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कागजों पर खर्च हो गए दस करोड़, नहीं दूर हो सका कुपोषण
amarujala
Updated Wed, 19 Apr 2017 11:10 PM IST
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सपा सरकार के समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी हौसला पोषण योजना के संचालन पर अफसरों ने बट्टा लगा दिया। सरकार ने जिले के 2913 आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस योजना के संचालन के लिए दो किश्तों मे दस करोड़ रुपये का आवंटन कर कुपोषण के खिलाफ जंग का ऐलान किया था लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण यह धनराशि योजना के संचालन के लिए योजना बनाने में ही खर्च हो गई। अफसरों ने कागजों पर योजना का संचालन कर पैसे का बंदरबांट कर लिया।
समाजवादी पार्टी की सरकार के मुखिया रहे अखिलेश यादव ने आगंनबाडी़ केंद्रों पर पंजीकृत अतिकुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार उपलब्ध कराकर उन्हे कुपोषण से मुक्त करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को पूरा करने के लिए जुलाई 2016 में जिले के 2913 आगंनबाड़ी केंद्रों पर हौसला पोषण योजना का शुभारंभ किया गया था। शासन ने दो किश्तों में जिले को दस करोड़ रुपये की धनराशि का आवंटन किया था।
इस धनराशि से केंद्रों पर पंजीकृत अतिकुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मीनू के मुताबिक भोजन, फल, दूध व घी उपलब्ध कराये जाने का निर्देश था। योजना के संचालन की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्री व संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान को सौंपी गई थी। संचालन के लिए दोनों का संयुक्त खाता बैंकों में खोला जाना था लेकिन अफसरों की शिथिलता के चलते यह योजना कागजों पर ही दम तोड़ गई।
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विभाग के अफसरों ने बैंको में खाता तो खुलवा दिया लेकिन उसके बाद इस योजना की मॉनिटरिंग करना भूल गए। अपवाद के रूप में कुछ केंद्रों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश आगंनबाड़ी केंद्रों पर यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी और इसका संचालन कागजों पर ही किया जाता रहा।
गोंडा। हौसला पोषण योजना के संचालन के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर 15 सौ रुपये की धनराशि से बर्तन की खरीद की जानी थी। साथ ही आगंनबाड़ी भवन पर योजना के मीनू को लिखाने के लिए भी प्रत्येक सेंटर पर 250 रुपये की धनराशि का आवंटन किया गया था। इसके मुताबिक 2913 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 51 लाख रूपये की धनराशि खर्च की जानी थी। यह धनराशि तो खर्च हो गई लेकिन न तो कहीं बर्तन की खरीद हुई और न ही मीनू की वॉल राइटिंग ही कराई गई।
गोंडा। हौसला पोषण योजना के संचालन को लेकर हकीकत चाहे जो भी लेकिन कार्यक्रम विभाग के अफसर योजना के संचालन में शिथिलता बरतने के दावे को सिरे से खारिज करते हैं। विभाग के अफसरों का दावा है कि इस योजना से करीब 35 हजार लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है।
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समाजवादी पार्टी की सरकार के मुखिया रहे अखिलेश यादव ने आगंनबाडी़ केंद्रों पर पंजीकृत अतिकुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार उपलब्ध कराकर उन्हे कुपोषण से मुक्त करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को पूरा करने के लिए जुलाई 2016 में जिले के 2913 आगंनबाड़ी केंद्रों पर हौसला पोषण योजना का शुभारंभ किया गया था। शासन ने दो किश्तों में जिले को दस करोड़ रुपये की धनराशि का आवंटन किया था।
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इस धनराशि से केंद्रों पर पंजीकृत अतिकुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मीनू के मुताबिक भोजन, फल, दूध व घी उपलब्ध कराये जाने का निर्देश था। योजना के संचालन की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्री व संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान को सौंपी गई थी। संचालन के लिए दोनों का संयुक्त खाता बैंकों में खोला जाना था लेकिन अफसरों की शिथिलता के चलते यह योजना कागजों पर ही दम तोड़ गई।
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विभाग के अफसरों ने बैंको में खाता तो खुलवा दिया लेकिन उसके बाद इस योजना की मॉनिटरिंग करना भूल गए। अपवाद के रूप में कुछ केंद्रों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश आगंनबाड़ी केंद्रों पर यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी और इसका संचालन कागजों पर ही किया जाता रहा।
गोंडा। हौसला पोषण योजना के संचालन के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर 15 सौ रुपये की धनराशि से बर्तन की खरीद की जानी थी। साथ ही आगंनबाड़ी भवन पर योजना के मीनू को लिखाने के लिए भी प्रत्येक सेंटर पर 250 रुपये की धनराशि का आवंटन किया गया था। इसके मुताबिक 2913 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 51 लाख रूपये की धनराशि खर्च की जानी थी। यह धनराशि तो खर्च हो गई लेकिन न तो कहीं बर्तन की खरीद हुई और न ही मीनू की वॉल राइटिंग ही कराई गई।
गोंडा। हौसला पोषण योजना के संचालन को लेकर हकीकत चाहे जो भी लेकिन कार्यक्रम विभाग के अफसर योजना के संचालन में शिथिलता बरतने के दावे को सिरे से खारिज करते हैं। विभाग के अफसरों का दावा है कि इस योजना से करीब 35 हजार लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है।