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Gonda News: बिना अनुभव व लाइसेंस के चालक दौड़ा रहे स्कूली वाहन
Thu, 09 Apr 2026 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 09 Apr 2026 10:59 PM IST
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चालक की सीट के बगल में बैठे बच्चे।
गोंडा। जिले में स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। शिक्षा और परिवहन विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते अनुभवहीन चालक बिना अनुभव व वैध लाइसेंस के स्कूली वाहन दौड़ा रहे हैं। इनमें से अधिकांश वाहनों का इंश्योरेंस तक नहीं होता। ऐसे वाहनों में सवार स्कूली बच्चों की जान दाँव पर रहती है। पड़ताल में सामने आया कि कई स्कूल बसें बिना इंश्योरेंस, फिटनेस और प्रशिक्षित चालकों के ही बच्चों को घर से स्कूल व वापस घर पहुंचाने में जुटी हैं।
बृहस्पतिवार को एलबीएस चौराहे पर बच्चों को छोड़ने जा रही स्कूल बस संख्या यूपी 43 टी 5510 नंबर करीब 12.5 साल पुरानी है। इस बस के इंश्योरेंस की वैधता 24 सितंबर 2025 व प्रदूषण प्रमाण पत्र की अवधि 11 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी थी। चालक न तो वर्दी में था और न ही उसके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद बिना किसी खौफ के इस बस से स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा था।
इसी तरह एक अन्य वाहन चालक के पास भारी वाहन (हैवी) ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बाद भी वह स्कूली बस चला रहा था। सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ होने के बावजूद जिम्मेदारों ने न तो इस स्कूली वाहन की जांच की न ही बिना वैध लाइसेंस के वाहन चला रहे चालक को ही पकड़ा। शहर के सर्कुलर सड़क स्थित एक नामचीन स्कूल में बस की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चों को ई रिक्शा के सहारे स्कूल भेजना मजबूरी बन जाता है।
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अभिभावक शैलजा सिंह ने बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से कभी छोटी गाड़ी तो कभी बस भेज दी जाती है। कई बार कम उम्र के चालक भी वाहन चलाते हैं। स्कूल प्रबंधन से शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. शैलेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि स्कूली वाहनों के लिए तय मानकों का पालन अनिवार्य है। बिना प्रशिक्षित चालक, फिटनेस और इंश्योरेंस के वाहन बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उजागर हो रही स्कूल संचालकों की मनमानी
जागरूक अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल प्रबंधन कॉपी-किताब से लेकर ड्रेस तक की बिक्री खुद करवाते हैं तो फिर बस या स्कूली वैन सेवा बाहर से लेने को क्यों कहा जाता है। वह स्कूली वाहनों के स्वामियों से वाहन की फिटनेस रिपोर्ट क्यों नहीं मांगते। स्कूली व बाहरी वैन की किराया दर में काफी अंतर क्यों होता है। आखिर स्कूली वाहनों का किराया कौन तय करता है।
नियमित किया जा रहा निरीक्षण
नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूली वाहनों की जांच के लिए नियमित तौर पर निरीक्षण किया जा रहा है, जिन विद्यालयों ने अभी तक अपना विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है, उन्हें चेतावनी दी गई है। मानक विहीन स्कूली वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय होगी।
आरसी भारतीय, एआरटीओ
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बृहस्पतिवार को एलबीएस चौराहे पर बच्चों को छोड़ने जा रही स्कूल बस संख्या यूपी 43 टी 5510 नंबर करीब 12.5 साल पुरानी है। इस बस के इंश्योरेंस की वैधता 24 सितंबर 2025 व प्रदूषण प्रमाण पत्र की अवधि 11 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी थी। चालक न तो वर्दी में था और न ही उसके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद बिना किसी खौफ के इस बस से स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा था।
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इसी तरह एक अन्य वाहन चालक के पास भारी वाहन (हैवी) ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बाद भी वह स्कूली बस चला रहा था। सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ होने के बावजूद जिम्मेदारों ने न तो इस स्कूली वाहन की जांच की न ही बिना वैध लाइसेंस के वाहन चला रहे चालक को ही पकड़ा। शहर के सर्कुलर सड़क स्थित एक नामचीन स्कूल में बस की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चों को ई रिक्शा के सहारे स्कूल भेजना मजबूरी बन जाता है।
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अभिभावक शैलजा सिंह ने बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से कभी छोटी गाड़ी तो कभी बस भेज दी जाती है। कई बार कम उम्र के चालक भी वाहन चलाते हैं। स्कूल प्रबंधन से शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. शैलेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि स्कूली वाहनों के लिए तय मानकों का पालन अनिवार्य है। बिना प्रशिक्षित चालक, फिटनेस और इंश्योरेंस के वाहन बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उजागर हो रही स्कूल संचालकों की मनमानी
जागरूक अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल प्रबंधन कॉपी-किताब से लेकर ड्रेस तक की बिक्री खुद करवाते हैं तो फिर बस या स्कूली वैन सेवा बाहर से लेने को क्यों कहा जाता है। वह स्कूली वाहनों के स्वामियों से वाहन की फिटनेस रिपोर्ट क्यों नहीं मांगते। स्कूली व बाहरी वैन की किराया दर में काफी अंतर क्यों होता है। आखिर स्कूली वाहनों का किराया कौन तय करता है।
नियमित किया जा रहा निरीक्षण
नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूली वाहनों की जांच के लिए नियमित तौर पर निरीक्षण किया जा रहा है, जिन विद्यालयों ने अभी तक अपना विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है, उन्हें चेतावनी दी गई है। मानक विहीन स्कूली वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय होगी।
आरसी भारतीय, एआरटीओ