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चकबंदी दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार की सच्चाई सुन जांच अफसर अवाक
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धानेपुर गोंडा। भ्रष्टाचार की मार से परेशान जान गंवाने वाले किसान के मौत की हकीकत जानने बुधवार को मृतक के गांव पहुंचे जांच अधिकारी धानेपुर के चकबंदी दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार की सच्चाई सुनकर जांच अफसर अवाक रह गए। मृतक के परिजनों ने एसीओ की करतूत बताते हुए कार्रवाई की मांग उठाई है। जांच अफसरों ने पीड़ित परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
धानेपुर थाना क्षेत्र के माधवगंज गांव के रहने वाले किसान संचित की चकबंदी अधिकारियों की मनमानी से मंगलवार को सदमे से मौत हो गई थी। किसान के परिजनों ने एसीओ गया प्रसाद वर्मा पर संचित की जमीन दूसरे नाम करने और फिर उसे दुरुस्त करने के बदले दस हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। परिजनों ने चकबंदी दफ्तर के बाहर मृतक का शव रखकर जमकर हंगामा किया था। पूरे मामले की जांच की मांग की थी। इस मामले की जांच के लिए बुधवार को अतिरिक्त उपजिलाधिकारी वीर बहादुर यादव व एसओसी लाल बहादुर पीड़ित के गांव पहुंचे और परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली।
जांच अधिकारी संचित के चक पर भी गए और आवंटन की स्थिति देखी। परिजनों ने जांच अफसरों को बताया कि चकबंदी दफ्तर में तैनात एसीओ गया प्रसाद वर्मा ने संचित की सड़क किनारे की जमीन को जानबूझकर दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया। किसी तरह की जांच नहीं की गई और संचित को सीधे नोटिस थमा दिया गया। मृतक किसान संचित जब नोटिस लेकर एसीओ के पास गया तो उन्होंने खतौनी सही करने के बदले दस हजार रुपये की डिमांड रख दी। रुपये की व्यवस्था न कर पाने के सदमे से मंगलवार को संचित की मौत के गई।
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अफसरों के गांव पहुंचे की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में गांव के अन्य कई लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने चकबंदी दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार की सच्चाई जांच अफसरों को बताई। ग्रामीणों ने बताया कि चकबंदी के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। चकबंदी दफ्तर जाने वाले किसानों से मनमानी तरीके से वसूली की जा रही है। एसीओ की करतूत व भ्रष्टाचार की सच्चाई सुनकर जांच अफसर अवाक रह गए। दोनों अफसरों ने पीड़ित परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट वीर बहादुर यादव ने बताया कि चकबंदी दफ्तर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत मिली है। जल्द ही यहां कैंप लगाकर लोगों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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धानेपुर थाना क्षेत्र के माधवगंज गांव के रहने वाले किसान संचित की चकबंदी अधिकारियों की मनमानी से मंगलवार को सदमे से मौत हो गई थी। किसान के परिजनों ने एसीओ गया प्रसाद वर्मा पर संचित की जमीन दूसरे नाम करने और फिर उसे दुरुस्त करने के बदले दस हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। परिजनों ने चकबंदी दफ्तर के बाहर मृतक का शव रखकर जमकर हंगामा किया था। पूरे मामले की जांच की मांग की थी। इस मामले की जांच के लिए बुधवार को अतिरिक्त उपजिलाधिकारी वीर बहादुर यादव व एसओसी लाल बहादुर पीड़ित के गांव पहुंचे और परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली।
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जांच अधिकारी संचित के चक पर भी गए और आवंटन की स्थिति देखी। परिजनों ने जांच अफसरों को बताया कि चकबंदी दफ्तर में तैनात एसीओ गया प्रसाद वर्मा ने संचित की सड़क किनारे की जमीन को जानबूझकर दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया। किसी तरह की जांच नहीं की गई और संचित को सीधे नोटिस थमा दिया गया। मृतक किसान संचित जब नोटिस लेकर एसीओ के पास गया तो उन्होंने खतौनी सही करने के बदले दस हजार रुपये की डिमांड रख दी। रुपये की व्यवस्था न कर पाने के सदमे से मंगलवार को संचित की मौत के गई।
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अफसरों के गांव पहुंचे की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में गांव के अन्य कई लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने चकबंदी दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार की सच्चाई जांच अफसरों को बताई। ग्रामीणों ने बताया कि चकबंदी के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। चकबंदी दफ्तर जाने वाले किसानों से मनमानी तरीके से वसूली की जा रही है। एसीओ की करतूत व भ्रष्टाचार की सच्चाई सुनकर जांच अफसर अवाक रह गए। दोनों अफसरों ने पीड़ित परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट वीर बहादुर यादव ने बताया कि चकबंदी दफ्तर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत मिली है। जल्द ही यहां कैंप लगाकर लोगों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।