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Gonda News: बिना हेलमेट वाले बाइक चालकों को काट रहा कौवा, 12 जख्मी
Sun, 25 Feb 2024 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 25 Feb 2024 11:43 PM IST
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वजीरगंज/गोंडा। झूठ बोले कौवा काटे...गाने के बोल कई दफा सुने गए, लेकिन क्षेत्र के कादीपुर गांव के एक दर्जन से अधिक लोगों को कौवा बिना झूठ बोले ही काट चुका है।
कादीपुर निवासी बुजुर्ग किसान कौशल तिवारी ने बताया कि एक कौवा मझारा-चंदापुर मार्ग पर कोंडर चौराहे से कादीपुर गांव के बीच में बाइकसवारों के लिए आफत बना हुआ है।
बिना हेलमेट वाले बाइक चालकों के सिर पर अचानक कौवा आकर बैठता है और चोंच से कान में काटकर उड़ जाता है।
अचानक होने वाले कौवे के हमले में बाइकसवार अनियंत्रित होकर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। वहीं अचानक कौवे के सिर बैठना भी अपशकुन की भ्रांति है। सिर पर कौवे के बैठने पर बाइक सवार किसी के माध्यम से अनहोनी की सूचना देकर टोटका करते हैं।
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अभी तक कृषि स्नातक के छात्र अमन तिवारी, कृषक रामकुमार, कारोबारी अजय तिवारी, हरिश्चंद तिवारी व रामबक्स निवासी डिहवा के अतिरिक्त कोंडर के प्रधान प्रतिनिधि बिपिन सिंह को कौवा काट चुका है। कौशल के अनुसार, मझारा-चंदापुर मार्ग के बाइक सवारों को स्थानीय लोग सतर्कता से आने-जाने की सलाह दे रहे हैं। बीच में दो महीने तक कोई चोटिल नहीं हुआ। ऐसा लगा कि वह उड़कर चला गया, लेकिन एक सप्ताह में तीन लोगों को फिर से काटने के बाद गांव वाले परेशान हैं।
बहेलिये ने दूसरे कौवे को मार गिराया
कादीपुर के अमन और अजय ने बताया कि गांववालों ने एक बहेलिये को बुलाया। बहेलिया इदरीश शिकारी भी है। उसने कौवे पर निशाना लगाया, लेकिन जिस कौवे को मारना था, उसके स्थान पर दूसरे का शिकार हो गया। पहले तो लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन बाद में कुछ और राहगीरों को काटने की घटना के बाद पता चला कि वह अभी जीवित है।
अपशकुन माना जाता है कौवे का बैठना
बालेश्वरगंज बाजार के निकट भरहापारा गांव निवासी पंडित ओमप्रकाश शास्त्री की मानें तो सनातन परंपरा में कौवे का स्थान विशिष्ट है। काग को पूर्वजों का दर्जा दिया गया है। इससे इतर एक और भ्रांति है कि कौवे का सिर या कंधे पर बैठना अपशकुन भी माना जाता है। किसी भी व्यक्ति के सिर पर जब कौवा बैठ जाता है तो जन या धन की हानि हो सकती है। मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा भी जा सकती है। इस दोष-विशेख को समाप्त करने के लिए संबंधित के रक्तसंबंधियों को आकस्मिक मृत्यु की सूचना दी जाती है। ऐसे में परिवारीजन और रिश्तेदार वियोग में रोते हैं, जिससे दोष समाप्त मान लिया जाता है। फिर दोबारा उस व्यक्ति के जीवित रहने की सूचना दी जाती है। कुछ लोग कौवों को भोज भी कराते हैं।
चिकित्सक बोले, रैबीज का नहीं रहता खतरा
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आदित्य वर्मा ने बताया कि जानवरों से होने वाले रैबीज संक्रमण का खतरा केवल स्तनधारी जानवरों के लार से ही होता है। पक्षियों के काटने से यह बीमारी नहीं फैलती। इनमें कौवा भी है। कौवे के काटने पर एंटीसेप्टिक ट्यूब, मलहम अथवा डेटॉल का प्रयोग उचित लाभ प्रदान करता है। एहतियातन टिटबैक भी लगवा सकते हैं, लेकिन आवश्यक नहीं है।
शिकायत मिली है, मौके पर जाकर देखेंगे
वन क्षेत्राधिकारी-टिकरी रेंज विनोद नायक के अनुसार वजीरगंज क्षेत्र में एक कौवे द्वारा कई बाइक सवारों के कान में काटने की शिकायत मिली है। कादीपुर और कोंडर गांव के लोगों ने सूचना दी है कि कौवा अचानक आता है और कान में काटकर फिर उड़ जाता है। वन विभाग की टीम मौके पर जाएगी।
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कादीपुर निवासी बुजुर्ग किसान कौशल तिवारी ने बताया कि एक कौवा मझारा-चंदापुर मार्ग पर कोंडर चौराहे से कादीपुर गांव के बीच में बाइकसवारों के लिए आफत बना हुआ है।
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बिना हेलमेट वाले बाइक चालकों के सिर पर अचानक कौवा आकर बैठता है और चोंच से कान में काटकर उड़ जाता है।
अचानक होने वाले कौवे के हमले में बाइकसवार अनियंत्रित होकर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। वहीं अचानक कौवे के सिर बैठना भी अपशकुन की भ्रांति है। सिर पर कौवे के बैठने पर बाइक सवार किसी के माध्यम से अनहोनी की सूचना देकर टोटका करते हैं।
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अभी तक कृषि स्नातक के छात्र अमन तिवारी, कृषक रामकुमार, कारोबारी अजय तिवारी, हरिश्चंद तिवारी व रामबक्स निवासी डिहवा के अतिरिक्त कोंडर के प्रधान प्रतिनिधि बिपिन सिंह को कौवा काट चुका है। कौशल के अनुसार, मझारा-चंदापुर मार्ग के बाइक सवारों को स्थानीय लोग सतर्कता से आने-जाने की सलाह दे रहे हैं। बीच में दो महीने तक कोई चोटिल नहीं हुआ। ऐसा लगा कि वह उड़कर चला गया, लेकिन एक सप्ताह में तीन लोगों को फिर से काटने के बाद गांव वाले परेशान हैं।
बहेलिये ने दूसरे कौवे को मार गिराया
कादीपुर के अमन और अजय ने बताया कि गांववालों ने एक बहेलिये को बुलाया। बहेलिया इदरीश शिकारी भी है। उसने कौवे पर निशाना लगाया, लेकिन जिस कौवे को मारना था, उसके स्थान पर दूसरे का शिकार हो गया। पहले तो लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन बाद में कुछ और राहगीरों को काटने की घटना के बाद पता चला कि वह अभी जीवित है।
अपशकुन माना जाता है कौवे का बैठना
बालेश्वरगंज बाजार के निकट भरहापारा गांव निवासी पंडित ओमप्रकाश शास्त्री की मानें तो सनातन परंपरा में कौवे का स्थान विशिष्ट है। काग को पूर्वजों का दर्जा दिया गया है। इससे इतर एक और भ्रांति है कि कौवे का सिर या कंधे पर बैठना अपशकुन भी माना जाता है। किसी भी व्यक्ति के सिर पर जब कौवा बैठ जाता है तो जन या धन की हानि हो सकती है। मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा भी जा सकती है। इस दोष-विशेख को समाप्त करने के लिए संबंधित के रक्तसंबंधियों को आकस्मिक मृत्यु की सूचना दी जाती है। ऐसे में परिवारीजन और रिश्तेदार वियोग में रोते हैं, जिससे दोष समाप्त मान लिया जाता है। फिर दोबारा उस व्यक्ति के जीवित रहने की सूचना दी जाती है। कुछ लोग कौवों को भोज भी कराते हैं।
चिकित्सक बोले, रैबीज का नहीं रहता खतरा
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आदित्य वर्मा ने बताया कि जानवरों से होने वाले रैबीज संक्रमण का खतरा केवल स्तनधारी जानवरों के लार से ही होता है। पक्षियों के काटने से यह बीमारी नहीं फैलती। इनमें कौवा भी है। कौवे के काटने पर एंटीसेप्टिक ट्यूब, मलहम अथवा डेटॉल का प्रयोग उचित लाभ प्रदान करता है। एहतियातन टिटबैक भी लगवा सकते हैं, लेकिन आवश्यक नहीं है।
शिकायत मिली है, मौके पर जाकर देखेंगे
वन क्षेत्राधिकारी-टिकरी रेंज विनोद नायक के अनुसार वजीरगंज क्षेत्र में एक कौवे द्वारा कई बाइक सवारों के कान में काटने की शिकायत मिली है। कादीपुर और कोंडर गांव के लोगों ने सूचना दी है कि कौवा अचानक आता है और कान में काटकर फिर उड़ जाता है। वन विभाग की टीम मौके पर जाएगी।