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जेब खाली, मंदिरों में घटी भक्तों की आमद
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:41 PM IST
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सूना पड़ा मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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1000-500 के पुराने नोट बंद होने से मंदिरों में भक्तों की आमद कम होने के साथ-साथ चढ़ावे में भी काफी घट गया है। नोट बदलने के लिए बैंकों के चक्कर काटने से परेशान भक्त मंदिर जाने की फुरसत ही नहीं पा रहे हैं। श्रद्धालुओं से लबरेज रहने वाले प्रमुख मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
चढ़ावे में कमी आने से मंदिरों के दानपात्र लगभग खाली पड़े हुए हैं। मंदिर की व्यवस्था में लगे लोग भी चढ़ावा न आने के कारण आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। आलम यह है कि मंदिरों में चढ़ावे के रूप में आने वाले नए, पुराने व छोटे नोटों का अकाल सा दिख रहा है। गुुरुवार को अमर उजाला टीम ने जिले के कुछ प्रमुख मंदिरों का जायजा लिया।
नोटबंदी का प्रभाव केवल आम जनमानस पर ही नहीं बल्कि मंदिरों पर भी पड़ा है। यहां पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है। मंदिरों में आने वाले भक्तों की संख्या में काफी घट गई है। नगर के झारखंडी मंदिर में सुबह-शाम जुटने वाली भीड़ अब देखने को नहीं मिल रही है। भक्तों के न आने से मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी काफी कम हो गया है।
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मंदिर के पुजारी बाबा लालजी गिरि का कहना है कि पूर्व में सोमवार को दुर्गा माता एवं भगवान शंकर तथा मंगलवार को हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था लेकिन नोटबंदी के बाद से ही भक्तों का अकाल सा पड़ गया है।
इक्का-दुक्का भक्त ही मंदिर आ रहे हैं। मंदिर में आने वाले चढ़ावे में भी करीब 70 प्रतिशत की कमी आई है। मंदिर का दानपात्र खाली ही रहता है। अति प्राचीन शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भी नोटबंदी का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इस मंदिर में पहले देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन देवी दर्शन के लिए आते थे लेकिन नोटबंदी के बाद से यहां भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है।
मंदिर के महंत मिथलेश नाथ ने बताया कि नोटबंदी का असर हर जगह दिखाई दे रहा है। आम आदमी अपने खर्चों की पूर्ति में ही परेशान है। बड़े नोट बंद होने से लोग छोटे नोट का इस्तेमाल अपने खर्चों की पूर्ति में कर रहा है।
नोटबंदी के चलते मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या एवं चढ़ावे में करीब 90 प्रतिशत कमी हो गई है। दानपात्र में बड़े नोट की बात तो दूर छोटे नोट भी इक्का-दुक्का ही डाले जा रहे हैं। यही हाल जिले के बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, पचपेड़वा स्थित शिवगढ़ धाम, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर, उतरौला स्थित दुखहरण नाथ, वीर विनय चौराहा स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर व नगर स्थित रानी तालाब हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी देखने को मिल रही है। इन मंदिरों में भी इस समय भक्तों का आना काफी कम हो गया है। दानपात्र में लोग सिक्के अधिक डाल रहे हैं।
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चढ़ावे में कमी आने से मंदिरों के दानपात्र लगभग खाली पड़े हुए हैं। मंदिर की व्यवस्था में लगे लोग भी चढ़ावा न आने के कारण आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। आलम यह है कि मंदिरों में चढ़ावे के रूप में आने वाले नए, पुराने व छोटे नोटों का अकाल सा दिख रहा है। गुुरुवार को अमर उजाला टीम ने जिले के कुछ प्रमुख मंदिरों का जायजा लिया।
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नोटबंदी का प्रभाव केवल आम जनमानस पर ही नहीं बल्कि मंदिरों पर भी पड़ा है। यहां पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है। मंदिरों में आने वाले भक्तों की संख्या में काफी घट गई है। नगर के झारखंडी मंदिर में सुबह-शाम जुटने वाली भीड़ अब देखने को नहीं मिल रही है। भक्तों के न आने से मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी काफी कम हो गया है।
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मंदिर के पुजारी बाबा लालजी गिरि का कहना है कि पूर्व में सोमवार को दुर्गा माता एवं भगवान शंकर तथा मंगलवार को हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था लेकिन नोटबंदी के बाद से ही भक्तों का अकाल सा पड़ गया है।
इक्का-दुक्का भक्त ही मंदिर आ रहे हैं। मंदिर में आने वाले चढ़ावे में भी करीब 70 प्रतिशत की कमी आई है। मंदिर का दानपात्र खाली ही रहता है। अति प्राचीन शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भी नोटबंदी का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इस मंदिर में पहले देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन देवी दर्शन के लिए आते थे लेकिन नोटबंदी के बाद से यहां भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है।
मंदिर के महंत मिथलेश नाथ ने बताया कि नोटबंदी का असर हर जगह दिखाई दे रहा है। आम आदमी अपने खर्चों की पूर्ति में ही परेशान है। बड़े नोट बंद होने से लोग छोटे नोट का इस्तेमाल अपने खर्चों की पूर्ति में कर रहा है।
नोटबंदी के चलते मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या एवं चढ़ावे में करीब 90 प्रतिशत कमी हो गई है। दानपात्र में बड़े नोट की बात तो दूर छोटे नोट भी इक्का-दुक्का ही डाले जा रहे हैं। यही हाल जिले के बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, पचपेड़वा स्थित शिवगढ़ धाम, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर, उतरौला स्थित दुखहरण नाथ, वीर विनय चौराहा स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर व नगर स्थित रानी तालाब हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी देखने को मिल रही है। इन मंदिरों में भी इस समय भक्तों का आना काफी कम हो गया है। दानपात्र में लोग सिक्के अधिक डाल रहे हैं।