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Gonda News: महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य मेडिकल कॉलेज में डीएनबी की होगी पढ़ाई

Mon, 24 Mar 2025 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 24 Mar 2025 11:45 PM IST
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DNB will be taught in Maharaja Devi Baksh Singh State Medical College
गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में डीएनबी (डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड) शुरू करने की तैयारी की जा रही है। डीएनबी कोर्स शुरू करने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीआई) को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है। स्वीकृति मिलने पर परास्नातक कोर्स एमएस व एमडी के समकक्ष डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी।
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मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में एमबीबीएस की 100 सीटों पर पहले बैच की पढ़ाई चल रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बड़ी संख्या में सिर्फ एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टर सेवा दे रहे हैं, इनके पास किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञ की डिग्री नहीं है। विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज में विभिन्न विभागों में डीएनबी कोर्स शुरू किया जाना है, जिससे डॉक्टर डिप्लोमा कर विशेषज्ञता प्राप्त कर सकें। डीएनबी कोर्स के प्रस्ताव के साथ प्रति विभाग के हिसाब से निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। इसमें भी मेरिट के अनुसार डॉक्टरों को दाखिला मिल सकेगा।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि डीएनबी कोर्स शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रस्ताव भेजा जाना है। स्वीकृति मिलने के बाद नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर हो सकेगी। (संवाद)
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कोर्स शुरू होने की प्रक्रिया
अप्रैल के पहले सप्ताह में ऑनलाइन आवेदन करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद एनबीई दिल्ली की टीम कॉलेज का निरीक्षण करेगी। इसके आधार पर सीटों की संख्या निर्धारित की जाएगी। सीटों के स्वीकृति मिलने के आधार पर डॉक्टरों के नए बैच की शुरुआत हो सकेगी।


पीजी के डिग्री व डिप्लोमा में यह होता है अंतर
- डिप्लोमा कोर्स दो वर्ष में पूरा होता है।
- डिग्री कोर्सों में तीन वर्ष का समय लगता है।
- दोनों की फीस में अंतर रहता है।
- डिप्लोमा चिकित्सक मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं बनते, जबकि डिग्रीधारक असिस्टेंट प्रोफेसर या विभागाध्यक्ष बन सकते हैं

- डिप्लोमा वाले मेडिकल कॉलेजों में पढ़ा नहीं सकते, किसी भी विषय पर रिसर्च नहीं कर सकते।
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