद
चौपाल में कृषि विशेषज्ञों ने खेती के संबंध में कि सानों से संवाद किया। इस मौके पर कृ षि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह ने किसानों को खेती की भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि खेत में गोबर की खाद के प्रयोग की पुरानी परम्परा को कायम रखने के साथ खेती में नई तकनीक से काम करें। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग संतुलित रखकर खेतों की सेहत को अच्छा रखा जा सकता है। न्होंने बताया कि किसान खेत में जैविक खाद का प्रयोग करें। खेत की मिट्टी की जांच कराएं। जांच के बाद दी गई सलाह पर खाद का प्रयोग करें। खेत को समतल कराने के बाद मेढ़बंदी कराएं।
इससे खेत के पोषक तत्व बेकार न जाएं। कृषि विशेषज्ञ मिथलेश कुमार झा ने कम लागत में अधिक उपज लेने के लिए खेत के समतलीकरण पर जोर दिया। उन्होंने नये कृ षि यन्त्रों के प्रयोग से अधिक लाभ पाने के नुस्खे बताये। उन्होंने खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए गर्मी में गहरी जोताई करने को कहा।
‘चौपाल’ पत्रिका को किसानों ने सराहा
गोंडा। अमर उजाला की ओर से प्रकाशित पत्रिका ‘चौपाल’ की किसानों ने काफी प्रसंशा की। पत्रिका में खेती किसानी के बारे में विस्तार से दी जाने वाली जानकारी को किसानों को काफी पसन्द आया।
अमर उजाला की ओर से सैकड़ों किसानों को चौपाल पत्रिका का निशुल्क वितरण किया गया। इस मौके पर किसान कन्हैया लाल ने कहा कि इसमें गन्ने की खेती की विस्तार से जानकारी दी गई जो काफी उपयोगी है। इस तरह का प्रयास आगे भी चलते रहना चाहिए। किसान वासुदेव का कहना था कि चौपाल एक सम्पूर्ण कृषि पत्रिका है। इसमें कृषि से संबंधित सभी लेख उपयोगी होते हैं।
किसान सुरेश पाठक ने बताया कि पत्रिका में उन्हें मेंथा व धान की खेती की जानकारी काफी पसन्द आयी। चौपाल किसानों का सच्चा सहयोगी है। किसान शशि मिश्रा व हरीश पाठक ने बताया कि पत्रिक ा में जैविक खाद व औषधीय और फूलों की खेती की जानकारी बेजोड़ है।
अच्छी प्रजाति के गन्ने की बोआई की सलाह
गोंडा। चौपाल में रज्जनपुर गन्ना शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने भी शिरकत की। उन्होंने किसानों को अच्छी प्रजाति के गन्ने की बोआई करने की सलाह दी। संस्थान के वैज्ञानिक राम नरेश वर्मा ने किसानों को सलाह दी कि समस के साथ वे नई प्रजाति के गन्ने की बोआई कर कम लागत में अधिक उत्पादन ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि किसान अगैती व सामान्य प्रजाति के ही गन्ने की बोआई करें। पुराने प्रजाति के गन्ने की बार बार बोआई से उत्पादन घट जाता है। उन्होंने कहा किसान गन्ने की बोआई के लिए खेत को तैयार कर मिट्टी भुरभुरी कर लें। औसत खाद का प्रयोग करें और गन्ने का छोटा बैंड़ा काट कर बोआई करें। उन्होंने बताया कि किसान कभी भी उनके फोन नम्बर 9452828911 पर जानकारी ले सकते हैं।
लोक गीतों से बांधा समां
गोंडा। जिले के अवधी के जनक वि शिव पूजन शुक्ला ने खेती किसानी व किसानों के हालात का अपनी रचनाओं में खूबसूरत चित्रण किया। अमर उजाला की ओर से आयोजित चौपाल कार्यक्रम में शिव पूजन ने जब रचानाएं सुनाईं तो किसान झूम उठे। उन्होंने परदेश गए पति का फोन पर हाल चाल लेने का चित्रण कुछ इस तरह किया ‘एक दिन बडे़ सवेरे फोन किहिस घर वाली दीवाली अबही दूर बहुत है।’
इसके अलावा ‘होईगे मकई कै फसल जवान अब तो घर आ जा निरमोहिया’ और ‘कहिया अईबौ हे सनेही हमरे गांव’ जैसे गीत सुना कर कि सानों व मौजूद अधिकारियों को भाव विभोर कर दिया। खेती व किसानों से जुड़े गीत सुन कर लोगों ने खूब सराहना की।