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305 स्कूलों में बिजली, 406 में बाउंड्री ही नहीं ं
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गोंडा। बेसिक स्कूलों में सुविधाओं के साथ ही भवनों के कायाकल्प की योजनाएं वर्ष 2019 से ही चल रही हैं। 80 करोड़ से अधिक का बजट पंचायत राज से खर्च हो चुका है। एक हजार से अधिक भवनों के मरम्मत के साथ ही बड़े स्तर पर शौचालयों के निर्माण का दावा पंचायत राज विभाग कर रहा है। इसके बावजूद अभी 406 स्कूल ऐसे हैं जहां बाउंड्रीवाल तक नहीं है। कई स्कूलों में शौचालय तक नहीं है। हद तो यह है कि 305 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। ऐसे में स्कूलों के कायाकल्प का सपना अधूरा सा लग रहा है। इन स्कूलों में विधान सभा चुनाव के बूथ भी हैं अब ऐसे में मतदान के दौरान समस्या होनी तय है। विभाग को एक माह में पूरी सुविधा देनी है।
आपरेशन कायाकल्प से करोड़ों रुपयों का बजट खर्च करने के बाद भी स्कूलों की दशा नही बदली है। जिले के 305 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन ही नही है, जबकि वायरिंग हो चुकी है। इसी तरह 406 में बाउंड्रीवाल ही नही है। इसके अलावा 140 स्कूलों में रैंप नही है, 142 में तो शौचालय तक नही है। यही नही पानी पीने का इंतजाम 18 स्कूलों में नही है और 40 स्कूलों में वायरिंग तक नही है। एक माह में यह सुविधाएं पूरी की जानी है, विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। इससे भी एक कदम आगे यह है कि 14 स्कूल ऐसे हैं जहां पर कोई भी फर्नीचर नही है। अब निर्वाचन आयोग ने भी उन स्कूलों में सुविधाओं और संसाधनों की डिटेल मांगी है, जहां पर मतदेय स्थल हैं। आयोग ने पहले ही निर्देश दिये थे कि जहां पर बूथ बन रहे हैं, वहां के स्कूलों में सभी प्रकार की सुविधाएं दुरुस्त की जाएं। यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए गंभीर प्रयास नही है।
गजब: 142 स्कूलों की छात्राएं तो पानी ही नहीं पीतीं
- बिना पानी के आठ घंटे कहीं रुकना सबके बस की बात नहीं है। अभी तो मौसम ठंड है, चल जाता है। मार्च से लेकर 20 मई तक का समय तो जानलेवा हो सकता है। इसके बाद भी जिले के 142 स्कूल ऐसे हैं जहां पढ़ने वाली छात्राएं तो पूरे दिन पानी ही नही पीतीं हैं। इसलिए है कि यहां पर शौचालय की सुविधा नहीं है और बाहर वह जा नहीं सकतीं हैं। ऐसे में वह किस दौर से गुजरती होंगी, शायद अनुमान विभाग को नही है। शौचालय की सुविधा न होने से बेटियों को सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है।
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स्कूलों में जहां भी जो समस्या है उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। ब्लाकवार पंचायतों के प्रतिनिधियों से संवाद किया जा रहा है जिससे समस्याएं दूर हो सकें। आरपी सिंह, प्रभारी बीएसए
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आपरेशन कायाकल्प से करोड़ों रुपयों का बजट खर्च करने के बाद भी स्कूलों की दशा नही बदली है। जिले के 305 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन ही नही है, जबकि वायरिंग हो चुकी है। इसी तरह 406 में बाउंड्रीवाल ही नही है। इसके अलावा 140 स्कूलों में रैंप नही है, 142 में तो शौचालय तक नही है। यही नही पानी पीने का इंतजाम 18 स्कूलों में नही है और 40 स्कूलों में वायरिंग तक नही है। एक माह में यह सुविधाएं पूरी की जानी है, विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। इससे भी एक कदम आगे यह है कि 14 स्कूल ऐसे हैं जहां पर कोई भी फर्नीचर नही है। अब निर्वाचन आयोग ने भी उन स्कूलों में सुविधाओं और संसाधनों की डिटेल मांगी है, जहां पर मतदेय स्थल हैं। आयोग ने पहले ही निर्देश दिये थे कि जहां पर बूथ बन रहे हैं, वहां के स्कूलों में सभी प्रकार की सुविधाएं दुरुस्त की जाएं। यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए गंभीर प्रयास नही है।
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गजब: 142 स्कूलों की छात्राएं तो पानी ही नहीं पीतीं
- बिना पानी के आठ घंटे कहीं रुकना सबके बस की बात नहीं है। अभी तो मौसम ठंड है, चल जाता है। मार्च से लेकर 20 मई तक का समय तो जानलेवा हो सकता है। इसके बाद भी जिले के 142 स्कूल ऐसे हैं जहां पढ़ने वाली छात्राएं तो पूरे दिन पानी ही नही पीतीं हैं। इसलिए है कि यहां पर शौचालय की सुविधा नहीं है और बाहर वह जा नहीं सकतीं हैं। ऐसे में वह किस दौर से गुजरती होंगी, शायद अनुमान विभाग को नही है। शौचालय की सुविधा न होने से बेटियों को सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है।
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स्कूलों में जहां भी जो समस्या है उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। ब्लाकवार पंचायतों के प्रतिनिधियों से संवाद किया जा रहा है जिससे समस्याएं दूर हो सकें। आरपी सिंह, प्रभारी बीएसए