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Gonda News: हर दूसरी गर्भवती को डायबिटीज, कटरा बाजार में सबसे ज्यादा खतरा
Fri, 23 Oct 2026 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:12 PM IST
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गोंडा। जिले में गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला डैशबोर्ड के अनुसार, एक अप्रैल से 21 अक्तूबर 2026 के बीच पंजीकृत 22,657 गर्भवती महिलाओं में से 11,383 में डायबिटीज दर्ज की गई। यह कुल पंजीकरण का करीब 50 प्रतिशत है। ब्लॉकवार आंकड़ों में कटरा बाजार की स्थिति चिंताजनक है। यहां 906 पंजीकृत गर्भवतियों में से 68 प्रतिशत में डायबिटीज दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, बभनजोत और झंझरी में 50-50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज मिली है। हलधरमऊ में यह आंकड़ा 41 प्रतिशत, करनैलगंज में 38 प्रतिशत और गोंडा नगर पालिका क्षेत्र में 35 प्रतिशत है। तरबगंज में 13 प्रतिशत, बेलसर और मुजेहना में 14-14 प्रतिशत तथा मनकापुर में 15 प्रतिशत गर्भवतियों में डायबिटीज दर्ज की गई है।
सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि कटरा बाजार, बभनजोत और झंझरी में विशेष स्क्रीनिंग शिविर लगाने की योजना है। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच कराने, खानपान का ध्यान रखने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जोखिम
रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. मलिक आलमगीर के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने से मां और बच्चे, दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इससे समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ता है। ऐसे में समय पर जांच, खानपान में सावधानी व चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।
शुरुआती जांच में भी कई ब्लॉक पीछे
डैशबोर्ड के अनुसार, जिले में शुरुआती प्रसवपूर्व जांच (अर्ली एएनसी) का आंकड़ा 21.73 प्रतिशत यानी 4,925 है। रुपईडीह में यह 52.67 प्रतिशत है, जबकि बेलसर में केवल 10.46 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की शुरुआती जांच दर्ज की गई है। गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जांच से शुगर समेत अन्य जोखिमों की समय पर पहचान कर उनका प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।
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आंकड़ों के मुताबिक, बभनजोत और झंझरी में 50-50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज मिली है। हलधरमऊ में यह आंकड़ा 41 प्रतिशत, करनैलगंज में 38 प्रतिशत और गोंडा नगर पालिका क्षेत्र में 35 प्रतिशत है। तरबगंज में 13 प्रतिशत, बेलसर और मुजेहना में 14-14 प्रतिशत तथा मनकापुर में 15 प्रतिशत गर्भवतियों में डायबिटीज दर्ज की गई है।
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सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि कटरा बाजार, बभनजोत और झंझरी में विशेष स्क्रीनिंग शिविर लगाने की योजना है। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच कराने, खानपान का ध्यान रखने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जोखिम
रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. मलिक आलमगीर के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने से मां और बच्चे, दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इससे समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ता है। ऐसे में समय पर जांच, खानपान में सावधानी व चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।
शुरुआती जांच में भी कई ब्लॉक पीछे
डैशबोर्ड के अनुसार, जिले में शुरुआती प्रसवपूर्व जांच (अर्ली एएनसी) का आंकड़ा 21.73 प्रतिशत यानी 4,925 है। रुपईडीह में यह 52.67 प्रतिशत है, जबकि बेलसर में केवल 10.46 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की शुरुआती जांच दर्ज की गई है। गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जांच से शुगर समेत अन्य जोखिमों की समय पर पहचान कर उनका प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।