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तस्करी लिए ले बिहार ले जा रहे थे वैशाली टे्रन से शराब
Updated Thu, 27 Jul 2017 01:03 AM IST
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हरियाणा से खरीद बिहार में बेच रहे शराब
तस्करी लिए हरियाणा से आने वाली ट्रेनों का हो रहा इस्तेमाल
तस्करों ने कोच अटेंडेट, जीआरपी सिपाही और अन्य कर्मियों से की साठगांठ
मनोज कुमार श्रीवास्तव
गोंडा। वैशाली एक्सप्रेस एक्सप्रेस के एक कोच में रविवार की रात मिली एक पेटी शराब के पीछे किसी और का नहीं बल्कि बिहार में बैठे उन तस्करों का हाथ हैं, जिन्होंने ट्रेन के कोच अटेंडेंट को अपना मोहरा बना रखा था। जिसके जरिए वह हरियाणा से शराब की खरीददारी कर उसे बिहार के शराब तस्करों को दे देता था। जहां से वह इसी शराब की ऊंचे दामों पर बिक्री करते थे। मामले में पांच लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जीआरपी अब कोच अटेंडेट के माध्यम से इसकी तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंचने की फिराक में है। जिसके लिए सोमवार को कोच अटेंडेंट के बयान दर्ज किए गए। सूत्रों की मानें तो शराब तस्करी के इस खेल में अकेले कोच अटेंडेंट का ही नहीं है, बल्कि इसमें ट्रेन में तैनात सिपाहियों की भूमिका भी संदेहास्पद है।
गौरतलब है कि रविवार की सुबह दिल्ली से होकर गोंडा आई वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस टे्रन में एक महिला का बैग गुम हो गया था। इसी ट्रेन पर सवार होकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बालमुकुंद पाण्डेय गोंडा आ रहे थे। महिला और बालमुकुंद पाण्डेय एक ही कोच में थे। इस कारण वह महिला की मदद के लिए जब आगे आए तो उन्होंने देखा कि ट्रेन का कोच अटेंडेंट नशे में है। स्टेशन पर जब ट्रेन के कोच की तलाशी हुई तो उसमें एक पेटी शराब दिख गई। जो कि बिहार तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। रविवार को सुबह से लेकर रात तक चली जद्दोजहद के बाद इस मामले में कोच अटेंडेंट सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और बरामद शराब को जब्त कर लिया गया। सोमवार को इसी मामले में जीआरपी ने कोच अटेेंडेंट से मिलकर उसके बयान दर्ज किए। वहीं अब जीआरपी की नजर बिहार में बैठकर तस्करी का धंधा चला रहे उन मास्टरमाइंड पर है। जो कोच अटेंडेंट को मोहरा बनाकर बिहार में शराब मंगवाते हैं और फिर इसे मंहगे दामों पर बेंचते है।
जीआरपी के पुलिस अधीक्षक डा. धर्मवीर सिंह भी इस बात को मानते हैं कि वैशाली ट्रेन से शराब बिहार में तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। क्योंकि वहां शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। उनके मुताबिक वह इस मामले में हर किसी का बयान दर्ज कर इसकी तह तक जाने से नहीं चूकेंगे। क्योंकि अभी तक यह सिर्फ एक ट्रेन की बात है। पता नहीं ऐसे कितनी ट्रेनों से बिहार में शराब मंगवाई जाती होगी। हालांकि इस पूरे मामले में ट्रेन के स्कॉर्ट में लगे जवानों की भी भूूमिका संदेहास्पद है। इसलिए पूरे मामले को रफा-दफा करने में भी कुछ लोग जुट गए हैं।
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तस्करी लिए हरियाणा से आने वाली ट्रेनों का हो रहा इस्तेमाल
तस्करों ने कोच अटेंडेट, जीआरपी सिपाही और अन्य कर्मियों से की साठगांठ
मनोज कुमार श्रीवास्तव
गोंडा। वैशाली एक्सप्रेस एक्सप्रेस के एक कोच में रविवार की रात मिली एक पेटी शराब के पीछे किसी और का नहीं बल्कि बिहार में बैठे उन तस्करों का हाथ हैं, जिन्होंने ट्रेन के कोच अटेंडेंट को अपना मोहरा बना रखा था। जिसके जरिए वह हरियाणा से शराब की खरीददारी कर उसे बिहार के शराब तस्करों को दे देता था। जहां से वह इसी शराब की ऊंचे दामों पर बिक्री करते थे। मामले में पांच लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जीआरपी अब कोच अटेंडेट के माध्यम से इसकी तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंचने की फिराक में है। जिसके लिए सोमवार को कोच अटेंडेंट के बयान दर्ज किए गए। सूत्रों की मानें तो शराब तस्करी के इस खेल में अकेले कोच अटेंडेंट का ही नहीं है, बल्कि इसमें ट्रेन में तैनात सिपाहियों की भूमिका भी संदेहास्पद है।
गौरतलब है कि रविवार की सुबह दिल्ली से होकर गोंडा आई वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस टे्रन में एक महिला का बैग गुम हो गया था। इसी ट्रेन पर सवार होकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बालमुकुंद पाण्डेय गोंडा आ रहे थे। महिला और बालमुकुंद पाण्डेय एक ही कोच में थे। इस कारण वह महिला की मदद के लिए जब आगे आए तो उन्होंने देखा कि ट्रेन का कोच अटेंडेंट नशे में है। स्टेशन पर जब ट्रेन के कोच की तलाशी हुई तो उसमें एक पेटी शराब दिख गई। जो कि बिहार तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। रविवार को सुबह से लेकर रात तक चली जद्दोजहद के बाद इस मामले में कोच अटेंडेंट सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और बरामद शराब को जब्त कर लिया गया। सोमवार को इसी मामले में जीआरपी ने कोच अटेेंडेंट से मिलकर उसके बयान दर्ज किए। वहीं अब जीआरपी की नजर बिहार में बैठकर तस्करी का धंधा चला रहे उन मास्टरमाइंड पर है। जो कोच अटेंडेंट को मोहरा बनाकर बिहार में शराब मंगवाते हैं और फिर इसे मंहगे दामों पर बेंचते है।
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जीआरपी के पुलिस अधीक्षक डा. धर्मवीर सिंह भी इस बात को मानते हैं कि वैशाली ट्रेन से शराब बिहार में तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। क्योंकि वहां शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। उनके मुताबिक वह इस मामले में हर किसी का बयान दर्ज कर इसकी तह तक जाने से नहीं चूकेंगे। क्योंकि अभी तक यह सिर्फ एक ट्रेन की बात है। पता नहीं ऐसे कितनी ट्रेनों से बिहार में शराब मंगवाई जाती होगी। हालांकि इस पूरे मामले में ट्रेन के स्कॉर्ट में लगे जवानों की भी भूूमिका संदेहास्पद है। इसलिए पूरे मामले को रफा-दफा करने में भी कुछ लोग जुट गए हैं।
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