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शैक्षिक क्रांति से कई देशों में लहराया परचम

Wed, 01 Jan 2020 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2020 10:24 PM IST
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Educational revolution has brought glory in many countries
पूरे देश का प्रतिष्ठित प्राइमरी स्कूल धौरहरा। - फोटो : GONDA
गोंडा। करनैलगंज के धौरहरा गांव का नाम अब शैक्षिक क्रांति से जुड़ जाता है। बात गांव की होते ही वहां के प्राइमरी स्कूल की चर्चा शुरू हो जाती है। शैक्षिक क्रांति के लिए बहुचर्चित प्राइमरी स्कूल धौरहरा से पूरे गांव का परचम देश में ही नही कई देशों में लहरा चुका है। सरकार से बजट का इंतजार किए बिना ही यह स्कूल अब एक रिचर्स सेंटर के रूप में विकसित हो चुका है। यह क्रांति यहां के प्रधानाध्यापक रवि प्रताप सिंह की मेहनत के बूते है और सिर्फ 5 सालों के अपने कार्यकाल में ही उन्होंने एक स्कूल से पूरे गांव का मान बढ़ा दिया। अब तो गांव के लोगों को भी गर्व होता है कि देश के कोने-कोने में धौरहरा गांव की धूम है।
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जिले का पहला गांव है जिसकी चर्चा शिक्षा के जरिए है और गांव का अपना अलग ही स्थान है। प्रदेश स्तर के कई अधिकारियों के अलावा वर्ष 2014 से अब तक के करीब सभी जिलाधिकारियों ने स्कूल में पहुंचकर वहां की व्यवस्था परखी और गांव वालों से सीधा संवाद कायम कर हकीकत को परखा भी। अब तो धौरहरा गांव की पहचान ही स्कूल की गतिविधियों से पूरे जिले में ही नही देश भर में है। कारण इसी गांव के युवा रवि प्रताप सिंह को उसी स्कूल में तैनाती मिली, जहां उन्होंने प्राथमिक शिक्षा हासिल की थी। फिर क्या था उन्होंने न सिर्फ गांव का नाम रोशन किया, बल्कि गांव के हर बच्चे को हाईटेक शिक्षा देने का काम किया।
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अब गांव गूगल पर है और कई देशों की टीम गांव आ चुकी है। गांव में शिक्षा के साथ ही गौरैया संरक्षण, जैव विविधता के कार्यक्रम हो रहे हैं, इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रमों में धौरहरा गांव की अलग ही छाप दिखी है। अब तो गांव के रवि प्रताप सिंह को वर्ष 2018 में राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला और वह अब देश में शिक्षा में सूचना तकनीक के प्रयोग के ब्रांड एंबेसडर बने हैं। इससे भी गांव के लोग फूले नहीं समा रहे हैं।
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गांव को देखने के लिए विदेशों से आ चुकी टीम
धौरहरा गांव की धूम जिले और देश में तो है ही विदेशों से भी टीम आ चुकी है। जिसमें अमेरिका से दो बार, हांगकांग, वियतनाम, कनाडा से टीम आ चुकी है। गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति देखने के साथ ही बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को देख चुके हैं।
स्कूल की उपलब्धियों से खिल उठा धौरहरा
स्कूल की उपलब्धियों से धौरहरा गांव खिल उठा है। गंाव को संयुक्त राष्ट्र संघ के समुदाय में स्थान हासिल हुआ और प्रदेश के शैक्षिक कलेण्डर में स्कूल की गतिविधियों को स्थान मिला। पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य होने पर वांशिगटन से प्रमाण पत्र मिला। ब्रिटिश काउंसिल से सह शिक्षा की संबद्धता मिली। जिले का पहला स्कूल बनने का गौरव हासिल हुआ और यहां के बच्चों को राज्य स्तर पर पुरस्कार हासिल हुआ। हाईटेक शिक्षा का रोल मॉडल बनने के साथ ही स्कूल समुदाय का जुड़ाव एक बड़ी सफलता रही।
फैक्ट फाइल
आबादी-3500
मतदाता- 1950
प्राइमरी स्कूल- 3
जूनियर हाईस्कूल-01
एक वन विभाग की नर्सरी
सरयू घाट के किनारे का रमणीक स्थल
गांव का नाम स्कूल के कारण पूरे देश में है और यह हमारे लिए बहुत की गर्व की बात है। हर दिन हमारे गांव के स्कूल की चर्चा रहती है और दूसरे गांव के बच्चे स्कूल में नाम लिखाए हैं और पढने आते है। -राम कुमार गुप्ता, प्रधान

मेरे गांव का स्कूल था और बचपन में मै भी यहां से पढ़ा था। नियुक्ति मिलने पर काम करने का अवसर मिला। गांव के लोगों और जिले के अधिकारियों व सम्मानित लोगों ने उत्साह बढ़ाया। अभी बहुत कार्य करना है। अच्छा लगता है कि गांव की चर्चा अच्छे कार्य में है। -रवि प्रताप सिंह, आदर्श शिक्षक
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