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कस्तूरबा स्कूलों के 176 कर्मियों की नौकरी पर संकट
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गोंडा में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय पंड़री कृपाल।
- फोटो : GONDA
गोंडा। बेसिक शिक्षा के कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों के 176 कर्मियों की नौकरी पर संकट बढ़ गया है। माह मार्च में ही इन कर्मियों की संविदा नवीनीकरण हो जाना चाहिए था। अभी तक किसी कार्मिक का नवीनीकरण नहीं हो सका है। ऐसे में उनकी सेवाएं प्रभावित चल रही हैं।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा के आदेश पर भी कर्मियों का मानदेय जारी नहीं हो सका है, मई व जून माह का मानदेय फंसा हुआ है। माना जा रहा है कि विभाग में अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद का सीधा असर कर्मियों की सेवाओं पर पड़ रहा है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों का संचालन बेसिक शिक्षा विभाग 16 ब्लाकों और एक वन क्षेत्र में कर रहा है। कर्मियों का नवीनीकरण हर साल के मार्च महीने में होता आ रहा है। इस बार भी माह मार्च तक हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक नवीनीकरण नहीं हो सका है।
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इसके पीछे कई तरह की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं और महानिदेशक के दरबार तक मामला पहुंच चुका है। नवीनीकरण न होने से 176 कर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि नवीनीकरण न होने से स्कूलों का संचालन भी प्रभावित होगा। यही नहीं 97 लाख की सामग्री आपूर्ति में घपले की जांच के बहाने ही एक माह से मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा था।
अब जांच भी पूरी हो गई है जिम्मेदारी तय होकर रिपोर्ट जारी हो चुकी है। इसके बाद भी उन लोगों का मानदेय रुका है जिनका सामग्री आपूर्ति से कोई लेना देना नहीं है। कर्मियों का नवीनीकरण न किए जाने और मानदेय भुगतान न होने से कर्मियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मियों का तो कहना है कि जानबूझकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जबकि विभागीय अधिकारियों की मानें तो जांच होने से देरी हो रही है।
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महानिदेशक स्कूली शिक्षा के आदेश पर भी कर्मियों का मानदेय जारी नहीं हो सका है, मई व जून माह का मानदेय फंसा हुआ है। माना जा रहा है कि विभाग में अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद का सीधा असर कर्मियों की सेवाओं पर पड़ रहा है।
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कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों का संचालन बेसिक शिक्षा विभाग 16 ब्लाकों और एक वन क्षेत्र में कर रहा है। कर्मियों का नवीनीकरण हर साल के मार्च महीने में होता आ रहा है। इस बार भी माह मार्च तक हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक नवीनीकरण नहीं हो सका है।
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इसके पीछे कई तरह की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं और महानिदेशक के दरबार तक मामला पहुंच चुका है। नवीनीकरण न होने से 176 कर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि नवीनीकरण न होने से स्कूलों का संचालन भी प्रभावित होगा। यही नहीं 97 लाख की सामग्री आपूर्ति में घपले की जांच के बहाने ही एक माह से मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा था।
अब जांच भी पूरी हो गई है जिम्मेदारी तय होकर रिपोर्ट जारी हो चुकी है। इसके बाद भी उन लोगों का मानदेय रुका है जिनका सामग्री आपूर्ति से कोई लेना देना नहीं है। कर्मियों का नवीनीकरण न किए जाने और मानदेय भुगतान न होने से कर्मियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मियों का तो कहना है कि जानबूझकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जबकि विभागीय अधिकारियों की मानें तो जांच होने से देरी हो रही है।