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गौशाला शुरू होते ही आधा दर्जन मवेशी मरे
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भूख और प्यास से तड़पकर मर गए आधा दर्जन गोवंश
गोंडा । क्षेत्र में अभी तीन दिन पहले शुरू हुए गोशाला केंद्र में करीब आधा दर्जन गोवंश भूख और प्यास से तड़पकर मर गए। गोशाला शुरू होते ही ग्रामीणों ने मवेशियों को खदेड़कर इसके अंदर कर दिया लेकिन यहां हरे चारे और पानी का इंतजाम न होने के कारण मवेशियों ने दम तोड़ दिया।
पांच अप्रैल को रुद्रगढ़ नौसी के निर्माणाधीन गोशाले को जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आरपी यादव की उपस्थिति में बेसहारा पशुओं के लिए खोल दिया गया था।
लेकिन इस आश्रय केंद्र में हरे चारे छांव व प्रकाश तथा पानी पीने की समुचित व्यवस्था अभी भी नहीं है। जिस कारण अभी तक आधा दर्जन पशु मर चुके हैं सोमवार को भी दो गाय गोशाला के अंदर बेहोशी की हालत में पड़ी मिलीं।
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शुक्रवार को प्रारंभ हुए इस गोशाले के प्रारंभ होने की भनक लगते ही आसपास के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पशुओं को लाकर गोशाले में जमा कर दिया था, जिसमें से उसी समय ही 5 पशु बाड़ फांद कर भाग गए थे।
लेकिन इस गौशाला में अभी तक प्रकाश, हरा चारा, छांव तथा पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। आस पास के ग्रामीणों का कहना है अब तक आधे दर्जन गोवंश की मौत हो चुकी है, लेकिन बाहर से आने वाले पशुओं का क्रम अभी भी जारी है।
लेकिन गोशाले में कार्यरत कर्मचारी उन्हें प्रवेश नहीं दे रहे हैं और बाहर से आने वाले इन बेसहारा पशुओं को लोग बाहर ही छोड़कर चले जाते हैं और ये जानवर हम लोगों के लिए सरदर्द बने हुए।
सिंहपुर के जगदीश प्रसाद तिवारी, शंकर लाल, दद्दन तिवारी का कहना है कुछ तो जानवर बाहर से लाकर गौशाले के बाहर छोड़ दिये गये हैं और कुछ दीवार फांद कर हम लोगों की फसल चौपट कर रहे हैं।
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी यादव ने बताया कि फिलहाल गोशाला की क्षमता के अनुसार संख्या फुल हो गयी है। दूसरे एक साथ ही नर व मादा दोनों रह रहे हैं और यह नर पशु मादा पशुओं को परेशान करते हैं जिस कारण से यह समस्या पैदा हुई।
नर पशुओं का तेजी के साथ बध्याकरण किया जा रहा है। जो पशु घायल हो गए व बीमार हैं उनकी चिकित्सा की जा रही है। गोशाला संचालन समिति की अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान रूद्रगढ़ नौसी अकबरूल निशान ने बताया कि इन पशुओं के अलग-अलग रहने के लिए अस्थाई बाड़ की व्यवस्था की जा रही है।
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गोंडा । क्षेत्र में अभी तीन दिन पहले शुरू हुए गोशाला केंद्र में करीब आधा दर्जन गोवंश भूख और प्यास से तड़पकर मर गए। गोशाला शुरू होते ही ग्रामीणों ने मवेशियों को खदेड़कर इसके अंदर कर दिया लेकिन यहां हरे चारे और पानी का इंतजाम न होने के कारण मवेशियों ने दम तोड़ दिया।
पांच अप्रैल को रुद्रगढ़ नौसी के निर्माणाधीन गोशाले को जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आरपी यादव की उपस्थिति में बेसहारा पशुओं के लिए खोल दिया गया था।
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लेकिन इस आश्रय केंद्र में हरे चारे छांव व प्रकाश तथा पानी पीने की समुचित व्यवस्था अभी भी नहीं है। जिस कारण अभी तक आधा दर्जन पशु मर चुके हैं सोमवार को भी दो गाय गोशाला के अंदर बेहोशी की हालत में पड़ी मिलीं।
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शुक्रवार को प्रारंभ हुए इस गोशाले के प्रारंभ होने की भनक लगते ही आसपास के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पशुओं को लाकर गोशाले में जमा कर दिया था, जिसमें से उसी समय ही 5 पशु बाड़ फांद कर भाग गए थे।
लेकिन इस गौशाला में अभी तक प्रकाश, हरा चारा, छांव तथा पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। आस पास के ग्रामीणों का कहना है अब तक आधे दर्जन गोवंश की मौत हो चुकी है, लेकिन बाहर से आने वाले पशुओं का क्रम अभी भी जारी है।
लेकिन गोशाले में कार्यरत कर्मचारी उन्हें प्रवेश नहीं दे रहे हैं और बाहर से आने वाले इन बेसहारा पशुओं को लोग बाहर ही छोड़कर चले जाते हैं और ये जानवर हम लोगों के लिए सरदर्द बने हुए।
सिंहपुर के जगदीश प्रसाद तिवारी, शंकर लाल, दद्दन तिवारी का कहना है कुछ तो जानवर बाहर से लाकर गौशाले के बाहर छोड़ दिये गये हैं और कुछ दीवार फांद कर हम लोगों की फसल चौपट कर रहे हैं।
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी यादव ने बताया कि फिलहाल गोशाला की क्षमता के अनुसार संख्या फुल हो गयी है। दूसरे एक साथ ही नर व मादा दोनों रह रहे हैं और यह नर पशु मादा पशुओं को परेशान करते हैं जिस कारण से यह समस्या पैदा हुई।
नर पशुओं का तेजी के साथ बध्याकरण किया जा रहा है। जो पशु घायल हो गए व बीमार हैं उनकी चिकित्सा की जा रही है। गोशाला संचालन समिति की अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान रूद्रगढ़ नौसी अकबरूल निशान ने बताया कि इन पशुओं के अलग-अलग रहने के लिए अस्थाई बाड़ की व्यवस्था की जा रही है।