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दिव्यांगों ने हौसले से लिखी कामयाबी की इबारत
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पूनम।
- फोटो : GONDA
गोंडा। हिम्मत और हौसला हो तो तरक्की के आड़े कोई रोड़ा नही बन सकता। कुछ ऐसा ही जिले के दिव्यांग बच्चों ने हौसले से उड़ान भरी तो पूरी दुनिया ही मुठ्ठी में कर ली। पूर्ण दृष्टिहीन होते हुए भी विश्व स्तरीय जूडो प्रतियोगिता में गोल्ड हासिल कर राजन बाबू मिसाल बने तो रोशनी ने अपने आवाज के दम से नई पहचान बनाई। दिव्यांगता को मात दे परमानदं शुक्ल, शिवानंद शुक्ल, विवेकानंद शुक्ल और पूनम शुक्ल ने कामयाबी हासिल की। अब यह जिले के दिव्यांग बच्चों के लिए मिसाल बन चुके हैं। दिव्यांग बच्चों को नया मुकाम देने के लिए समेकित शिक्षा समन्वयक राजेश सिंह की कोशिशें रंग दिखा रही हैं। समेकित शिक्षा के कैंप से निकल कर अब यह बच्चे इंटर और डिग्री कॉलेजों में तरक्की के सपनों हासिल कर रहे हैं।
जिले में दिव्यांग बच्चों के जुनून और जज्बों ने कई मिसाल पेश किए हैं। कई बच्चे की गिनती जिले के सितारों में गिना जाता है तो कई आज भी अपनी प्रतिभा का लोहा बनवा रहे हैं। दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने में दिव्यांग बच्चों के तरक्की की राह काफी कारगर साबित हो रही है। जिले में 4616 दिव्यांग बच्चे चिह्नित हैं, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम समेकित शिक्षा अभियान से चल रहा है। जिले के एक दर्जन से अधिक दिव्यांग बच्चों ने अपनी सफलता से साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। दिव्यांगता पर उनकी इच्छाशक्ति भारी पड़ रही है। दिव्यांग बच्चों को नई राह दिखा रहे समेकित शिक्षक समन्वयक राजेश सिंह कहते हैं कि दिव्यांग बच्चों में सीखने और कुछ करने की इच्छा शक्ति अन्य से अधिक रहती है। दावा किया कि बस जरूरत है कि उन्हें सही राह दिखाई जाए और समय से शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास हो।
वियतनाम में झंडा बुलंद किया, अब शिक्षक बनने की तैयारी में
हलधरमऊ के हडियागाढा गांव के जन्म से पूर्ण दृष्टिहीन राजन बाबू ने वर्ष 2017 में वियतनाम में अतंराष्ट्रीय ओलंपिक में जूडो में अपनी प्रतिभा दिखाई और गोल्ड हासिल किया। खेल के साथ ही शिक्षा में आगे कदम बढ़ाए और बीएड की डिग्री हासिल की है। अब वह टीईटी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। राजन बाबू कहते हैं कि दिव्यांगता को कभी सोचने की जरूरत नही है बस जो सीखने की इच्छा हो और क्षमता हो उसे सीखते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समेकित शिक्षा के कैंप से जूनियर हाईस्कूल तक की शिक्षा हासिल करने के बाद लखनऊ के राजकीय स्पर्श दृष्टि बाधित इंटर कॉलेज से इंटर तक की शिक्षा हासिल किया और बीएड डिप्लोमा करने के बाद अब टीईटी की तैयारी कर रहे हैं।
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एक ही परिवार के दिव्यांग भाई-बहनों ने भी हासिल किया मुकाम
एक ही परिवार के तीन बेटी व एक बेटी जन्म से ही दिव्यंाग थे। परिवार के लोग तो चिंतित थे ही लोग भी उनसे आंखें फेरे हुए थे। लेकिन चारो बच्चों ने शिक्षा हासिल करके कामयाबी हासिल की तो हर कोई अब नाज कर रहा है। हरसिंहपुर गांव के राम अर्जुन प्रसाद शुक्ल के बेटे परमानंद शुक्ल, शिवानंद शुक्ल, विवेकानंद शुक्ल व बेटी पूनम शुक्ल जन्म से ही दिव्यांग थे। लेकिन बच्चों ने हिम्मत नहीं हारी और सफलता की ओर कदम बढ़ाए तो आगे ही बढ़ते गए। परमानंद ने बीएड बीआई की शिक्षा हासिल की। शिवानंद ने इंटर पास करके आगे कदम बढ़ाया है। विवेकानंद व पूनम लखनऊ में राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज में इंटर की पढ़ाई कर रही हैं। दोनो ताइक्वांडो के अच्छे खिलाड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो प्रतियोगिता में पूनम ने गोल्ड तो विवेकानंद ने बालक वर्ग में सिल्वर हासिल किया।
आवाज के जादू से रोशनी को मंचों पर मिला सम्मान
तरबगंज की रोशनी दूबे समेकित शिक्षा के कैंप में पढ़ाई कर रही है। दोनो आंखों से वह देख तो नहीं सकती है लेकिन उसकी आवाज के जादू का हर कोई कायल है। ढोलक पर थिरकती ऊंगलियों की थाप और सुरीले आवाज से कई मंचों पर सम्मान हासिल कर चुकी हैं। पिता दया शंकर दूबे ने बताया कि जन्म के तीन साल बाद उन्हें पता चल पाया कि वह आंखों से देख नहीं सकती है। अब वह समेकित शिक्षा के शिविर में शिक्षा हासिल कर रही है।
दिव्यांगजनों ने खुद की मदद के लिए बनाई आत्मबोध संस्था
छपिया के दिव्यांगजनों ने खुद की मदद के लिए आत्मबोध संस्था बनाई है। संस्था के दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि दिव्यांगजनों की मदद के लिए हम लोगों ने एकजुट होकर संस्था बनाई है और 10 दिव्यंागजन एक साथ होकर दिव्यांगजनों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। संस्था में शेषराम गुप्त, अवधेश शर्मा, ओम प्रकाश जासवाल, कन्हैय्यालाल, प्रतिमा, दशरथ, मोहम्मद कैय्यूम समेत कई दिव्यांगजन हैं जो एक साथ होकर दिव्यांग जनों के प्रमाण पत्र बनवाने, योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रयास करते हैं। अब तक 168 शिविर लगा चुके हैं।
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जिले में दिव्यांग बच्चों के जुनून और जज्बों ने कई मिसाल पेश किए हैं। कई बच्चे की गिनती जिले के सितारों में गिना जाता है तो कई आज भी अपनी प्रतिभा का लोहा बनवा रहे हैं। दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने में दिव्यांग बच्चों के तरक्की की राह काफी कारगर साबित हो रही है। जिले में 4616 दिव्यांग बच्चे चिह्नित हैं, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम समेकित शिक्षा अभियान से चल रहा है। जिले के एक दर्जन से अधिक दिव्यांग बच्चों ने अपनी सफलता से साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। दिव्यांगता पर उनकी इच्छाशक्ति भारी पड़ रही है। दिव्यांग बच्चों को नई राह दिखा रहे समेकित शिक्षक समन्वयक राजेश सिंह कहते हैं कि दिव्यांग बच्चों में सीखने और कुछ करने की इच्छा शक्ति अन्य से अधिक रहती है। दावा किया कि बस जरूरत है कि उन्हें सही राह दिखाई जाए और समय से शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास हो।
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वियतनाम में झंडा बुलंद किया, अब शिक्षक बनने की तैयारी में
हलधरमऊ के हडियागाढा गांव के जन्म से पूर्ण दृष्टिहीन राजन बाबू ने वर्ष 2017 में वियतनाम में अतंराष्ट्रीय ओलंपिक में जूडो में अपनी प्रतिभा दिखाई और गोल्ड हासिल किया। खेल के साथ ही शिक्षा में आगे कदम बढ़ाए और बीएड की डिग्री हासिल की है। अब वह टीईटी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। राजन बाबू कहते हैं कि दिव्यांगता को कभी सोचने की जरूरत नही है बस जो सीखने की इच्छा हो और क्षमता हो उसे सीखते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समेकित शिक्षा के कैंप से जूनियर हाईस्कूल तक की शिक्षा हासिल करने के बाद लखनऊ के राजकीय स्पर्श दृष्टि बाधित इंटर कॉलेज से इंटर तक की शिक्षा हासिल किया और बीएड डिप्लोमा करने के बाद अब टीईटी की तैयारी कर रहे हैं।
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एक ही परिवार के दिव्यांग भाई-बहनों ने भी हासिल किया मुकाम
एक ही परिवार के तीन बेटी व एक बेटी जन्म से ही दिव्यंाग थे। परिवार के लोग तो चिंतित थे ही लोग भी उनसे आंखें फेरे हुए थे। लेकिन चारो बच्चों ने शिक्षा हासिल करके कामयाबी हासिल की तो हर कोई अब नाज कर रहा है। हरसिंहपुर गांव के राम अर्जुन प्रसाद शुक्ल के बेटे परमानंद शुक्ल, शिवानंद शुक्ल, विवेकानंद शुक्ल व बेटी पूनम शुक्ल जन्म से ही दिव्यांग थे। लेकिन बच्चों ने हिम्मत नहीं हारी और सफलता की ओर कदम बढ़ाए तो आगे ही बढ़ते गए। परमानंद ने बीएड बीआई की शिक्षा हासिल की। शिवानंद ने इंटर पास करके आगे कदम बढ़ाया है। विवेकानंद व पूनम लखनऊ में राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज में इंटर की पढ़ाई कर रही हैं। दोनो ताइक्वांडो के अच्छे खिलाड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो प्रतियोगिता में पूनम ने गोल्ड तो विवेकानंद ने बालक वर्ग में सिल्वर हासिल किया।
आवाज के जादू से रोशनी को मंचों पर मिला सम्मान
तरबगंज की रोशनी दूबे समेकित शिक्षा के कैंप में पढ़ाई कर रही है। दोनो आंखों से वह देख तो नहीं सकती है लेकिन उसकी आवाज के जादू का हर कोई कायल है। ढोलक पर थिरकती ऊंगलियों की थाप और सुरीले आवाज से कई मंचों पर सम्मान हासिल कर चुकी हैं। पिता दया शंकर दूबे ने बताया कि जन्म के तीन साल बाद उन्हें पता चल पाया कि वह आंखों से देख नहीं सकती है। अब वह समेकित शिक्षा के शिविर में शिक्षा हासिल कर रही है।
दिव्यांगजनों ने खुद की मदद के लिए बनाई आत्मबोध संस्था
छपिया के दिव्यांगजनों ने खुद की मदद के लिए आत्मबोध संस्था बनाई है। संस्था के दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि दिव्यांगजनों की मदद के लिए हम लोगों ने एकजुट होकर संस्था बनाई है और 10 दिव्यंागजन एक साथ होकर दिव्यांगजनों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। संस्था में शेषराम गुप्त, अवधेश शर्मा, ओम प्रकाश जासवाल, कन्हैय्यालाल, प्रतिमा, दशरथ, मोहम्मद कैय्यूम समेत कई दिव्यांगजन हैं जो एक साथ होकर दिव्यांग जनों के प्रमाण पत्र बनवाने, योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रयास करते हैं। अब तक 168 शिविर लगा चुके हैं।

विवेकानंद।- फोटो : GONDA

अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी राजनबाबू- फोटो : GONDA