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हर स्कूल में लाइब्रेरी से शिक्षा को देंगे रफ्तार
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों में अब लाइब्रेरी का आकार बढ़ेगा। गणित, विज्ञान के साथ ही अंग्रेजी और हिंदी को सरल तरीके सीखने वाली किताबों को प्रमुखता से रखा जाना है। जिससे बच्चों का ज्ञान तो बढ़ेगा ही शिक्षकों को भी पढ़ाने में सहूलियत होगी। अब डिग्री कॉलेजों की तरह बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में ज्ञानवर्धक किताबों का पुस्तकालय होगा। 3141 परिषदीय स्कूलों में पुस्तकालय स्थापित कराने के लिए शासन ने बीते साल 2 करोड़ 2 लाख 26 हजार रुपये का बजट दिया था। अब हर स्कूल में एक हजार के करीब पुस्तकों की व्यवस्था होगी। इसके लिए पहले से स्थातिप लाइब्रेरी का आकार बढ़ाया जाना है।
स्कूलों के प्रबंध समितियों के माध्यम से बीते साल ही स्कूलों में लाइब्रेरी की स्थापना कराई गई थी। समितियों के खातों में बजट भेज भी दिया गया था। पुस्कालय की स्थापना के साथ ही हर स्कूल में रीडर कॉर्नर तय करके बच्चों को पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इसके अलावा आम जागरूकता के लिए स्कूलों में रीडर फेयर आयोजित किया जाना है। जिसमें बच्चों के साथ ही अभिभावकों की भी पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों की जानकारी दी जाएगी। बच्चों में पढ़ने की क्षमता का विकास करने की रणनीति बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयार की है।
जिले की 2238 प्राइमरी स्कूलों में पुस्तकालय के लिए एक करोड़ 11 लाख 90 हजार रुपये का बजट दिया गया है। इसी तरह 901 जूनियर हाईस्कूलों के लिए 90 लाख 10 हजार रुपये और दो कंपोजिट स्कूलों के लिए 26 हजार रुपये का बजट दिया गया है। इस बजट से बच्चों के ज्ञानवर्धन की राजकीय प्रकाशनों की पुस्तकों के साथ ही एनसीबीटी और एससीआरटी के प्रकाशन की किताबों की खरीद करनी हैं। किताबों के सुझाव की सूची भी दी गई है कि बजट की सीमा में अच्छी पुस्तकों की खरीद कर पुस्तकालय स्थापित किया जा सके।
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एक हजार किताबें उपलब्ध किए जाने की तैयारी
बीते साल में स्थापित की गई लाइब्रेरी में ज्यादा किताबें नही आ पाईं थी लेकिन अब एक हजार के करीब ज्ञानवर्धक किताबों की उपलब्धता कराने की तैयारी हो रही है। जिससे बच्चे सरल तरीके से अपने ज्ञान को बढ़ा सकेंगे। यही नहीं दीक्षा एप पर पांच हजार से अधिक वीडियो शिक्षा से संबंधित डाले गए हैं जिनसे भी बच्चे घर बैठ ही सीख सकते हैं। इसके अलावा शिक्षकों को निष्ठा प्रशिक्षण ऑनलाइन देकर बच्चों को तकनीक के जरिए शिक्षित करने पर जोर है।
स्कूलों में लाइब्रेरी का संचालन किए जाने के लिए बीते साल ही बजट दिया गया था। अब वहां पुस्तकों का विस्तार होगा, विषयों से जुड़ी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों के सीखने पर जोर दिया जाएगा। -डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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स्कूलों के प्रबंध समितियों के माध्यम से बीते साल ही स्कूलों में लाइब्रेरी की स्थापना कराई गई थी। समितियों के खातों में बजट भेज भी दिया गया था। पुस्कालय की स्थापना के साथ ही हर स्कूल में रीडर कॉर्नर तय करके बच्चों को पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इसके अलावा आम जागरूकता के लिए स्कूलों में रीडर फेयर आयोजित किया जाना है। जिसमें बच्चों के साथ ही अभिभावकों की भी पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों की जानकारी दी जाएगी। बच्चों में पढ़ने की क्षमता का विकास करने की रणनीति बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयार की है।
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जिले की 2238 प्राइमरी स्कूलों में पुस्तकालय के लिए एक करोड़ 11 लाख 90 हजार रुपये का बजट दिया गया है। इसी तरह 901 जूनियर हाईस्कूलों के लिए 90 लाख 10 हजार रुपये और दो कंपोजिट स्कूलों के लिए 26 हजार रुपये का बजट दिया गया है। इस बजट से बच्चों के ज्ञानवर्धन की राजकीय प्रकाशनों की पुस्तकों के साथ ही एनसीबीटी और एससीआरटी के प्रकाशन की किताबों की खरीद करनी हैं। किताबों के सुझाव की सूची भी दी गई है कि बजट की सीमा में अच्छी पुस्तकों की खरीद कर पुस्तकालय स्थापित किया जा सके।
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एक हजार किताबें उपलब्ध किए जाने की तैयारी
बीते साल में स्थापित की गई लाइब्रेरी में ज्यादा किताबें नही आ पाईं थी लेकिन अब एक हजार के करीब ज्ञानवर्धक किताबों की उपलब्धता कराने की तैयारी हो रही है। जिससे बच्चे सरल तरीके से अपने ज्ञान को बढ़ा सकेंगे। यही नहीं दीक्षा एप पर पांच हजार से अधिक वीडियो शिक्षा से संबंधित डाले गए हैं जिनसे भी बच्चे घर बैठ ही सीख सकते हैं। इसके अलावा शिक्षकों को निष्ठा प्रशिक्षण ऑनलाइन देकर बच्चों को तकनीक के जरिए शिक्षित करने पर जोर है।
स्कूलों में लाइब्रेरी का संचालन किए जाने के लिए बीते साल ही बजट दिया गया था। अब वहां पुस्तकों का विस्तार होगा, विषयों से जुड़ी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों के सीखने पर जोर दिया जाएगा। -डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी