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दुराचारी को 10 साल की सजा
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Thu, 20 Oct 2016 11:48 PM IST
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jail shimla
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त्वरित सत्र न्यायाधीश प्रथम ने दुराचार के एक आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायाधीश ने आरोपी को 20 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
सादुल्लाहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम नथईपुर निवासी नेबूलाल के खिलाफ एक महिला ने लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने की रिपोर्ट नौ फरवरी 2013 को लिखाई थी। पीड़िता की मां का आरोप था कि वह दूसरे गांव में काम के सिलसिले में गई थी।
तभी लड़की को अकेला पाकर आरोपी अपने साथ ले गया। पुलिस ने नाबालिग लड़की को अगवा करने का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान लड़की को पुलिस ने तलाश लिया। लड़की का डॉक्टरी परीक्षण कराकर मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया गया।
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पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष नेबूलाल पर दुराचार करने का आरोप लगाया। पुलिस ने दुराचार करने व नाबालिग लड़की को अगवा करने का आरोपी मानते हुए नेबूलाल के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने नेबूलाल को दुराचार करने व नाबालिग लड़की को अगवा करने का आरोपी माना। न्यायाधीश ने नेबूलाल को 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेेगा।
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सादुल्लाहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम नथईपुर निवासी नेबूलाल के खिलाफ एक महिला ने लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने की रिपोर्ट नौ फरवरी 2013 को लिखाई थी। पीड़िता की मां का आरोप था कि वह दूसरे गांव में काम के सिलसिले में गई थी।
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तभी लड़की को अकेला पाकर आरोपी अपने साथ ले गया। पुलिस ने नाबालिग लड़की को अगवा करने का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान लड़की को पुलिस ने तलाश लिया। लड़की का डॉक्टरी परीक्षण कराकर मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया गया।
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पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष नेबूलाल पर दुराचार करने का आरोप लगाया। पुलिस ने दुराचार करने व नाबालिग लड़की को अगवा करने का आरोपी मानते हुए नेबूलाल के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने नेबूलाल को दुराचार करने व नाबालिग लड़की को अगवा करने का आरोपी माना। न्यायाधीश ने नेबूलाल को 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेेगा।