{"_id":"191960b7ae1da7849b9eadc35687dcb5","slug":"do-not-slip-from-the-sugarcane-farmers-trouble-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्ची न मिलने से गन्ना किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्ची न मिलने से गन्ना किसान परेशान
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केस एक-
मैजापुर चीनी मिल क्षेत्र के भदुवा तरहर निवासी शिव प्रसाद को अभी तक एक भी गन्ना पर्ची नहीं मिली है। पेड़ी गन्ने के खेत में गेहूं की बोआई करने के लिए मजबूरन उन्होेंने परसपुर क्षेत्र में एक ट्रॉली गन्ना कम रेट पर माफिया के हाथों बेच दिया। उनका कहना था कि चीनी मिल चलने के एक माह बाद तक उन्हें पर्ची नहीं मिली है।
केस दो -
ग्राम भदुवा तरहर के किसान सुरेश तिवारी का कहना है कि पूरे सीजन में उन्हें रविवार को एक पर्ची मिली है, लेकिन अब उसका फायदा नहीं है, क्योंकि गेहूं की बोआई का समय निकल चुका है। अब पर्ची मिली है जबकि उनके पास काफी गन्ना लगा है।
गन्ना किसान पर्ची न मिलने से परेशान हैं। काश्तकार पैसे की जरूरतों को देखते हुए माफिया को कम रेट में अपना गन्ना बेचने को मजबूर हैं। कई क्षेत्रों में गन्ना माफिया हावी हैं, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा कर उनका गन्ना कम कीमत में खरीद रहे हैं।
विज्ञापन
जिले में करीब 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जा रही है। गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। पिछले रबी व खरीफ सीजन में मौसम की दोहरी मार से बेहाल किसानों को गन्ने की फसल से भी राहत नहीं मिल रही है।
काश्तकारों किसानों को उम्मीद थी कि उनका गन्ना समय से बिक गया तो उनकी कुछ जरूरतें पूरी हो जाएंगी। लेकिन चीनी मिल अफसरों व गन्ना माफिया की साठगांठ से किसानों के सपनों पर एक बार फिर पानी फिरता नजर आ रहा है।
चीनी मिलों में पेराई शुरू हुए एक माह से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक किसी किसान को एक तो किसी को अभी तक एक भी गन्ने की पर्ची नही मिल सकी है।
जानकार बताते हैं कि गन्ना माफिया व चीनी मिल अधिकारियों में साठगांठ होने से सामान्य किसानों को समय से पर्ची नहीं मिल पा रही है। गन्ना न बिक पाने से किसान परेशान हैं।
गेहूं की बोआई के लिए समय से किसानों के खेत खाली न हो पाने से काश्तकार समय से गेहूं की बोआई नहीं कर सके। कई किसानों ने प्लान कर रखा था कि वे अपने पेड़ी का गन्ना बेचकर खेत खाली होने पर उसमें गेहूं की बोआई करेंगे, लेकिन समय से गन्ना न बिक पाने से गेहूं की बोआई नहीं हो सकी।
विज्ञापन
मैजापुर चीनी मिल क्षेत्र के भदुवा तरहर निवासी शिव प्रसाद को अभी तक एक भी गन्ना पर्ची नहीं मिली है। पेड़ी गन्ने के खेत में गेहूं की बोआई करने के लिए मजबूरन उन्होेंने परसपुर क्षेत्र में एक ट्रॉली गन्ना कम रेट पर माफिया के हाथों बेच दिया। उनका कहना था कि चीनी मिल चलने के एक माह बाद तक उन्हें पर्ची नहीं मिली है।
केस दो -
ग्राम भदुवा तरहर के किसान सुरेश तिवारी का कहना है कि पूरे सीजन में उन्हें रविवार को एक पर्ची मिली है, लेकिन अब उसका फायदा नहीं है, क्योंकि गेहूं की बोआई का समय निकल चुका है। अब पर्ची मिली है जबकि उनके पास काफी गन्ना लगा है।
विज्ञापन
गन्ना किसान पर्ची न मिलने से परेशान हैं। काश्तकार पैसे की जरूरतों को देखते हुए माफिया को कम रेट में अपना गन्ना बेचने को मजबूर हैं। कई क्षेत्रों में गन्ना माफिया हावी हैं, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा कर उनका गन्ना कम कीमत में खरीद रहे हैं।
विज्ञापन
जिले में करीब 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जा रही है। गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। पिछले रबी व खरीफ सीजन में मौसम की दोहरी मार से बेहाल किसानों को गन्ने की फसल से भी राहत नहीं मिल रही है।
काश्तकारों किसानों को उम्मीद थी कि उनका गन्ना समय से बिक गया तो उनकी कुछ जरूरतें पूरी हो जाएंगी। लेकिन चीनी मिल अफसरों व गन्ना माफिया की साठगांठ से किसानों के सपनों पर एक बार फिर पानी फिरता नजर आ रहा है।
चीनी मिलों में पेराई शुरू हुए एक माह से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक किसी किसान को एक तो किसी को अभी तक एक भी गन्ने की पर्ची नही मिल सकी है।
जानकार बताते हैं कि गन्ना माफिया व चीनी मिल अधिकारियों में साठगांठ होने से सामान्य किसानों को समय से पर्ची नहीं मिल पा रही है। गन्ना न बिक पाने से किसान परेशान हैं।
गेहूं की बोआई के लिए समय से किसानों के खेत खाली न हो पाने से काश्तकार समय से गेहूं की बोआई नहीं कर सके। कई किसानों ने प्लान कर रखा था कि वे अपने पेड़ी का गन्ना बेचकर खेत खाली होने पर उसमें गेहूं की बोआई करेंगे, लेकिन समय से गन्ना न बिक पाने से गेहूं की बोआई नहीं हो सकी।