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हर माह करोड़ों खर्च फिर भी 2560 बेटियां स्कूल से दूर
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फोटो-19-गोंडा के प्राथमिक विद्यालय सोनबरसा में पढ़ाई करते बच्चे। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। बेसिक शिक्षा पर हर माह 40 करोड़ से अधिक का बजट खर्च हो रहा है। इसके बावजूद जिले के परिषदीय स्कूलों से 2,560 बेटियां दूर हैं। यही नहीं सौ से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके यहां की एक भी बेटियों ने नाम नहीं लिखाया है। इन्हें स्कूल से जोड़ना चुनौती भरा है। इधर, परिषदीय स्कूल में बेटियों का प्रवेश व पढ़ाई के लिए जिले में सोमवार से कन्या प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। बेटियों की शिक्षा के लिए स्कूलों में तीन दिन का कैंप लगाकर प्रवेश दिलवाया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने भी तैयारी पूरी कर ली है।
बेसिक शिक्षा विभाग बेटियों की शिक्षा पर विशेष प्रयास कर रहा है। जिले में हर साल बड़ी संख्या में छात्राओं का स्कूल छोड़ने या प्रवेश न लेने की स्थिति से विभाग सकते में हैं। बाल विकास विभाग की सर्वे रिपोर्ट पर गौर करें तो करनैलगंज ब्लॉक में सबसे अधिक 437 बालिकाओं का नामांकन स्कूलों में नहीं हैं। इन बालिकाओं की उम्र 11 से 14 साल के बीच है।
तरबगंज एक मात्र ब्लॉक है जहां बालिकाओं के प्रवेश की स्थिति शहर से भी ठीक हैं। शहर में जहां 31 बालिकाओं ने प्रवेश नहीं लिया है तो तरबगंज में सिर्फ 12 बालिकाएं ही ऐसी हैं जिन्होंने प्रवेश नहीं लिया है। विभाग इन बालिकाओं को जोड़ने के लिए कन्या प्रवेश उत्सव के माध्यम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। जिन बालिकाओं का प्रवेश नहीं हुआ है, उनके परिवार की डिटेल के साथ मोबाइल नंबर तक की सूची तैयार की गई है। जिससे प्रवेश के लिए प्रेरित किया जा सके। (संवाद)
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शिक्षा पर बड़े स्तर पर खर्च होता है बजट
परिषदीय स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट से स्कूलों को संवारने के लिए 12 करोड़ से अधिक का बजट खर्च होता है। वहीं खेलकूद के लिए भी तीन करोड़ का बजट दिया जाता है। डीबीटी से 45 करोड़ रुपये तो एमडीएम पर तीस करोड़ के करीब का बजट खर्च होता है। इन सबके अलावा वेतन पर ही 40 करोड़ से अधिक का बजट हर माह खर्च हो रहा है। जूनियर हाईस्कूल में बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने, उनके प्रेरित करने के लिए ब्लाक स्तर पर नारी शिक्षा चौपाल, जीवन कौशल प्रशिक्षण आदि कई तरह की गतिविधियों का आयोजन होता है। इन सब आयोजनों पर भी एक करोड़ के करीब का बजट खर्च होता है। अब विभाग के लिए यह चुनौती है कि सभी बालिकाओं को स्कूल से जोड़कर शिक्षा देने का कार्य हो।
ब्लॉकों में प्रवेश न लेने वाली बालिकाओं पर एक नजर
बालिकाओं के स्कूल में प्रवेश न लेने वाला सर्वे चौंकाने वाला है। जिसमें बभनजोत ब्लॉक में 203, बेलसर में 38 बालिकाओं का प्रवेश नहीं हो सका है। छपिया में 29, इंटियाथोक में 295, मनकापुर में 130, मुजेहना में 282, शहर में 31, नवाबगंज में 219, पंडरीकृपाल में, 75, परसपुर में 241, हलधरमऊ में 130, कटरा बाजार में 101, वजीरगंज में 103, झंझरी में 136, रूपईडीह में 197, तरबगंज में 12, करनैलगंज में 437 बालिकाओं का प्रवेश ही नहीं हो सका है। अब कन्या प्रवेश उत्सव पर इन बालिकाओं का प्रवेश कराने का महाभियान शुरू होना है।
बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन कराने के लिए कन्या प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। स्कूल में नामांकन कराने वाली बालिकाओं के परिवार से संपर्क कर शत- प्रतिशत नामांकन कराया जाएगा। 30 सितंबर तक स्कूलों में नामांकन किए जाने की व्यवस्था है। अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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बेसिक शिक्षा विभाग बेटियों की शिक्षा पर विशेष प्रयास कर रहा है। जिले में हर साल बड़ी संख्या में छात्राओं का स्कूल छोड़ने या प्रवेश न लेने की स्थिति से विभाग सकते में हैं। बाल विकास विभाग की सर्वे रिपोर्ट पर गौर करें तो करनैलगंज ब्लॉक में सबसे अधिक 437 बालिकाओं का नामांकन स्कूलों में नहीं हैं। इन बालिकाओं की उम्र 11 से 14 साल के बीच है।
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तरबगंज एक मात्र ब्लॉक है जहां बालिकाओं के प्रवेश की स्थिति शहर से भी ठीक हैं। शहर में जहां 31 बालिकाओं ने प्रवेश नहीं लिया है तो तरबगंज में सिर्फ 12 बालिकाएं ही ऐसी हैं जिन्होंने प्रवेश नहीं लिया है। विभाग इन बालिकाओं को जोड़ने के लिए कन्या प्रवेश उत्सव के माध्यम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। जिन बालिकाओं का प्रवेश नहीं हुआ है, उनके परिवार की डिटेल के साथ मोबाइल नंबर तक की सूची तैयार की गई है। जिससे प्रवेश के लिए प्रेरित किया जा सके। (संवाद)
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शिक्षा पर बड़े स्तर पर खर्च होता है बजट
परिषदीय स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट से स्कूलों को संवारने के लिए 12 करोड़ से अधिक का बजट खर्च होता है। वहीं खेलकूद के लिए भी तीन करोड़ का बजट दिया जाता है। डीबीटी से 45 करोड़ रुपये तो एमडीएम पर तीस करोड़ के करीब का बजट खर्च होता है। इन सबके अलावा वेतन पर ही 40 करोड़ से अधिक का बजट हर माह खर्च हो रहा है। जूनियर हाईस्कूल में बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने, उनके प्रेरित करने के लिए ब्लाक स्तर पर नारी शिक्षा चौपाल, जीवन कौशल प्रशिक्षण आदि कई तरह की गतिविधियों का आयोजन होता है। इन सब आयोजनों पर भी एक करोड़ के करीब का बजट खर्च होता है। अब विभाग के लिए यह चुनौती है कि सभी बालिकाओं को स्कूल से जोड़कर शिक्षा देने का कार्य हो।
ब्लॉकों में प्रवेश न लेने वाली बालिकाओं पर एक नजर
बालिकाओं के स्कूल में प्रवेश न लेने वाला सर्वे चौंकाने वाला है। जिसमें बभनजोत ब्लॉक में 203, बेलसर में 38 बालिकाओं का प्रवेश नहीं हो सका है। छपिया में 29, इंटियाथोक में 295, मनकापुर में 130, मुजेहना में 282, शहर में 31, नवाबगंज में 219, पंडरीकृपाल में, 75, परसपुर में 241, हलधरमऊ में 130, कटरा बाजार में 101, वजीरगंज में 103, झंझरी में 136, रूपईडीह में 197, तरबगंज में 12, करनैलगंज में 437 बालिकाओं का प्रवेश ही नहीं हो सका है। अब कन्या प्रवेश उत्सव पर इन बालिकाओं का प्रवेश कराने का महाभियान शुरू होना है।
बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन कराने के लिए कन्या प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। स्कूल में नामांकन कराने वाली बालिकाओं के परिवार से संपर्क कर शत- प्रतिशत नामांकन कराया जाएगा। 30 सितंबर तक स्कूलों में नामांकन किए जाने की व्यवस्था है। अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी