फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   election

आजादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत में भी हुआ था विधान सभा चुनाव

Tue, 08 Feb 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Feb 2022 11:51 PM IST
विज्ञापन
election
गोंडा। आजादी के बाद अब देश में हर पांच साल बाद लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव होते हैं। आजादी के पहले भी उत्तर प्रदेश में आम चुनाव होते थे। तब प्रांतीय विधान सभा के लिए मतदान होता था। इस दौरान चुनाव मैदान में उतरे महारथियों में रोचक जंग भी देखने को मिलती थी। गोंडा में भी आधा दर्जन सीटों पर राज परिवार से जुड़े तमाम दिग्गजों के साथ ही आम आदमी भी इसमें हिस्सेदारी करते थे।
विज्ञापन

देश में पहली बार प्रांतीय असेंबली के चुनाव वर्ष 1937 में हुए थे। इसके लिए 1935 में विधेयक पारित कर ब्रिटिश संसद ने भारतीयों को प्रांतीय शासन के प्रबंध का अधिकार दिया था। इसके अंतर्गत प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव का फैसला किया गया। उस दौर में प्रभावशाली रही कांग्रेस ने इसका विरोध किया, लेकिन भीतरी दबाव के बाद वर्ष 1937 में उसने इस चुनाव में हिस्सेदारी की सहमति दे दी। गोंडा में उत्तर प्रदेश (तत्कालीन आगरा व अवध के संयुक्त प्रांत) की प्रांतीय असेंम्बली के लिए छह सीटें गठित की गईं। इस चुनाव में गोंडा सदर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी लाल बिहारी टंडन ने गोंडा के राजा जगदीश दत्त राम पांडेय को भारी मतों से हरा कर सबको आश्चर्य चकित कर दिया था, जबकि कांग्रेस के ही कद्दावर नेता ईश्वर शरण को तबके गोंडा दक्षिण (वर्तमान तरबगंज) से जीत हासिल हुई थी। उन्होंने कांग्रेस से बगावत कर चुनावी मैदान में उतरे गोंडा के प्रसिद्ध वकील और जिला परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद और जिले की जानी मानी चीनी मिल के प्रबंधक कृष्णादेव को हराकर विजय हासिल की थी।
विज्ञापन

इसी चुनाव में कांग्रेस छोड़कर आए मनकापुर राजा राघवेन्द्र प्रताप सिंह उतरौला दक्षिण पश्चिम से विधायक बने थे। जिले की तीन अन्य सीटों पर कांग्रेस के राम प्रसाद टमटा व जिले की दो मुस्लिम आरक्षित सीट पर मुस्लिम लीग के गुलाम हुसैन बट और मिर्जा महमूद बेग ने अपने विरोधियों को शिकस्त देकर अपना सिक्का जमाया था। इस आम चुनाव के बाद सूबे में संयुक्त प्रांत (मौजूदा उत्तर प्रदेश) की अंतरिम सरकार का गठन हुआ। इस निर्वाचित सरकार में पं. गोविंद वल्लभ पंत ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

1946 में हुआ दूसरा और आखिरी विधान सभा चुनाव
आजादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत में दूसरा और आखिरी विधान सभा चुनाव वर्ष 1946 में हुआ। इस चुनाव में भी दिग्गजों के बीच रोचक जंग देखी गई। इस बार भी सदर सीट से कांग्रेस के लाल बिहारी टंडन निर्विरोध विजयी रहे। गोंडा दक्षिण (वर्तमान तरबगंज) से उस दौर के दिग्गज कांग्रेसी ईश्वर शरण ने अपना वर्चस्व कायम रखा और उन्हें भी निर्विरोध जीत हासिल हुई। इस चुनाव में सुरक्षित सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी श्यामलाल धोबी और गंगा प्रसाद बरवार विधायक बने थे। उतरौला सीट पर तत्कालीन कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और बलरामपुर निवासी बलदेव प्रसाद सैलानी व गंगा प्रसाद को निर्विरोध प्रांतीय असेम्बली का सदस्य चुना गया। जिले की दो मुस्लिम आरक्षित सीटों पर इस बार मुस्लिम लीग के उम्मीदवार रोशन जमा खां और अली जर्रार जाफरी ने अपने विरोधियों को हराकर जीत का परचम लहराया था। हालांकि साल 1948 में ईश्वर शरण सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हुए और विधान सभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed