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रिंग बांध का हिस्सा नदी में समाया,बांध के आस्तित्व पर संकट
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:47 PM IST
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40 मीटर कटा रिंग बांध, दो जियो ट्यूब भी नदी में समाई
लोनियनपुरवा व अहिरनपुरवा समेत चार गांव के अस्तित्व पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज गोंडा। घाघरा नदी के घटते जलस्तर से कटान तेज हो गई है। एल्गिन चरसड़ी बांध को बचाने के लिए बनाया गया रिंग बांध रविवार को इस कटान की जद में आ गया और कट वन का करीब 100 मीटर हिस्सा नदी की धारा में समा गया। इस कटान के बाद रिंग बांध के आस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। एल्गिन चरसड़ी बांध के कट टू का 40 मीटर हिस्सा भी कटकर नदी में समा गया और इस कट को बचाने के लिए लगाई गई दो जियो ट्यूब भी नदी की धारा में बह गई। इस कटान के कारण रविवार को लोनियनपुरवा, अहिरनपुरवा, प्रतापपुर व घरकुइयां गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं।
शनिवार से घाघरा नदी के घटते जलस्तर ने प्रशासन को भले ही राहत दी हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतों पर इस घटते जलस्तर का कोई फर्क नही पड़ा है। रविवार की शाम तक 2 नये मजरे अहिरनपुरवा व लोनियनपुरवा बाढ़ के पानी से घिर गये। इसके बाद बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या 122 तक पहुंच गई है। बाढ़ से प्रभावित नकहरा और काशीपुर के मजरों में पानी तेजी से घट रहा है।बावलूद इसके पानी के फैलाव के चलते आने जाने वाले रास्ते पानी में डूबे हुए है और लोगो को आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्य प्रभावित गांवों में पानी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। घाघरा नदी का जलस्तर जैसे जैसे घट रहा है नदी की कटान तेज होती जा रही है। रविवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध के कटे हुए हिस्से कट-टू का और 40 मीटर हिस्सा कटान की चपेट में आ गया और इस कट को बचाने के लिए लगाई गई दो जियो टयूब दो लेन बालू समेत नदी में समा गई। प्रशासन के कर्मचारी इस कट को बचाने बालू की बोरियां लगाकर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास कर रहे है। एल्गिन चरसड़ी बांध को बचाने के लिए बनाया गया रिंग बांध भी रविवार को घाघरा नदी की कटान की जद में आ गया। रविवार को रिंग बांध के कट-थ्री का करीब 100 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। इस कटान के बाद अब रिंग बांध के आस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। रिंग बांध के कटने से पानी का बहाव अब दो नए गांवों प्रतापपुर व घरकुंइयंा की तरफ हो गया है जिससे इन दोनो गांवों में भीषण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रविवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। रविवार को घाघरा नदी का जलस्तर 105.806 पर स्थिर रहा।
इनसेट
नमक व रोटी के साथ गुजर रहा दिन
करनैलगंज। राहत के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा करने वाला जिला प्रशासन के अफसर बांध पर बसे लोगों को दो जून की रोटी भी ठीक ढंग से नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। रविवार को बांध पर तिरपाल तान कर जीवन व्यतीत करने वाले एक 70 वर्षीय बुजुर्ग रामसेवक दो रोटी व सादे नमक के साथ अपनी भूख मिटाते दिखे। पूछने पर रामसेवक ने बताया मजदूरी करके उनके परिवार का गुजारा चलता है। चारों तरफ पानी भर जाने से रोजी ठप हो गई है। कहीं से एक भी रुपये की आमदनी नही है। ऐसे में सब्जी खरीदना उनके पहुंच से बाहर है। प्रशासन की तरफ से कोई राहत सामग्री नही मिली है। ऐसे मेें दिन भर में एक बार नमक रोटी खाकर जिंदगी गुजर रही है।
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इनसेट
किट वितरण होते ही तहसीलदार ने बंद कराया भोजन
करनैलगंज। घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार से बाढ़ पीड़ितों को राशन किट का वितरण शुरु कराया है। राशन किट का वितरण होते ही करनैलगंज तहसीलदार रमेश बाबू ने बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए जा रहे भोजन की व्यवस्था को बंद करा दिया। भोजन बनाने का ठेका लेने वाले कैटर्स अरविन्द कुमार ने बताया कि तहसीलदार शनिवार की शाम को भोजन बनाने पर रोक लगा दी थी। तहसीलदार का कहना है कि पानी लगातार घट रहा है ऐसी स्थिति में बाढ़ पीड़ित राशन से भोजन बना सकते हैं।
इनसेट
एक नाव पर 76 लोगों ने की सवारी
बाढ से प्रभावित रायपुर गांव के लोग अपनी गृहस्थी चलाने के लिए अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे है। इस गांव के लोगों को अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए घाघरा नदी को पार कर जरवल बाजार तक आना पड़ता है। रविवार को इसी खरीददारी के लिए रायपुर गांव के 76 लोग एक ही नाव पर सवार होकर नकहरा गांव तक आए। जयकरन, रामजागे, बुधराम, अनन्तू, रामसेवक आदि ने बताया कि घर चलाने का सामान खरीदने के लिए उन्हें घाघरा नदी को पार करना पड़ता है। कम दूरी के कारण बाढ पीड़ित नकहरा होते हुए गौरा सिंहपुर बाजार या जरवल रोड से सामान खरीदने के लिए आते हैं।
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लोनियनपुरवा व अहिरनपुरवा समेत चार गांव के अस्तित्व पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज गोंडा। घाघरा नदी के घटते जलस्तर से कटान तेज हो गई है। एल्गिन चरसड़ी बांध को बचाने के लिए बनाया गया रिंग बांध रविवार को इस कटान की जद में आ गया और कट वन का करीब 100 मीटर हिस्सा नदी की धारा में समा गया। इस कटान के बाद रिंग बांध के आस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। एल्गिन चरसड़ी बांध के कट टू का 40 मीटर हिस्सा भी कटकर नदी में समा गया और इस कट को बचाने के लिए लगाई गई दो जियो ट्यूब भी नदी की धारा में बह गई। इस कटान के कारण रविवार को लोनियनपुरवा, अहिरनपुरवा, प्रतापपुर व घरकुइयां गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं।
शनिवार से घाघरा नदी के घटते जलस्तर ने प्रशासन को भले ही राहत दी हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतों पर इस घटते जलस्तर का कोई फर्क नही पड़ा है। रविवार की शाम तक 2 नये मजरे अहिरनपुरवा व लोनियनपुरवा बाढ़ के पानी से घिर गये। इसके बाद बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या 122 तक पहुंच गई है। बाढ़ से प्रभावित नकहरा और काशीपुर के मजरों में पानी तेजी से घट रहा है।बावलूद इसके पानी के फैलाव के चलते आने जाने वाले रास्ते पानी में डूबे हुए है और लोगो को आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्य प्रभावित गांवों में पानी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। घाघरा नदी का जलस्तर जैसे जैसे घट रहा है नदी की कटान तेज होती जा रही है। रविवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध के कटे हुए हिस्से कट-टू का और 40 मीटर हिस्सा कटान की चपेट में आ गया और इस कट को बचाने के लिए लगाई गई दो जियो टयूब दो लेन बालू समेत नदी में समा गई। प्रशासन के कर्मचारी इस कट को बचाने बालू की बोरियां लगाकर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास कर रहे है। एल्गिन चरसड़ी बांध को बचाने के लिए बनाया गया रिंग बांध भी रविवार को घाघरा नदी की कटान की जद में आ गया। रविवार को रिंग बांध के कट-थ्री का करीब 100 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। इस कटान के बाद अब रिंग बांध के आस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। रिंग बांध के कटने से पानी का बहाव अब दो नए गांवों प्रतापपुर व घरकुंइयंा की तरफ हो गया है जिससे इन दोनो गांवों में भीषण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रविवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। रविवार को घाघरा नदी का जलस्तर 105.806 पर स्थिर रहा।
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नमक व रोटी के साथ गुजर रहा दिन
करनैलगंज। राहत के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा करने वाला जिला प्रशासन के अफसर बांध पर बसे लोगों को दो जून की रोटी भी ठीक ढंग से नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। रविवार को बांध पर तिरपाल तान कर जीवन व्यतीत करने वाले एक 70 वर्षीय बुजुर्ग रामसेवक दो रोटी व सादे नमक के साथ अपनी भूख मिटाते दिखे। पूछने पर रामसेवक ने बताया मजदूरी करके उनके परिवार का गुजारा चलता है। चारों तरफ पानी भर जाने से रोजी ठप हो गई है। कहीं से एक भी रुपये की आमदनी नही है। ऐसे में सब्जी खरीदना उनके पहुंच से बाहर है। प्रशासन की तरफ से कोई राहत सामग्री नही मिली है। ऐसे मेें दिन भर में एक बार नमक रोटी खाकर जिंदगी गुजर रही है।
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किट वितरण होते ही तहसीलदार ने बंद कराया भोजन
करनैलगंज। घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार से बाढ़ पीड़ितों को राशन किट का वितरण शुरु कराया है। राशन किट का वितरण होते ही करनैलगंज तहसीलदार रमेश बाबू ने बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए जा रहे भोजन की व्यवस्था को बंद करा दिया। भोजन बनाने का ठेका लेने वाले कैटर्स अरविन्द कुमार ने बताया कि तहसीलदार शनिवार की शाम को भोजन बनाने पर रोक लगा दी थी। तहसीलदार का कहना है कि पानी लगातार घट रहा है ऐसी स्थिति में बाढ़ पीड़ित राशन से भोजन बना सकते हैं।
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एक नाव पर 76 लोगों ने की सवारी
बाढ से प्रभावित रायपुर गांव के लोग अपनी गृहस्थी चलाने के लिए अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे है। इस गांव के लोगों को अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए घाघरा नदी को पार कर जरवल बाजार तक आना पड़ता है। रविवार को इसी खरीददारी के लिए रायपुर गांव के 76 लोग एक ही नाव पर सवार होकर नकहरा गांव तक आए। जयकरन, रामजागे, बुधराम, अनन्तू, रामसेवक आदि ने बताया कि घर चलाने का सामान खरीदने के लिए उन्हें घाघरा नदी को पार करना पड़ता है। कम दूरी के कारण बाढ पीड़ित नकहरा होते हुए गौरा सिंहपुर बाजार या जरवल रोड से सामान खरीदने के लिए आते हैं।