{"_id":"635574a7429e2351ee1edff7","slug":"diwali-gonda-flud-gonda-news-lko6541855100","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंधेरे में बीतेगा दीपपर्व, मन में दर्द लेकर मनाएंगे त्योहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंधेरे में बीतेगा दीपपर्व, मन में दर्द लेकर मनाएंगे त्योहार
विज्ञापन
गोंडा के करनैलगंज में बांध पर डरा जमाए बाढ़ पीड़ित। -संवाद
- फोटो : GONDA
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ में सबकुछ गवां चुके माझा के लोगों की दीपावली अंधेरे में ही बीतेगी। मन में बाढ़ की तबाही का दर्द लेकर दीपावली त्योहार मनाएंगे। इनके पास न अपना आशियाना, न खाने का ठिकाना है। बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। घर में रखा अनाज, कपड़े व गृहस्थी के सामान सहित खेतों में लहलहाती मक्का, धान, परवल, गोभी, भिंडी की फसल को सरयू बहा ले गई। कुछ ऐसा ही दर्द उन बाढ़ पीड़ितों का है, जिन्हें खेत में लगी लहलहाती मेहनत व पसीने से सींची गई फसल देख कर यह अंदाजा नहीं था कि ऐसा भी कोई दौर आएगा कि अक्टूबर में बाढ़ जैसी कोई आपदा आ सकती है।
बाढ़ करीब एक हजार किसानों के मुंह का निवाला सरयू के बहाव में बहा ले गई। गोंडा व जिले से सटी ग्राम पंचायतों नकहरा, परसावल, कमियार, बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, नउवन पुरवा, चंदापुर किटौली, पसका, इकनिया मांझा, गोडियन पुरवा गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीणों के सपने पानी हो गए। लगातार दूसरी बार अक्टूबर माह में आई बाढ़ जैसी आपदा आने का अंदेशा नहीं था। किसानों की करीब 15 सौ हेक्टेयर भूमि पर लगी धान, मक्का व सब्जी में परवल, गोभी, धनिया, मूली, भिंडी, आलू की फसल घाघरा के तेज बहाव में बह गई। गांव के गांव जलमग्न हो गए। ग्रामीण अपने जान की सुरक्षा के लिए बंधे पर शरण लेकर रह रहे हैं। कई गांवों में अभी तक पानी नहीं निकला है। ग्रामीण अभी भी बांध पर ही बने हुए हैं। ऐसे में उनके लिए दीपावली का त्योहार महज जुबानी रह गया है।
ग्राम नकहरा निवासी मनोज कुमार, रेनू, रोमा देवी, अनीता, नेहा, ननकई, सावित्री देवी तथा रायपुर के धनीराम, माधव, बिट्टन देवी, गुड़िया, बच्चाराम, समोखन, झुरई, हरिशरण आदि का कहना है कि गांव में दलदल है घर के आसपास पानी भरा है। खेत खाली है, फसल बह गई, खाने के लाले हैं, राशन व ईंधन नही है कैसे दीवाली मनाएंगे। अब तो अपने खेत की फसल काटने के बजाय दूसरे के खेत मे फसल काटने की मजदूरी करने की मजबूरी आ गई है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ करीब एक हजार किसानों के मुंह का निवाला सरयू के बहाव में बहा ले गई। गोंडा व जिले से सटी ग्राम पंचायतों नकहरा, परसावल, कमियार, बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, नउवन पुरवा, चंदापुर किटौली, पसका, इकनिया मांझा, गोडियन पुरवा गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीणों के सपने पानी हो गए। लगातार दूसरी बार अक्टूबर माह में आई बाढ़ जैसी आपदा आने का अंदेशा नहीं था। किसानों की करीब 15 सौ हेक्टेयर भूमि पर लगी धान, मक्का व सब्जी में परवल, गोभी, धनिया, मूली, भिंडी, आलू की फसल घाघरा के तेज बहाव में बह गई। गांव के गांव जलमग्न हो गए। ग्रामीण अपने जान की सुरक्षा के लिए बंधे पर शरण लेकर रह रहे हैं। कई गांवों में अभी तक पानी नहीं निकला है। ग्रामीण अभी भी बांध पर ही बने हुए हैं। ऐसे में उनके लिए दीपावली का त्योहार महज जुबानी रह गया है।
विज्ञापन
ग्राम नकहरा निवासी मनोज कुमार, रेनू, रोमा देवी, अनीता, नेहा, ननकई, सावित्री देवी तथा रायपुर के धनीराम, माधव, बिट्टन देवी, गुड़िया, बच्चाराम, समोखन, झुरई, हरिशरण आदि का कहना है कि गांव में दलदल है घर के आसपास पानी भरा है। खेत खाली है, फसल बह गई, खाने के लाले हैं, राशन व ईंधन नही है कैसे दीवाली मनाएंगे। अब तो अपने खेत की फसल काटने के बजाय दूसरे के खेत मे फसल काटने की मजदूरी करने की मजबूरी आ गई है। (संवाद)
विज्ञापन